रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
ऊरा पंचायत में पंचायती राज व्यवस्था पर गंभीर आरोप, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
अनूपपुर/कोतमा। बदरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत ऊरा में पंचायत व्यवस्था के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन कई बार बंद मिलता है, जिससे अपनी रोजमर्रा की शासकीय समस्याओं और पंचायत संबंधी कार्यों के लिए पहुंचने वाले लोगों को निराश होकर लौटना पड़ता है। वहीं, महिला पंचायत सचिव के शासकीय कार्यों में उनके पति के कथित हस्तक्षेप और पंचायत के विकास कार्यों में उनकी भूमिका को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि, शिकायतों ने पंचायत स्तर पर निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही की व्यवस्था पर जरूर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पंचायत भवन बंद रहने की शिकायत, ग्रामीण परेशान
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत भवन में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन, प्रधानमंत्री आवास, रोजगार, विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी, निर्माण कार्यों से संबंधित शिकायतें और अन्य पंचायत सेवाओं के लिए लोगों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन पंचायत भवन बंद मिलने की स्थिति में ग्रामीणों को आवश्यक कार्यों के लिए भटकना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन केवल एक सरकारी इमारत नहीं, बल्कि गांव की जनता के लिए शासन से सीधे जुड़ने का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में यदि कार्यालय नियमित रूप से नहीं खुलता है तो इसका सीधा असर आम ग्रामीणों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ता है।
महिला सचिव के स्थान पर पति की कथित सक्रियता ने बढ़ाई चिंता
ऊरा पंचायत में सबसे गंभीर आरोप महिला सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत सचिव के शासकीय कार्यों में उनके पति कथित रूप से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत से संबंधित शासकीय मोबाइल अथवा सीयूजी नंबर के उपयोग को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है और कथित तौर पर यह नंबर सचिव के पति के पास रहने की बात सामने आई है।
यदि जांच में किसी गैर-अधिकृत व्यक्ति द्वारा पंचायत के आधिकारिक कार्यों का संचालन किए जाने की पुष्टि होती है, तो यह प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर विषय हो सकता है। इसलिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि पंचायत के दस्तावेजों, शासकीय पत्राचार, योजनाओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों का वास्तविक संचालन कौन कर रहा है।
विकास कार्यों में सचिव पति की कथित भूमिका पर भी सवाल
ग्रामीणों ने पंचायत क्षेत्र में कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। आरोप है कि कुछ निर्माण कार्यों में निर्धारित गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। साथ ही, सचिव के पति पर पंचायत के विकास कार्यों में ठेकेदारी अथवा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होने के आरोप भी लगाए गए हैं।
इन आरोपों की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। यदि किसी स्तर पर सरकारी प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति या उसके परिजन का संबंधित कार्यों में आर्थिक हित पाया जाता है, तो यह हितों के टकराव का विषय बन सकता है। इसलिए पंचायत के निर्माण कार्यों से जुड़े ठेके, स्वीकृतियां, भुगतान और संबंधित अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, तकनीकी जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में हुए निर्माण कार्यों की मौके पर जांच कराई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद कुछ कार्यों की गुणवत्ता अपेक्षित स्तर की नहीं है।
अब सवाल यह है कि क्या संबंधित अधिकारियों ने निर्माण कार्यों का नियमित भौतिक निरीक्षण किया? क्या तकनीकी अधिकारियों ने गुणवत्ता की जांच की? क्या माप पुस्तिका के अनुसार कार्य का सत्यापन हुआ? और क्या भुगतान से पहले निर्माण की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया गया?
ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत में हाल के वर्षों में कराए गए निर्माण कार्यों का तकनीकी परीक्षण, भौतिक सत्यापन और संबंधित वित्तीय अभिलेखों का मिलान कराया जाए, ताकि सरकारी धन के उपयोग की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
ऊरा पंचायत से जुड़े आरोपों ने जनपद और जिला स्तर की निगरानी व्यवस्था को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। यदि पंचायत भवन लंबे समय तक बंद रहता है, सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें हैं और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा इसकी नियमित मॉनिटरिंग कितनी प्रभावी है—यह जांच का विषय है।
ग्रामीण जानना चाहते हैं कि पंचायत का निरीक्षण कितनी बार किया गया, सचिव की उपस्थिति का सत्यापन कैसे होता है और विकास कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाती है।
जांच हुई तो सामने आ सकती है वास्तविक तस्वीर
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत ऊरा की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनकी मांग है कि पंचायत भवन के संचालन, सचिव की उपस्थिति, शासकीय सीयूजी नंबर के उपयोग, पंचायत अभिलेखों, निर्माण कार्यों, भुगतान प्रक्रिया और पंचायत निधि के उपयोग की विस्तृत जांच कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे। संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन करें और उपलब्ध अभिलेखों का वास्तविक कार्यों से मिलान करें। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन अथवा वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब जवाबदेही की बारी
ग्राम पंचायत ऊरा का मामला महज पंचायत भवन पर लगे ताले तक सीमित नहीं है। इसके साथ ग्रामीणों को मिलने वाली शासकीय सेवाओं, पंचायत प्रशासन की पारदर्शिता, शासकीय पद की जिम्मेदारी और विकास कार्यों में खर्च होने वाली सार्वजनिक राशि की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण सवाल जुड़े हैं।
अब निगाहें संबंधित जनपद एवं जिला प्रशासन पर हैं कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है और क्या मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाती है। यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो पंचायत भवन से लेकर निर्माण कार्यों और प्रशासनिक संचालन तक उठ रहे तमाम सवालों का सच सामने आ सकता है।


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