रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
*अमन, सलामती, भाईचारे और देश की तरक्की की दुआओं के साथ धनपुरी में इस्तक़बाल की तैयारियाँ*
शहडोल/धनपुरी : मुक़द्दस सरज़मीने हरमैन से हज-ए- बैतुल्लाह की अज़ीम और रूहानी सआदत हासिल कर हाजियों का क़ाफ़िला अपने वतन लौट रहा है। इसी क्रम में धनपुरी नगर के सम्मानित, धार्मिक एवं समाजसेवी व्यक्तित्व हाजी जनाब मोहम्मद शाबिर साहब आज जबलपुर– अंबिकापुर ट्रेन के माध्यम से अपने गृह नगर धनपुरी लौट रहे हैं। उनकी आमद की सूचना मिलते ही नगरवासियों, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और चाहने वालों में खुशी का माहौल है। हर कोई उनके इस्तक़बाल और उनकी मुबारक दुआओं में शामिल होने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहा है। हाजी मोहम्मद शाबिर साहब नगर के वरिष्ठ पत्रकार जनाब मोहम्मद शकील साहब के वालिद हैं। धनपुरी के कच्छी मोहल्ला स्थित मदीना जामा मस्जिद के सामने उनका निवास लंबे समय से दीनदारी, सादगी, तहज़ीब और इंसानियत की पहचान माना जाता है ! उनका परिवार नमाज़ की पाबंदी, नेक अख़लाक़ और सामाजिक सौहार्द के लिए नगर में विशेष सम्मान रखता है।एसईसीएल के पूर्व कर्मी रहे हाजी मोहम्मद शाबिर साहब ने सेवा निवृत्ति के बाद अपना अधिकांश समय इबादत, समाज सेवा और दीन की ख़िदमत के लिए समर्पित कर दिया। इससे पूर्व उन्हें उमरा की सआदत भी प्राप्त हो चुकी थी और इस वर्ष अल्लाह तआला के फ़ज़्ल-ओ-करम से हज जैसी महान इबादत की नेमत भी नसीब हुई। इस्लाम के पाँचवें बुनियादी स्तंभ हज के दौरान उन्होंने पूरी अकीदत और खालिस नियत के साथ सभी अरकान अदा किए। उन्होंने एहराम बाँधा, ख़ाना-ए-काबा का तवाफ़ किया, सफ़ा और मरवा के बीच सई की, अरफ़ात के मैदान में वक़ूफ़ किया, मुज़दलिफ़ा में रात गुज़ारी, मिना में रमी-जमरात कर शैतान को कंकरी मारी तथा क़ुर्बानी और तवाफ़-ए-ज़ियारत सहित हज के तमाम फ़र्ज़ और वाजिब अरकान मुकम्मल किए। इस मुक़द्दस सफ़र के दौरान हाजी मोहम्मद शाबिर साहब ने अपनी मग़फ़िरत के साथ-साथ पूरे मुल्क, क़ौम और इंसानियत की भलाई के लिए ख़ास दुआएँ कीं। उन्होंने भारत की तरक़्क़ी, अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, सामाजिक सद्भाव, खुशहाली, धार्मिक सौहार्द और प्रत्येक नागरिक की सलामती के लिए रब्बुल आलमीन से दुआ की। उन्होंने यह भी दुआ माँगी कि देश में हमेशा प्रेम, एकता, इंसानियत और पारस्परिक सम्मान का वातावरण कायम रहे।
नगरवासियों का कहना है कि हाजी मोहम्मद शाबिर साहब का जीवन सादगी, विनम्रता, परहेज़गारी और नेकनीयती का प्रतीक रहा है। उन्होंने हमेशा लोगों को मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे का पैग़ाम दिया है। उनके हज से लौटने पर धनपुरी में एक रूहानी और खुशनुमा माहौल देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि हज से लौटने वाले हाजी अपने साथ केवल ज़मज़म का पानी, खजूर और तस्बीह ही नहीं लाते, बल्कि दुआओं की वह बरकत भी लेकर आते हैं जो पूरे समाज के लिए रहमत और प्रेरणा का कारण बनती है। हाजी मोहम्मद शाबिर साहब की यह रूहानी यात्रा धनपुरी नगर के लिए गर्व, आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता का संदेश लेकर आई है। नगर में उनके इस्तक़बाल की तैयारियाँ पूरे उत्साह, सम्मान और अकीदत के साथ की जा रही हैं ! नगरवासी उन्हें "हाजी साहब" के सम्मानित संबोधन के साथ दिली मुबारकबाद देने और उनकी दुआओं से फ़ैज़याब होने के लिए बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।


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