रिपोर्ट @जयप्रकाश नामदेव
शहडोल - जयसिंहनगर ज़िम्मेदारों की मिलीभगत से घटिया सामग्री का उपयोग कर लाखों की लागत से हो रहा है गुणवत्ताविहीन भंडारण कक्ष नेट फेंसिंग मंच का निर्माण कार्य |
जयसिंहनगर क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार चरम पर देखा जा रहा है। यहां जिम्मेदार कभी भी निर्माण स्थल पर जाने की जहमत नहीं उठाते हैं। शासन की राशि का किस तरह दुर्पयोग हो रहा है उसका नजारा जयसिंहनगर क्षेत्र के ग्राम पंचायत अमझोर में देखने को मिल रहा है जहां पर करीब 10 लाख रुपए की राशि से खेल मैदान में बन रहा भंडारण कक्ष नेट फेंसिंग मंच भवन का निर्माण हो रहा है। यहां पर बिल्कुल घटिया किस्म की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। जहां पर ग्राम पंचायत में निर्माणधीन कार्य में मिट्टी युक्त रेत टूटी हुई ईंट व घटिया क्वालिटी की सीमेंट से निर्माण कार्य किया जा रहा जिसमे॔ गुणवत्ता एवं नियमानुसार मानकों के अनुरूप नियमों को ताक पर रख कर कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। वहीं इस पूरे मामले में जनप्रतिनिधि सहित विभागीय अधिकारी एवं जिम्मेदार कोई ध्यान नहीं दे रहे । निर्माण कार्य में घटिया क्वालिटी की सीमेंट लगाई जा रही है जो मानकों के अनुसार कम मात्रा में मिलाई जा रही है। वहीं ईंट भी घटिया किस्म की लगाई जा रही है।
ज़िम्मेदारों की मिलीभगत से घटिया सामग्री का उपयोग कर लाखों की लागत से हो रहा है गुणवत्ताविहीन
इस निर्माण कार्य में कहीं पर मिट्टी की ईंट लगाई जा रही है तो कहीं पर घटिया किस्म रेत लगाई जा रही हैं। अगर ग्रामीणों की मानें तो पंचायत में जो भी निर्माण कार्य हो रहे हैं उसमें भ्रष्टाचार को मुख्य पैमाने पर रखा जाता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सबसे ज्यादा शिकायतें हमारी पंचायतों से होती हैं परंतु कभी जिम्मेदार और अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती जिससे पंचयात कर्मी एवं ठेकेदारों के हौंसले बुलंद हैं और शासन जन कल्याणकारी योजना अंतर्गत निर्माणधीन कार्यो में जम कर भ्रष्टचार कर राशि का बन्दर बांट कर शासन को लाखों रुपए का चूना लगाया जा रहा है।
भ्रष्टाचार जैसे मामलों में क्या करते हैं जिम्मेदार
ज़िम्मेदारों की मिलीभगत से घटिया सामग्री का उपयोग कर लाखों की लागत से हो रहा है गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य |
जयसिंहनगर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायतों में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय मीडिया कर्मियों के द्वारा जनमत की आवाज बनकर शासन प्रशासन के प्रति चौथे स्तम्भ की भूमिका को बखूबी निभाते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वाहन करते हुते भ्रष्टाचार सम्बधी मामलों को समय समय पर उजागर करते हुए शासन प्रसाशन के संज्ञान में लाकर अपनी जिम्मेदारी को निभाते रहते हैं लेकिन विभागों में जिम्मेदार पदों पर बैठे विभागीय अधिकारी कर्मचारी इस तरह के मामलों में कार्यवाही के नाम पर कार्यालय के ही अधीनस्थ कर्मचारियों को जांच करने की जिम्मेदारी सौंप कर पूरे मामले में लीपापोती कर भ्रष्टाचारियो को भी बचा लेते है और खुद भी बच जाते हैं और जांच करने के एवज में और भी मोटी रकम वसूल भी करते हैं। पूर्व में भी ऐसे कई मामले सामने आये हैं।


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