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बीरसिंहपुर संजय गाँधी ताप परियोजना में फ्लोटिंग सोलर का कार्य भी अधर में

 


रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी

सुनहरे सपने बनी घोषणा वीर नेताओं  के लिए विस्तारित  इकाई


 

बिरसिंहपुर पाली -- बीरसिंहपुर संजय गाँधी ताप थर्मल पावर मध्यप्रदेश की सक्षम ताप इकाईयों में से एक है जहाँ पर परियोजना विस्तार के लिए शुरू से ही मूलभूत आवश्यक्ताओं की पर्याप्त उपलब्धता के बाद राजनैतिक उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। देश के उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी जी ने संजय गाँधी ताप परियोजना की इकाई का लोकार्पण करते समय भौतिक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता जैसे बांध की क्षमता, पर्याप्त भूमि की उपलब्धता आदि को दृष्टि गोचर करते हुए संजय गाँधी ताप परियोजना में 600 मेगावाट उत्पादन इकाई की एक नई इकाई की घोषणा की थी उस समय मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनकी घोषणा का स्वागत किया था, लेकिन समय गुजरता गया तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस घोषणा के बाद कई दौरे बीरसिंहपुर के किये,लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधियों के व्दारा अपने उद्बोधन में भी इस विस्तारित घोषणा का जिक्र नहीं किया गया, समय निकलता गया, दशक पर दशक बीतते गयें, और अब तो यह उनके हाथ से भी निकल गया  जिसे सहजता से  असली जामा पहनाया जा सकता है। ध्यान देने योग्य है की इस बीरसिंहपुर - नौरोजाबाद ने यहाँ के नेताओं को सब कुछ बनाया, फिर भी शहडोल संसदीय क्षेत्र के  कद्दावर नेताओं ने  मूर्त रूप देना उचित नहीं समझा, न इस क्षेत्र से विधायक, मंत्री, और सांसद रह चुके अपराजित नेता की सुर्खियां बटोर रहे ज्ञान सिंह ने इसे उचित समझा और ना ही मानपुर क्षेत्र की विधायक, मंत्री सुश्री मीना सिंह इसे क्षेत्र का विकास मान कर पहल की। गत वर्ष मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी नौरोजाबाद पधारे थे, और उन्होंने एक बार फिर से संजय गाँधी ताप परियोजना में छह सौ मेगावाट की इकाई की घोषणा कर ताली बजबायी। इस घोषणा की भी वर्षगांठ  निकल गयी, लेकिन इस घोषणा के आगे की कार्यवाही आगे नहीं बढी। क्षेत्र की जनता घोषणा वीर नेताओं के लिए ताली बजाने और जिंदाबाद के जय घोष तक सिमट कर रह गई , जबकि संजय गाँधी ताप परियोजना का मुख्य क्षेत्र मानपुर विधान सभा क्षेत्र में आता है और विस्तारित इकाई जो पोड़ी में लगनी है वह क्षेत्र बांधवगढ़ विधानसभा में आते हैं, एक इकाई का श्रेय दो विधायकों को समान रूप से मिलने का सुनहरा अवसर है, जिले के दोनों विधायक भारतीय जनता पार्टी से ही निर्वाचित होकर दशक व्यतीत कर रहे हैं ,दोनों के बीच राजनैतिक सामंजस्य तो बना ही है , जिससे  राजनैतिक ताकत बढी है, फिर भी विकास, उद्योगों के लिये राजनैतिक शून्यता हर समझ दार गैर राजनैतिक नागरिक को परेशान कर रखी है।रोजगार तो इस क्षेत्र के लोगों के लिए मृगतृष्णा बने हुए हैं। 

 विदित होवे की वर्ष 2024 में रीवा अल्ट्रा  मेगा सोलर प्लांट की स्थापना के बाद ओंकारेश्वर  और बिरसिंहपुर के जलाशयों में  (बांधों) में फ्लोटिंग सोलर पावर लगाऐ जाने की कार्यवाही आरंभ की गयी थी जिसके लिए  विभिन्न प्रक्रियाओं और सर्वे में अनुकूल पाये जाने के  बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गयी थी। नि विविदा निकाली गई टेंडर आहूत हुए लेकिन  बिरसिंहपुर का टेंडर डेढ वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक  फाइनल नहीं हुये  , जबकि ओंकारेश्वर का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट बन कर तैयार हो बिजली उत्पादन भी करने लगा। 

 खेद जनक कहा जाये की इस क्षेत्र खासकर  बिरसिंहपुर पाली में   राजनीतिक क्षमता वान राजनेताओं की कमी , जन प्रतिनिधियों की सोच शून्यता का दंश पूरा  उमरिया का  आदिवासी क्षेत्र  बड़े धैर्य से दशकों से झेल रहा है। 

 इन दिनों मीडिया में विकास की तथाकथित गंगा  बहायी जा रही  फिर इन राज नेताओं को  संजय गाँधी ताप परियोजना की सोलर प्लांट या थर्मल पावर प्लांट के विस्तार इकाई की स्थापना के बारे में किसी भी राजनेता और जन प्रतिनिधि ने उच्च स्तरीय प्रशासनिक राजनैतिक प्रयास नहीं किये। 

 मालूम होवे की जिस तरह ओंकारेश्वर में सोलर प्लांट की स्थापना हो गयी उसी तर्ज पर खंडवा, सारनी और अमरकंटक थर्मल प्लांट की विस्तार इकाइयों का निर्माण आरभ हो गया  लेकिन बिरसिंहपुर की संजय गाँधी ताप परियोजना का मामला घोषणाओ में ही सुर्खिया बटोर रहा है।जहाँ  विस्तारित ताप परियोजना के लिए सभी मौलिक सुविधाएं विद्यमान है।उस पर सत्ता धीशो  में कोई बात नहीं की जाती है। 

 अब फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट की  खबर सामने आई है तब देखना होगा की इसे असली जामा पहनाने के लिए कौन कदम आगे बढाता है। माना जा रहा है कि इसे लेकर अब राजनैतिक श्रेय लेने के लिए सभी सत्ता धीशो के श्वर मुकर हो जायेगा ‌।



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