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बरगवां (अमलाई) में विकास पर लगा ब्रेक!

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
CMO की कथित गैरहाजिरी और कार्यप्रणाली पर पार्षद ने उठाए सवाल, कलेक्टर से जांच व कार्रवाई की मांग

अनूपपुर। नगर परिषद बरगवां (अमलाई) में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वार्ड क्रमांक 2 के पार्षद एवं सभापति सौरभ कोरी ने नगर परिषद की मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की कथित अनियमित उपस्थिति और कार्यप्रणाली को लेकर अनूपपुर कलेक्टर से शिकायत की है। पार्षद ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पार्षद द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि शासन द्वारा निर्धारित कार्यालयीन समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक होने के बावजूद CMO नियमित रूप से कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहती हैं। शिकायत के अनुसार, कई दिनों में वह दोपहर 12 बजे, 1 बजे, 3 बजे अथवा शाम 4 बजे कार्यालय पहुंचकर महज एक-दो घंटे रुकती हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

बायोमेट्रिक हाजिरी और CCTV से हो सकती है स्थिति स्पष्ट

पार्षद सौरभ कोरी ने शिकायत में CMO की वास्तविक उपस्थिति की जांच के लिए पिछले तीन माह की बायोमेट्रिक उपस्थिति, कार्यालय के CCTV फुटेज तथा फील्ड विजिट से संबंधित लॉगबुक की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि टीएल बैठक और फील्ड विजिट के नाम पर कार्यालय से अनुपस्थिति बनी रहती है।

टेंडर से लेकर निर्माण कार्यों तक उठे सवाल

शिकायत में नगर के विकास कार्यों की धीमी गति और प्रक्रियागत अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है। पार्षद के अनुसार, जिम्मेदार अधिकारी की नियमित उपलब्धता नहीं होने से टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और कई विकास कार्य समय पर आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

इसके अलावा शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ ठेकेदारों द्वारा FDR जमा किए बिना ही कार्य प्रारंभ करा दिए गए। कई निर्माण कार्यों की निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद वे अब तक अधूरे पड़े हैं और संबंधितों को नोटिस जारी किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

प्रमाण पत्र और पेंशन के लिए भटक रहे नागरिक

नगर परिषद की कथित प्रशासनिक अव्यवस्था का असर आम लोगों पर भी पड़ने का आरोप है। पार्षद का कहना है कि प्रमाण पत्र, पेंशन एवं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों के लिए नागरिकों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

“तीन माह का रिकॉर्ड खंगाला जाए”

पार्षद सौरभ कोरी ने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पिछले तीन माह के बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, फील्ड विजिट रजिस्टर/लॉगबुक और संबंधित विकास कार्यों की फाइलों की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी और यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

पार्षद ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते नगर परिषद की प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जनहित में उच्च स्तर पर आंदोलन एवं आवश्यक कानूनी कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।

अब निगाहें कलेक्टर की जांच पर टिकी हैं—क्या बायोमेट्रिक हाजिरी, CCTV और फील्ड रिकॉर्ड से नगर परिषद की कार्यप्रणाली की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी?


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