रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी
जला सॉकेट, कबाड़ पंखा और एक ट्यूबलाइट, बच्चों की जान से खिलवाड़
बिरसिंहपुर पाली --- जिले की ग्राम पंचायत घुनघुटी, स्थानीय शासन निर्देशिका कोड 153877 में भ्रष्टाचार ने शर्म की सारी सीमाएं तोड़ दी हैं। मेरी पंचायत एप पर दर्ज सरकारी रिकॉर्ड खुद चीख-चीख कर बता रहा है कि कैसे सचिव विजय सिंह और सरपंच सिरतिया बाई ने एक आंगनबाड़ी की चार बाहरी फोटो के सहारे पंद्रहवें वित्त आयोग की 4.86 लाख रुपये की राशि को छह बार में निकालकर हड़प लिया और मौके पर लगा दिया जला हुआ बोर्ड और कबाड़ पंखा।
यह पूरा खेल बहुत ही शातिर तरीके से रचा गया। सबसे पहले 18 और 19 जनवरी 2026 को मेरी पंचायत एप के भौतिक प्रगति अनुभाग में आंगनबाड़ी केंद्र घुनघुटी क्रमांक 1 की एक ही पीली बिल्डिंग की चार फोटो अपलोड की जाती हैं। पहली 18 जनवरी शाम 5:59 बजे, दूसरी उसी दिन शाम 7 बजे, तीसरी 19 जनवरी सुबह 8:49 बजे और चौथी 19 जनवरी शाम 6:52 बजे। सभी पर अक्षांश-देशांतर 23.3493, 81.1876 दर्ज है। चारों फोटो में वही मिकी माउस की पेंटिंग वाली बाहरी दीवार दिखती है, अंदर की बिजली फिटिंग का एक भी फोटो नहीं लिया गया, न बोर्ड का, न पंखे का, न वायरिंग का, न ट्यूबलाइट का, जो यह साबित करता है कि फोटो सिर्फ खानापूर्ति के लिए डाली गई थीं।
और फिर इस खानापूर्ति के ठीक दो दिन बाद 21 जनवरी 2026 को एक ही दिन में एक ही कार्य बिजली फिटिंग कार्य के नाम पर छह अलग-अलग भुगतान आदेश तैयार कर दिए जाते हैं। जिनके क्रमांक हैं पंद्रहवां वित्त आयोग/2025-26/भु.आ./8, 9, 10, 11, 12 और 13। हर भुगतान आदेश में एक ही राशि 81 हजार रुपये, एक ही उद्देश्य बिजली फिटिंग कार्य, एक ही विक्रेता रामकरण लोधी, खाता ****2363, और हर भुगतान आदेश पर सचिव विजय सिंह और सरपंच सिरतिया बाई के डिजिटल हस्ताक्षर से सफल भुगतान का ठप्पा। कुल मिलाकर एक आंगनबाड़ी में बिजली फिटिंग के नाम पर 4 लाख 86 हजार रुपये की निकासी, जो किसी भी आंगनबाड़ी की पूरी बिल्डिंग बनाने की लागत के बराबर है।
जब इस कागजी फिटिंग की जमीनी हकीकत देखने के लिए तीन तस्वीरें सामने आईं तो रोंगटे खड़े हो गए। पहली तस्वीर में दीवार पर लगा छह स्विच वाला बोर्ड दिखता है जिसका एक सॉकेट बुरी तरह जला हुआ, काला पड़ा हुआ, प्लास्टिक पिघला हुआ, जो कभी भी शॉर्ट सर्किट और आग का कारण बन सकता है। दूसरी तस्वीर में छत पर टंगा वही पुराना पंखा दिखता है जो जंग लगा हुआ, धूल से भरा हुआ, ब्लेड टेढ़े हुए और उसकी तार खुली लटकी हुई, ऐसा पंखा जो कबाड़ी की दुकान पर भी न मिले। तीसरी तस्वीर में पूरी आंगनबाड़ी की हकीकत, छत पर वही पुराना पंखा, दीवार पर एक ट्यूबलाइट, एक बोर्ड और सफेद केसिंग पाइप, बस यही है 4.86 लाख की बिजली फिटिंग। बाजार में इस पूरे सामान की कीमत नया लेने पर भी 3 से 4 हजार रुपये से ज्यादा नहीं। फिर सवाल उठता है कि 4 लाख 82 हजार रुपये कहां गए, किसकी जेब में गए।
घुनघुटी का यह कारनामा सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं, यह पंद्रहवें वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन, शासकीय दस्तावेजों में कूटरचना, डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग और सबसे बड़ी बात छोटे-छोटे बच्चों की जान से खिलवाड़ है। आंगनबाड़ी में 3 से 6 साल के मासूम बच्चे पढ़ते हैं, जला हुआ सॉकेट और खुली तार कभी भी बड़ा हादसा करा सकते हैं।
इस पूरे मामले में कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। बिना कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र और बिना अंदरूनी फोटो के छह बार भुगतान कैसे हो गया, एक ही कार्य के लिए छह भुगतान आदेश कैसे स्वीकृत हुए, ग्राम सभा और सामाजिक अंकेक्षण कहां गया, और इतनी बड़ी राशि के बाद भी घटिया और जला हुआ सामान क्यों लगाया गया। यह सब सचिव, सरपंच, विक्रेता और उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं।
ध्यान देने योग्य है कि जिला पंचायत उमरिया द्वारा इस सचिव को, जो पूर्व में निलंबित था, बिना नोटिस के जवाब के आनन-फानन में बहाल कर घुनघुटी की तिजोरी की चाबी सौंपी गई थी, तभी से जिला पंचायत पर भ्रष्टाचार के तीखे आरोप लग रहे थे, जो वर्तमान में सचिव द्वारा भ्रष्टाचार का नंगा नाच करते हुए उन आरोपों की पुष्टि कर रहे हैं। साफ है कि ग्राम पंचायत के भ्रष्टाचारियों के तार सीधे जिला पंचायत से जुड़े हुए हैं।
अब पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने कलेक्टर उमरिया और लोकायुक्त से मांग की है कि इस जले हुए बोर्ड और पुराने पंखे को तुरंत जब्त कर भौतिक सत्यापन कराया जाए, मेरी पंचायत एप पर अपलोड की गई चारों फोटो और छह भुगतान आदेशों की फोरेंसिक और तकनीकी जांच कराई जाए, 4.86 लाख रुपये की वसूली कर संबंधितों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, शासकीय राशि के गबन और बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी पंचायत प्रतिनिधि पंद्रहवें वित्त के पैसे को इस तरह लूटने की हिम्मत न कर सके।



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