रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
अनूपपुर। महिला की चोरी-छिपे आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाकर उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देने तथा शारीरिक संबंध बनाने के लिए कथित तौर पर ब्लैकमेल करने के गंभीर मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती माया विश्वलाल की अदालत ने तीनों आरोपियों की नियमित जमानत याचिका निरस्त करते हुए उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए हैं।
फॉरेंसिक जांच में मोबाइल से बरामद हुए फोटो-वीडियो
लोक अभियोजक श्री पुष्पेन्द्र कुमार मिश्रा के अनुसार, पीड़िता ने 26 दिसंबर 2025 को थाना कोतमा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि निखिल पनिका पिता रवि पनिका (20), निवासी वार्ड क्रमांक 6, पुरानी बस्ती कोतमा, आनंद कुमार साहू पिता संतोष कुमार साहू (20), निवासी बरही, थाना नौरोजाबाद, जिला उमरिया तथा आयुष मिश्रा उर्फ देवेन्द्र पिता वीरेन्द्र मिश्रा (22), निवासी कोतमा ने चोरी-छिपे उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बना लिए थे।
पीड़िता का आरोप था कि आरोपी व्हाट्सऐप के जरिए उक्त फोटो-वीडियो उसे भेजकर लगातार मिलने का दबाव बनाते थे। साथ ही शारीरिक संबंध बनाने के लिए कथित रूप से ब्लैकमेल किया जाता था। मांग पूरी नहीं करने पर फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का भी आरोप लगाया गया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, मोबाइल भेजे फॉरेंसिक जांच के लिए
शिकायत के आधार पर थाना कोतमा में अपराध क्रमांक 33/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67सी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई।
प्रकरण की विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे। अभियोजन के मुताबिक, फॉरेंसिक जांच में मोबाइल से पीड़िता से संबंधित आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो रिकवर किए गए। इसके बाद पुलिस ने विवेचना पूरी कर 10 अगस्त 2026 को न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।
अभियोजन ने जमानत का किया पुरजोर विरोध
अभियोग पत्र पेश होने के बाद तीनों आरोपियों की ओर से नियमित जमानत के लिए न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किए गए। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से लोक अभियोजक श्री पुष्पेन्द्र कुमार मिश्रा ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने न्यायालय के समक्ष मामले की गंभीरता, फॉरेंसिक जांच से सामने आए साक्ष्य तथा आरोपियों के विरुद्ध लंबित अन्य प्रकरणों का उल्लेख किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों व प्रकरण की परिस्थितियों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने तीनों आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत के आदेश के बाद आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
न्यायालय के फैसले से मामले में अभियोजन की स्थिति मजबूत
फॉरेंसिक जांच में डिजिटल साक्ष्य सामने आने और अभियोग पत्र दाखिल होने के बाद हुई जमानत सुनवाई में न्यायालय द्वारा राहत नहीं दिए जाने को प्रकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया अब जेल में निरुद्ध आरोपियों के विरुद्ध जारी रहेगी।


0 Comments