रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
रक्तमित्र राज केशरवानी ने उठाया जनसुरक्षा का मुद्दा, कहा—“हादसा होने से पहले प्रशासन जागे”
अमलाई। नगर परिषद बरगवां-अमलाई क्षेत्र में एक जर्जर एवं अंदर से लगातार खोखले होते जा रहे सार्वजनिक कुएं को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। रक्तमित्र राज केशरवानी ने नगर परिषद और जिम्मेदार अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए इसे जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
राज केशरवानी के अनुसार, उनके घर के पीछे स्थित सार्वजनिक कुआं लंबे समय से जर्जर अवस्था में है और अंदर से लगातार कमजोर होता जा रहा है। कुएं की मौजूदा स्थिति को देखते हुए उनके मकान की पिछली दीवार तथा पीछे का पूरा हिस्सा धंसने की आशंका बनी हुई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा एवं मरम्मत का कार्य नहीं कराया गया तो किसी भी समय गंभीर हादसा हो सकता है।
उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर ग्राम पंचायत के समय से ही लगातार सूचना एवं आवेदन दिए जाते रहे हैं। नगर परिषद का गठन होने के बाद भी संबंधित अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया तथा मौके पर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है।
पार्षद की भूमिका पर भी सवाल
राज केशरवानी ने अपने वार्ड के पार्षद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संबंधित जनप्रतिनिधि को भी इस गंभीर समस्या की जानकारी है, इसके बावजूद अब तक प्रभावी पहल दिखाई नहीं दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि “क्या जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?”
हादसा हुआ तो जवाबदेही किसकी?
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल उनके निजी मकान तक सीमित नहीं है, बल्कि जनसुरक्षा और जनहित से जुड़ा हुआ है। यदि जर्जर कुएं के कारण मकान की दीवार अथवा पीछे का हिस्सा धंसता है और इससे जन-धन की हानि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग एवं जिम्मेदार अधिकारियों की होगी।
तत्काल तकनीकी जांच और सुरक्षा कार्य की मांग
राज केशरवानी ने नगर परिषद बरगवां-अमलाई से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके का निरीक्षण कराया जाए, कुएं की तकनीकी जांच कराई जाए तथा आवश्यकतानुसार मरम्मत, मजबूतीकरण एवं सुरक्षा संबंधी कार्य बिना किसी देरी के कराया जाए।
उन्होंने कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्रवाई की आवश्यकता है। हादसा होने के बाद प्रशासन के जागने से बेहतर है कि संभावित खतरे को देखते हुए अभी से आवश्यक कदम उठाए जाएं।
“लापरवाही की कीमत किसी की जान या घर के नुकसान से नहीं चुकाई जानी चाहिए। प्रशासन को संभावित हादसे से पहले ही इस गंभीर समस्या का समाधान करना चाहिए।”


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