रिपोर्ट @संतोष कुमार मिश्रा
जिले में 85 स्वीकृत पदों की जगह 36 चिकित्सक दे रहे सेवाएं
मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलना बनी मृग मरीचिका
उमरिया --- स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध सरकार की करनी और कथनी का सही अंदाज लगाने के लिए जिला चिकित्सालय उमरिया में उपलब्ध चिकित्सकों का आंकड़ों ही पर्याप्त है, जहाँ पर जिले भर में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिले की जनसंख्या के अनुपात में 85 चिकित्सकों के पद स्वीकृत किये गए हैं परंतु इनके जगह पर कुल 36 चिकित्सक ही सेवाएं दे पा रहे हैं, अभी भी 59 चिकित्सकों की कमी बनी हुई है।बिषय विशेषज्ञों के अभाव में यह काम साधारण चिकित्सकों से कराया जाता है।चिकित्सकों की इस कमी को लेकर सतत् रूप से आवाज उठायी जाती रही है लेकिन नगाड खाने में तूती की आवाज सुनाई नहीं देती की कहावत को चरितार्थ हो रही है उमरिया जिले में चिकित्सकों की इस कमी का असर यहाँ के मरीजों को भुगतना पड़ता है, फिर भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी व्ही के चंदेल जी ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को संभालने के लिए रात दिन की मशक्कत करते हुए पटरी पर बना रखी है। जिले भर में मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए लगातार निगरानी करते हुए जिले भर की आवाज को सुनकर उनको स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का सराहनीय प्रयास करते हैं।मुख्य चिकित्सा अधिकारी का उद्देश्य यह है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिये हमारा अमला सतत रूप से सक्रिय रहकर काम करता है फिर भी अगर कही कोई शिकायत आती है तो त्वरित निदान करा कर चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराया जाता है । गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बिषय विशेषज्ञों के अभाव में मेडिकल कालेज भेजकर इलाज कराया जाता है। वैसे भी चिकत्सको की कमी होने के कारण जिले भर के मरीजों का भार जिला चिकित्सालय पर बना रहता है।
जिले में डॉक्टरों और विशेषज्ञों के कुल 85 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 36 डॉक्टर और विशेषज्ञ ही सेवाएं दे रहे हैं। यह स्थिति जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक बनी हुई है।
*जिला व सामुदायिक अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी*
जिला चिकित्सालय में भी डॉक्टरों की कमी गंभीर है। यहां डॉक्टर और विशेषज्ञों के 30 स्वीकृत पदों में से केवल 9 पदों पर ही डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 21 पद खाली हैं। मेडिकल ऑफिसर के 19 स्वीकृत पदों में से सिर्फ एक ही पदस्थ है, जिससे 18 पद रिक्त हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति भी चिंताजनक है। विशेषज्ञों के 11 पद स्वीकृत होने के बावजूद एक भी विशेषज्ञ तैनात नहीं है। डॉक्टरों के कुल 7 पदों में से केवल 3 डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 4 पद खाली पड़े हैं।
*पीएचसी में 18 में से सिर्फ 4 डॉक्टर तैनात*
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी डॉक्टरों की भारी कमी है। यहां मेडिकल डॉक्टरों के 18 पद स्वीकृत हैं, लेकिन सिर्फ 4 डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं, जिससे 14 पद रिक्त हैं। वर्तमान में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था 19 बांडेड डॉक्टरों के माध्यम से संचालित की जा रही है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी व्ही.के. चंदेल ने बताया कि रिक्त पदों की जानकारी लगातार उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि कम संसाधनों और सीमित स्टाफ के बावजूद मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।



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