मोहम्मद शकील
शहड़ोल। आम आदमी की कमाई का एक बड़ा हिस्सा और खर्च उसके द्वारा अपनें बच्चे की शिक्षा में किया जाता है। शिक्षा को लेकर कोई भी अभिभावक अपनी सामर्थ्यता अनुरुप वह हर संभव प्रयास करता है जिससे वह अपनें बच्चों का बेहतर भविष्य सवार सके और उत्तम शिक्षा दिला सके। लेकिन उसके द्वारा खर्च की जानें वाली इस रकम के पीछे ऐसे तमाम अधिकार भी उसके पास होते हैं जिनका अनुपालन शिक्षा प्रदाता संस्था को करना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही दिशानिर्देशों का अनुपालन और इन पर निगरानी रखनें की ऐसी तमाम जिम्मेदारी जिला स्तर पर बैठे तमाम अधिकारियों पर भी होती है, बावजूद इसके शिक्षा को एक मोटी कमाई का व्यवसाय बनाकर तमाम ऐसे निजी विद्यालय हैं जो नियमों की खुलेआम धज्जियां उडाते हुये मोटी कमाई करनें में लगे हैं और इतने बेलगाम हो चुके हैं कि उन्हें अपनी कमाई के आगे कुछ और नजर आता दिखाई नहीं देता। कुछ ऐसी ही मनमानी बुढार में संचालित एमजीएम स्कूल की सामनें आई है जहां इन दिनों अभिभावकों को एमजीएम के मैनेजमेंट से तमाम असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
*शिक्षा से ज्यादा फीस पर फोकस*
एमजीएम स्कूल मैनेजमेंट बेहतर शिक्षा देनें के लिये भले ही जानी जाती हो और देश के विभिन्न कोनें में इनकी संस्था संचालित हो लेकिन इस संस्था की जो स्थिति जिले के कोयलांचल क्षेत्र बुढ़ार में है वह अभिभावकों के लिये परेशानी का सबब बनती नजर आ रही है। ज्यादा विकल्प न होनें से अभिभावक अपनें बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलानें के उद्देश्य से इस निजी संस्था का रुख करनें पर मजबूर हैं जिसकी सीधा फायदा एमजीएम मैनेजमेंट उठाता नजर आ रहा है। महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विद्यालय में शिक्षा से ज्यादा फीस पर फोकस किया जाता है। कोरोना काल में ऐसे तमाम अभिभावक हैं जिनके द्वारा अपनें बच्चों को एडमीशन दिलानें के बाद भी स्कूल जानें का अवसर नहीं मिल सका। ऑनलाइन क्लास की सुविधा निजी विद्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई लेकिन इसमें भी कई ऐसे अभिभावक थे जिन्होनें ऑनलाइन क्लास भी अपनें बच्चों को नहीं अटेंड कराई बावजूद इसके अब ऑफलाइन पढानें की स्थिति में स्कूल प्रबंधन उनसे पूरी फीस वसूलनें पर ही आगे की पढाई जारी रखनें की अनुमति देनें की बात कर रहा है। ऐसे में कई अभिभावक जो कोरोना की मार झेल चुके हैं उन पर अब ऑफलाइन पढा़नें की स्थिति में आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
*सुविधाओं का टोटा*
निजी शिक्षा संस्थानों में शिक्षा के साथ ही बच्चों के अन्य शारीरिक व मानसिक विकास के लिये तमाम सुविधाओं की बात कही जाती है और उसके लिये बताये अभिभावकों से मोटी फीस वशूल की जाती है। ऐसे में निजी विद्यालय के पास वहां पढ़ रहे छात्रों के लिये खेलकूद संबंधी तमाम व्यवस्थाओं के साथ खेल मैदान, स्वच्छ परिसर, पानी पीनें की उत्तम व्यवस्था, कम्प्यूटर लैब जैसी तमाम व्यवस्थाओं का होना अनिवार्य होता है। लेकिन कोयलांचल नगरी बुढार के गोपालपुर स्थिति एमजीेएम विद्यालय परिसर में ऐसी तमाम खामियां है जो बच्चों के इस विकास में बाधक बनती नजर आ रही है, बावजूद इसके इन पर ध्यान नहीं जा रहा।
