सुशील कुमार प्रजापति
शहडोल - नगरपालिका अनूपपुर की प्रशासक व कलेक्टर अनूपपुर सुश्री सोनिया मीना ने नगरपालिका धनपुरी के प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी, राजस्व उप निरीक्षक श्री रविकरण त्रिपाठी धारणाधिकार निकाय नगरपालिका परिषद् अनूपपुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय परियोजना अधिकारी जिला शहरी विकास अभिकरण अनूपपुर नियत किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता नगरपालिका परिषद धनपुरी जिला शहडोल से होगी। उक्त कार्यवाही उनके द्वारा कर्तव्यों के र्प्रति घोर लापरवाही एवं उदासीनता का परिचायक होने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम-1965 में वर्णित प्रावधानों के विपरीत होने तथा उक्त कृत्य के दृष्टिगत म.प्र. नगरपालिका कर्मचारी (भर्ती तथा सेवा शर्तें) नियम-1968 के नियम-53 (1) में वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत धारणाधिकार नगरपालिका परिषद अनूपपुर जिला अनूपपुर होने से म.प्र. नगरपालिका कर्मचारी भर्ती तथा सेवा शर्ते नियम-1968 के नियम-51 के अंतर्गत अनुशासनात्मक प्राधिकारी एवं नगरपालिका अधिनियम की धारा 94 (5) के तहत प्रेसीडेंट इन कौंसिल को होने से म.प्र. नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 328 (7 ख) में प्रेसीडेंट इन कौसिंल की समस्त शक्तियां प्रशासक को निहित होने से राजस्व उप निरीक्षक प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी धनपुरी श्री रविकरण त्रिपाठी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
ज्ञात हो कि श्री त्रिपाठी द्वारा नवगठित नगर परिषद बकहो में मानदेय, संविदा पर कार्यरत 14 कर्मचारियें के साथ-साथ 39 कर्मचारियों जिनकी नियुक्ति मानदेय पर नगर परिषद बकहो में गठन की अधिसूचना प्रकाषित किये जाने के दिनांक 26.09.2016 के पष्चात की गई थी, जो कि ग्राम पंचायत बकहों क्षेत्र के निवासी भी नही थे की सूची भी प्रपत्र स में तैयार कर संयुक्त संचालक नगरीय प्रषासन एवं विकास विभाग शहडोल को सौंपी गई। साथ ही उनका संविलियन किये जाने हेतु जिला चयन समिति की बैठक की अनुशंसा की गई। जिसके परिणाम स्वरूप बैठक में संविलियन किये जाने का निर्णय किया गया। उपरोक्त के परिणाम स्वरूप एक संविदाकर्मी एवं 52 मानदेय कर्मियों का संविलियन नगर परिषद बकहो में नियमित पदों पर कर दिया गया जो कि मध्यप्रदेष नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 7 छ एवं अधिनियम के अंतर्गत निर्मित मध्यप्रदेष नगरपालिका सेवा (वेतनमान एवं भत्ता) नियम 1967 में वर्णित प्रावधानों के विपरीत है। जिससे निकाय को माह अक्टूबर 2021 तक लगभग 65 लाख रूपये की आर्थिक क्षति हुई जिसके लिए श्री त्रिपाठी अनुपातिक रूप से 1/9 भागीदारी हेतु उत्तरदायी है।

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