रिपोर्ट @संतोष कुमार मिश्रा
गोपी कुंज में धूम धाम से मनाया गया नंदोत्सव
कोतमा --- भक्ति, वैराग्य की मधुर रस धारा श्री मद भागवत कथा के पावन पुनीत सरिता में डुबकी लगाते हुए भगवत प्रेमियों के समक्ष पूज्य पाद आचार्य प्रवर श्री राम कृपाल त्रिपाठी जी ने बतलाया की पृथ्वी पर जब अनाचार बढ जाता है तब भगवान विभिन्न रूपों में धरणी का भार उतारने के लिए अवतार लेते हैं, अब प्रभु अठारह कलाओं से युक्त भगवान कृष्ण ने मही का भार उतारने के लिए कंस के कारागार में देवकिनदंन के रूप में जब अंधकार मय कारागार में जब कोई मार्ग शेष न था, तब भगवान ने पृथ्वी पर आकर सरल सहज मार्ग बनाते हुए आशा के प्रकाश पुंज के रूप में अकारण करूणावालय , करूणा कर असंभावित को संभव बना दिया। श्री कृष्ण ने भाद पाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन रात में आठवें संतान के रूप में जन्म लिया।वसुदेव जी ने देवकीनंदन को लेकर रात में ही भगवान को सूप में लेकर गोकुल चले शेषनाग ने छत्र बना दिया और यमुना ने भगवान के चरण प्रक्षालन कर वसुदेव जी को मार्ग दे दिया। गोकुल मे यशोदा के पास देकर वहाँ से कन्या को लेकर मथुरा कारागार में आ गयें। कंस ने इसके पहले देवकी के छह पुत्रों को अपने हाथों से हत्या कर दी थी, इस बार माया रूपी कन्या को मारना चाहता था कि माया ने बताया कि तुम्हें मारने के लिए जन्म के लिये भगवान गोकुल में जन्म ले लिया है । आपने भगवत प्रेमियों को बतलाया की व्दापर युग में जब पृथ्वी पर कंसादि राजाओं का अनाचार बढ गया तब प्रभु ने अवतार लेकर उनका उद्धार किया और वहाँ पर उग्रसेन को राज्य सौप कर धर्म की स्थापना की। कंस ने देवकी नंदन को मारने के लिए अनेक जतन किये लेकिन वह सब बेकार गयें । छह दिन के कृष्ण को मारने के लिए कंस ने पूतना नामक राक्षसी को भेजकर वध कराना चाहा और पूतना अपने स्तनों में जहर लगा कर शिशु कृष्ण को अपना स्तन पान करा मारना चाहती थी, लेकिन कृष्ण ने स्तन पान कराने वाली भंयकर राक्षसी पूतना को मातृ गति प्रदान कर उसका उद्धार कर दिया। इसी तरह शंकट भंजन नामक राक्षस ने छकडे के नीचे घुसकर श्री कृष्ण को मारना चाहा तब भगवान ने पैर मारकर ही उसका उद्धार कर दिया। तृणावत नामक राक्षस जो भंयकर आंधी के रूप में भगवान को उडाकर वध करना चाहा उसे प्रभु ने आकाश में ही अपनी गति प्रदान कर दी। व्यास नंदन सुखदेव जी की आसंदी से श्री आचार्य प्रवर राम कृपाल गुरु जी ने नंदोत्सव के धूम की व्याख्यान से भगवद प्रेमियों को आनंद से सराबोर कर दिया ।


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