*सुरक्षा के नाकाफी इंतजाम*
किसी भी विद्यालय में सुरक्षा एक ऐसा पहलू हैं जिसमें खानापूर्ति नहीं की जा सकती है। विद्यालय प्रबंधन का यह दायित्व बनता है कि विद्यालय में सुरक्षा के मापदण्डों का पूरा अनुपालन करें इसके लिये सीसीटीवी कैमरों के साथ ही गार्ड की व्यवस्था समुचित व्यवस्था आवश्यक हैं। निश्चित रुप से इन व्यवस्थाओं को पूरा करनें में मैनेजमैंट को एक मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। लेकिन शिक्षा का कमाई का जरिया बनाये एमजीएम प्रबंधन इस दिशा में भी नाकाफी इंतजाम किये हुये हैं।
*नहीं है उत्तम व्यवहार*
बेहतर शिक्षा के साथ उत्तम व्यवहार भी एक ऐसा पहलू हैं जो हर संस्था के लिये आवश्यक होता है। किसी संस्था के व्यवहार से वहां आनें वाले लोगों की उसके प्रति मानसिकता निर्मित होती है। लेकिन ठीक इसके उलट एमजीएम शैक्षणिक संस्थान,गोपालपुर में यह देखनें को नहीं मिल पा रहा है। खास बात यह है कि महज पूरा फोकस बिलडिंग पर खर्च करनें वाली गोपालपुर स्थित यह संस्था के पास कोई ऐसा डेस्क तक नहीं है जहां नियुक्त व्यक्ति आनें वाले अभिभावकों को संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकें। कार्यालय का पूरा काम महज एक कर्मचारी के हाथों सौंपे यह स्कूल अभिभावकों की जिज्ञासा की पूर्ति नहीं कर पाता। ऐसे में कई बार अभिभावक तमाम प्रश्नों का उत्तर पाये बिना ही चला जाता है। और कोई दूसरा विकल्प न होनें से अपनें बच्चों का दाखिला करानें को मजबूर होता है जिसका सीधा फायदा एमजीएम मैनेजमेंट द्वारा उठाया जा रहा है।
*प्रिंसपल हर वक्त व्यस्त*
किसी भी निजी विद्यालय में प्रिंसपल एक पद होता है जिस पर विद्यालय में बच्चों को शिक्षा प्रदान करनें से लेकर उनके तमाम संर्वागीण विकास की जिम्मेदारी में कार्यरत दायित्वों के निर्वहन करनें वाले पर निगरानी करना होता है। अभिभावक यदि किसी भी स्थिति में असंतुष्ट होता हैं तो वह प्रिंसपल से संपर्क कर संबंधित विषय पर चर्चा करना वस्तुस्थिति से अवगत कराना चाहता है। लेकिन गोपालपुर स्थिति एमजीएम शैक्षणिक संस्थान में प्रिंसपल से मुलाकात किसी व्हीव्हीआईपी से मिलने से कम नहीं हैं। नाम न बतानें की शर्त पर कुछ अभिभावकों नें बताया स्कूल संबंधी विभिन्न समस्याओं को लेकर वह कई बार प्रिंसपल से मुलाकात कर चर्चा करने का प्रयास किये, लेकिन घंटों इंतजार करनें के बावजूद प्रिंसपल नें मुलाकात करनें से स्पष्ट मना कर दिया।
*खानापूर्ति की हो जांच*
नाम न बतानें की शर्त पर कई अभिभावकों नें कहा कि एमजीएम संस्थान गोपालपुर परिसर की जिला प्रशासन द्वारा शिक्षा उपलब्ध करानें के साथ ही खेल के मैदान, क्लासरुम, सुरक्षा के इंतजाम, नियुक्त टीचिंग स्टॉफ के शैक्षणिक योग्यता जैसे तमाम बाते हैं जिनकी विधिवत जांच होनी चाहिये ताकि अभिभावकों से मोटी फीस वशूल कर बेहतर शिक्षा देनें का दावा करनें वाली संस्था की मनमानी पर लगाम सके।





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