रिपोर्ट @पंडित कृष्णा मिश्रा
* ग्रामीणों और जनजाति बहन की सूचना पर की शहडोल जिले से पोन्डा नला के आगे फतेहपुर में संचालित चर्च आहोबा यीरे महिमा प्रार्थना भवन में गोंड जनजाति के उमरिया जिला के पाली के कुमूर्दु ग्राम के युवक नीरज एवं फतेहपुर के अनामिका नाम के युवक-युवती का मत्तांतरण कर विवाह कराया जा रहा है
प्रत्यक्षदर्शी लोगों ने बताया डॉ. बी.एस बारिया द्वारा पादरी का कपड़ा पहनकर दोनों युवक युवती का इसाई पद्धति में आने के लिए मत्तांतरण किया जा रहा था एवं पाली क्षेत्र के कुमूर्दू ग्राम के लगभग 100 से 120 की संख्या में बुजुर्ग महिलाएं एवं बच्चे बच्चियों चर्च में उपस्थित रहे सारे घटनाक्रम की सूचना ग्रामीणों के माध्यम से पुलिस प्रशासन को दी गई जैसे ही डॉ. बी एस बैरिया ने देख पुलिस प्रशासन की गाड़ी वहां पहुंची और सायरन बजा तुरंत सारे चर्च के लाइट बंद कर दिए और पीछे की तरफ दीवार से कूद कर भागने लगे कुछ युवाओं ने उनको रोक फिर पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने कहा अगर आप गलत नहीं कर रहे हैं तो फिर भागने की आवश्यकता नहीं है यही खड़े रहिए हम जांच में आए हैं और पूरी स्थिति के बारे में हमें बताइए, डॉ.बी.एस बरिया जी ने पुलिस अधिकारियों को शादी का कार्ड ईसाई पद्धति वाला,शादी का नोटरी कागज दिखाई और बताया स्वेच्छा से यीशु मसीह का आशीर्वाद लेने आए थे और पुलिस अधिकारियों के सामने युवक और युवती को ऊंचे स्वर में चिल्लाते हुए कहा कि बताओ तुम लोगों ने मुझे यहां बुलाया है डॉक्टर साहब के चिल्लाने की आवाज सुनकर दोनों युवक युवती डर गए और कहां की हां हम लोगों ने बुलाया है पुलिस की आगे की कार्रवाई शुरू हुई और पूछताछ में काफी बातें सामने आई शादी के कार्ड में लड़की का एड्रेस निवास स्थान फतेहपुर शहडोल लिखा था और नोटरी के कागज में गुलगुली रोड उमरिया जिला आमागार लिखा था और यह भी लिखा था कि उन्होंने शिव मंदिर में एक दूसरे को माला पहनकर सामाजिक रीति-रिवाज से दिनांक 7 फरवरी 2026 से 6 महापूर्व यानी 2025 अगस्त में विवाह कर चुके हैं और पति-पत्नी के रूप में साथ में रहते हैं
* अब प्रश्न यह उठता है अगर 6- 7 माह पूर्व मंदिर में विवाह हो चुका है तो फिर चर्च में विवाह करने की क्या आवश्यकता...?
* और अगर दोनों युवक युवती अपनी स्वेच्छा से यीशु मसीह से आशीर्वाद लेने आए हैं तो फिर टेंट, खाने का प्रयोजन, बैंड बाजा, बस एवं फोर व्हीलर में पाली से आए 80_ 90 बाराती( जिसमें बुजुर्ग महिला और नाबालिक बच्चे-बच्चिया रात्रि 9:00 बजे चर्च में क्या कर रहे थे,
*जब 6-7 महीने पूर्व मंदिर में विवाह हो चुका है तो फिर डॉ. बी.एस बारिया अलग से 11 मार्च क कार्ड छपवाकर ईसाई पद्धति का कार्ड एवं चर्च में बुलाकर ईसाई पद्धति से मतदांतरण नहीं तो और क्या कर रहे थे
* विवाह में लड़की पक्ष से कोई क्यों नहीं शामिल था
* लाइट बंद कर भागने की क्या आवश्यकता पड़ गई डॉ.B.S बारिया को
*क्यों डॉ.बी.एस. बारिया द्वारा बार-बार युवाओं को अंधेरे में ले जाकर कहा जा रहा था कल केबिन में आओ जितना पैसा कहोगे उतना मिल जाएगा
*खैर यह सब तो पुलिस अधिकारियों के जांच का विषय है*
*सारे घटनाक्रम के स्पष्टदर्शी स्वयं पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी थे और आज जब सिंहपुर थाने गए आम जनमानस प्रत्यक्ष स्पष्ट दर्शियों के साथ अधिकारियों द्वारा जांच के बाद f.i.r की बात और फिर जयसिंहनगर की माननीय विधायक श्रीमती मनीष सिंह जी द्वारा प्रत्यक्ष दर्शियों को साथ लेकर शहडोल जिले के माननीय एस,पी साहब जी के पास कार्रवाई के लिए आग्रह करने पर भी f.i.r नहीं हुई और जांच के बाद f.i.r करने का आश्वासन दिया गया
*अब प्रश्न यह उठता है*
*इतने सबूतों के बाद और प्रत्यक्ष दर्शियों के स्टेटमेंट के बाद भी प्रशासन अगर यह स्वीकार नहीं करता है कि मत्तांतरण ऐसे होता है तो आखिर मत्तांतरण होता कैसे हैं..??
* क्या इसी प्रकार से डॉ. बी एस बारिया जैसे लोगों द्वारा जनजाति समाज के लोगों को अपने मूल संस्कृति से अलग करने का मत्तांतरण खेल चलता रहेगा
*क्या मध्यप्रदेश शासन_ शहडोल पुलिस प्रशासन एवं जिला प्रशासन के छाती पर लात रखकर डॉ. बी.एस बारिया जैसे लोग जनजाति समाज के लोगों का मत्तांतरण कर छुआछूत, भेदभाव, राष्ट्र विरोधी जैसी गतिविधियां का निर्माण कर देश के अंदर की शांति व्यवस्था को भंग करते रहेंगे
* छठी अनुसूचित जनजाति में आने वाला शहडोल जिला आने वाले समय भविष्य में जनजाति विहीन होकर ईसाई बाहुल्य जिला हो जाएगा
*क्या मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय डॉ. मोहन यादव जी, शहडोल जिला कलेक्टर माननीय केदार सिंह जी, शहडोल जिले के पुलिस अधीक्षक माननीय राम जी श्रीवास्तव जी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को डॉ. बी. एल बारिया जैसे मत्तांतरण करने वाले अपने रौब तले रौंद कर मत्तांतरण करते रहेंगे..???




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