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करंट से वन्यजीवों के शिकार की साजिश नाकाम, जैतहरी वन अमले ने दो शिकारियों को दबोचा

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
अनूपपुर। वन्यजीव संरक्षण के लिए जैतहरी वन विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े शिकार की घटना को होने से पहले ही रोक दिया। मुखबिर से मिली सूचना पर वन अमले ने रात में घेराबंदी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो आरक्षित वन क्षेत्र में करंट प्रवाहित तार बिछाकर वन्य प्राणियों का शिकार करने की तैयारी में थे।

वन विभाग के अनुसार, 13 अगस्त 2026 की रात परिक्षेत्र जैतहरी के आरक्षित वन कक्ष पीएफ-307 में शिकारियों द्वारा करंट तार बिछाए जाने की सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए परिक्षेत्राधिकारी विवेक मिश्रा के नेतृत्व में वन अमले ने तत्काल रात्रि गश्त शुरू की और संदिग्ध क्षेत्र की घेराबंदी की। कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को मौके से पकड़ लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बोधू राठौर निवासी ग्राम बलबहरा और दुर्गेश वंशकार निवासी ग्राम मानिकपुर के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से 32 बांस की खूंटियां और करीब 3 किलोग्राम जीआई तार बरामद किया गया। पूछताछ में दोनों आरोपियों द्वारा करंट प्रवाहित तार के जरिए वन्यजीवों का शिकार करने की तैयारी किए जाने की बात सामने आई।

वन अमले ने मौके पर पंचनामा तैयार कर बरामद सामग्री जब्त की। मामले में वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 2(16)(ए)(बी), 9, 50, 51 एवं 52 के तहत प्रकरण क्रमांक 4795/6, दिनांक 13 अगस्त 2026 दर्ज किया गया। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

रात में गश्त और मुखबिर तंत्र से मिली सफलता

इस कार्रवाई में परिक्षेत्राधिकारी विवेक मिश्रा के साथ उप वन क्षेत्रपाल आर.आर. राव, राजू केवट, वनपाल संतोष श्रीवास्तव, वनरक्षक उमेश सरटिया, भीखम प्रसाद कोल, वनपाल मनीष और वनरक्षक बृजेश गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शहडोल वृत्त में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर रात्रि गश्त और मुखबिर तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है। विशेष रूप से करंट तार बिछाकर किए जाने वाले शिकार को रोकने के लिए संवेदनशील वन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है।

शिकार से पहले कार्रवाई बनी बड़ी उपलब्धि

करंट प्रवाहित तार से वन्यजीवों का शिकार न केवल गंभीर वन अपराध है, बल्कि इससे एक साथ कई वन्य प्राणियों की जान जाने का खतरा रहता है। जैतहरी वन अमले की समय रहते की गई कार्रवाई की खास बात यह रही कि शिकार की घटना घटित होने से पहले ही आरोपियों को पकड़ लिया गया और संभावित वन्यजीव अपराध को टाल दिया गया।

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जंगलों में वन्यजीवों के अवैध शिकार और अन्य वन अपराधों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। स्थानीय स्तर पर भी विभाग की इस कार्रवाई को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि वन अमले की सक्रिय निगरानी से जैतहरी क्षेत्र के जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा को मजबूती मिली है।


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