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जिला अस्पताल में एक सप्ताह से डायलिसिस मशीन बंद, मरीजों की बढ़ी परेशानी

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
अनूपपुर। जिला चिकित्सालय अनूपपुर में डायलिसिस मशीन पिछले करीब एक सप्ताह से खराब होने के कारण किडनी रोगियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नियमित डायलिसिस पर निर्भर मरीजों को उपचार के लिए निजी अस्पतालों अथवा दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ मानसिक परेशानी भी गहरा गई है।

छह-सात दिन बाद भी मशीन चालू नहीं, व्यवस्था पर उठे सवाल

मरीजों के परिजनों के अनुसार डायलिसिस मशीन खराब हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इसे दुरुस्त कराकर सेवा बहाल नहीं की जा सकी है। किडनी रोगियों के लिए डायलिसिस नियमित और बेहद महत्वपूर्ण उपचार है। ऐसे में जिला अस्पताल में यह सुविधा लगातार बाधित रहना अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

परिजनों का कहना है कि यदि एक महत्वपूर्ण जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा की मशीन को छह-सात दिन में भी ठीक नहीं कराया जा रहा है, तो गंभीर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भरोसा कैसे किया जाए। मरीजों का यह भी आरोप है कि मशीन खराब होने के बाद तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, जिसके चलते उन्हें इलाज के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।

अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी

डायलिसिस सेवा बाधित होने को लेकर जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. परस्ते की कार्यप्रणाली पर भी मरीजों के परिजनों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मामला सीधे मरीजों की जिंदगी से जुड़ा है, इसलिए मशीन की मरम्मत के साथ-साथ वैकल्पिक डायलिसिस की व्यवस्था भी तत्काल की जानी चाहिए थी।

कलेक्टर ने कहा—“मैं इसको दिखवाता हूं”

मामले को लेकर जब अनूपपुर कलेक्टर रत्नाकर झा से जानकारी ली गई तो उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैं इसको दिखवाता हूं।”

कलेक्टर के संज्ञान में मामला आने के बाद अब मरीजों और उनके परिजनों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन जल्द हस्तक्षेप करेगा और डायलिसिस सेवा को शीघ्र बहाल कराया जाएगा।

जीवनरक्षक सेवा, तत्काल बहाली की मांग

मरीजों के परिजनों का कहना है कि डायलिसिस सामान्य उपचार नहीं, बल्कि गंभीर किडनी रोगियों के लिए आवश्यक जीवनरक्षक चिकित्सा प्रक्रिया है। मशीन लंबे समय तक बंद रहने से मरीजों को समय पर उपचार के लिए निजी अस्पतालों और दूसरे शहरों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

परिजनों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि डायलिसिस मशीन को अविलंब दुरुस्त कराकर सेवा शुरू की जाए। जब तक मशीन पूरी तरह ठीक नहीं होती, तब तक मरीजों के लिए वैकल्पिक डायलिसिस की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी मरीज की उपचार प्रक्रिया प्रभावित न हो।

अब देखना होगा कि कलेक्टर के संज्ञान में आने के बाद जिला अस्पताल की डायलिसिस व्यवस्था कितनी जल्दी पटरी पर लौटती है और मरीजों को राहत कब मिलती है।








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