मिर्जा अफसार बेग
अनूपपुर (स्वतंत्र व्यू)। जैतहरी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत धुरवासिन इन दिनों कथित अवैध मुरूम खनन को लेकर सुर्खियों में है। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के आरोप हैं कि सरकारी नियमों, खनिज अधिनियमों और पर्यावरणीय मानकों को दरकिनार कर दो भारी-भरकम पोकलेन मशीनों से बड़े पैमाने पर मुरूम का उत्खनन किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि इस मुरूम का उपयोग जैतहरी-धुरवासिन सड़क निर्माण कार्य में खुलेआम किया जा रहा है, जबकि जिले में वर्तमान में मुरूम उत्खनन के लिए किसी वैध खदान के संचालन की जानकारी सामने नहीं आई है।
स्वीकृत खदान नहीं, फिर हजारों घनमीटर मुरूम कहां से आई?
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि जिले में मुरूम उत्खनन के लिए कोई वैध अनुमति नहीं है, तो आखिर प्रतिदिन बड़ी संख्या में डंपरों से मुरूम का परिवहन किस आधार पर किया जा रहा है? क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन की आंखों के सामने चल रही यह गतिविधि पूरे खनिज तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
केसरवानी स्टोन क्रेशर की पर्चियों से हो रहा परिवहन?
क्षेत्र में चर्चा है कि कथित अवैध मुरूम के परिवहन को वैध दिखाने के लिए केसरवानी स्टोन क्रेशर की पर्चियों का उपयोग ट्रांजिट पास के रूप में किया जा रहा है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं बल्कि राजस्व चोरी, दस्तावेजों के दुरुपयोग और विभागीय मिलीभगत से जुड़े बड़े आर्थिक घोटाले का रूप ले सकता है।
खनिज विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
धुरवासिन क्षेत्र में लगातार चल रही पोकलेन मशीनों की गड़गड़ाहट और डंपरों की आवाजाही स्थानीय लोगों के लिए सामान्य दृश्य बन चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर मशीनीकृत उत्खनन और परिवहन संभव नहीं है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों ने उठाई पारदर्शिता की मांग
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि संबंधित स्थल की खदान स्वीकृति, खनन अनुमति और परिवहन में उपयोग किए जा रहे ट्रांजिट पास के सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही, कथित अवैध खनन स्थल का संयुक्त निरीक्षण कर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में अवैध उत्खनन की पुष्टि होती है तो मौके पर संचालित पोकलेन मशीनों और परिवहन में लगे वाहनों को तत्काल जब्त किया जाए, संबंधित ठेकेदारों एवं दोषी अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएं तथा अवैध रूप से निकाले गए खनिज पर रॉयल्टी की वसूली के साथ भारी अर्थदंड लगाया जाए।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
धुरवासिन में कथित अवैध मुरूम खनन का मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन चुका है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल अवैध उत्खनन का मामला नहीं होगा, बल्कि सरकारी राजस्व, प्राकृतिक संसाधनों और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रकरण माना जाएगा। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह कथित अवैध कारोबार पहले की तरह बेखौफ जारी रहता है।


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