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स्थगन आदेश को ठेंगा! लामाटोला में धड़ल्ले से जारी मंगल भवन का निर्माण

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
तहसीलदार के रोक आदेश के बाद भी नहीं थमा काम, पंचायत के जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल; पुलिस की चुप्पी भी चर्चा में

कोतमा/अनूपपुर। तहसील कोतमा अंतर्गत ग्राम पंचायत लामाटोला में राजस्व न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद मंगल भवन का निर्माण कार्य जारी रहने का मामला सामने आया है। आरोप है कि तहसीलदार द्वारा निर्माण पर तत्काल रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश के बावजूद पंचायत स्तर पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इससे न केवल राजस्व न्यायालय के आदेश की अवहेलना के आरोप लग रहे हैं, बल्कि ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

05 अगस्त को जारी हुआ था स्थगन आदेश

प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यालय तहसीलदार, तहसील कोतमा, जिला अनूपपुर द्वारा प्रकरण क्रमांक 340/प्रवा./2026, दिनांक 05 अगस्त 2026 को स्थगन आदेश जारी किया गया था। आवेदक सुदर्शन प्रसाद मिश्रा पिता स्व. रामावतार मिश्रा, निवासी वार्ड क्रमांक 09, कोतमा की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई।

शिकायत में ग्राम लामाटोला, प.ह.नं. लामाटोला, रा.नि.मं. कोतमा स्थित खसरा नंबर 553/1 रकबा 0.020 हेक्टेयर, 553/3 रकबा 0.303 हेक्टेयर एवं 595/1/1 रकबा 1.854 हेक्टेयर, कुल तीन किता भूमि पर अनाधिकृत निर्माण एवं कब्जे का आरोप लगाया गया था। शिकायत में अनावेदक के रूप में मध्यप्रदेश शासन, जरिए ग्राम पंचायत लामाटोला का उल्लेख किया गया है।

राजस्व न्यायालय ने तत्काल रोक के दिए थे निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान तहसीलदार कोतमा ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 250 के तहत अनाधिकृत निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए थे। साथ ही संबंधित पक्ष को नियत पेशी 17 अगस्त 2026 को न्यायालय में उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए थे।

स्थगन आदेश की प्रतिलिपि थाना प्रभारी कोतमा/भालूमाड़ा, राजस्व निरीक्षक तथा हल्का पटवारी लामाटोला को भी भेजी गई थी, ताकि आदेश का पालन सुनिश्चित कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जा सके।

आदेश कागजों में, निर्माण जमीन पर!

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब राजस्व न्यायालय ने निर्माण कार्य पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए, तो इसके बावजूद मौके पर निर्माण कैसे जारी है? स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि आदेश जारी होने के बाद भी मंगल भवन का निर्माण कार्य नहीं रोका गया और मौके पर गतिविधियां जारी रहीं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि न्यायालय के आदेश के बावजूद निर्माण कार्य चलता रहा, तो इससे आम लोगों में प्रशासनिक आदेशों की प्रभावशीलता को लेकर गलत संदेश जाता है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यह पता लगाने की मांग की है कि स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण कार्य किसके निर्देश पर जारी रखा गया।

पंचायत के जिम्मेदारों पर उठ रहे सवाल

निर्माण कार्य जारी रहने को लेकर ग्राम पंचायत के सचिव, सरपंच एवं संबंधित ठेकेदार की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करे और यदि स्थगन आदेश की अवहेलना प्रमाणित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में

मामले को लेकर जब थाना प्रभारी कोतमा एवं बीट प्रभारी लामाटोला से दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो फोन पर संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि राजस्व न्यायालय के आदेश के पालन को सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित स्तर पर क्या कार्रवाई की गई?

ग्रामीणों ने की तत्काल कार्रवाई की मांग

स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की मौके पर जांच कराई जाए, स्थगन आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराया जाए और यदि आदेश की अवहेलना पाई जाती है तो संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों, निर्माण एजेंसी/ठेकेदार तथा अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए।

अब देखना यह है कि राजस्व न्यायालय के आदेश के बावजूद निर्माण जारी रहने के इस मामले में प्रशासन मौके पर कार्रवाई करता है या स्थगन आदेश महज कागजी आदेश बनकर रह जाता है।


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