मोहम्मद शकील
शहडोल जिले के धनपुरी में विभिन्न नदी नालों में खनिज विभाग द्वारा आवंटित रेत खदानों के अलावा वन क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्खनन एवं परिवहन एक लंबे अरसे से जारी है। प्रतिबंधित क्षेत्र होने के कारण जंगल स्थित विभिन्न नालों वह नदियों से निकलने वाली रेत के एवज में वन माफियाओं के साथ ही विभागीय मैदानी अमले की भी अच्छी खासी कमाई हो रही है। जंगल से निकलने वाली रेत यानी बालू की कमाई ने वन कर्मियों को इतना दयालु बना दिया है कि वह अपने निर्धारित क्षेत्र में नजर घुमाने से भी परहेज करते हैं, परिणाम स्वरूप वन संपदा विशेषकर लकड़ी का अवैध कारोबार करने वाले वन माफियाओं को अभयदान मिल गया है। विभागीय अमले की दयालुता का ही नतीजा है कि बेम्हौरी- धनपुरी बीट अंतर्गत बंगवार के जंगल में पेड़ों की बजाए ठूंठ ज्यादा नजर आ रहे हैं।
कभी होती थी सघन जंगल
कोयला नगरी धनपुरी एवं वेम्हौरी,बंगवार लगे गावो के रहवासियों की बातों पर यकीन किया जाए तो हाल के कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर जंगल के हरे वृक्षों का विनाश हुआ है। जहां कभी हरे भरे पेड़ पौधे और हरियाली देखी जाती थी वहां अब पेड़ों के ठूंठ और वीरांगी का नजारा आम है। वन विभाग द्वारा किसी को भी जंगल के हरे पेड़ों को काटने की अनुमति दिए जाने का सवाल ही नहीं उठता है ऐसे हालात में इस जंगल के पेड़ों को जमीन निकल रही है आसमान इसका अनुमान लगाना शायद किसी के लिए भी कठिन नहीं है। बड़ी तेजी के साथ हो रहे हरे वृक्षों के विनाश से चिंतित ग्रामीणों द्वारा इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारी कर्मचारियों का ध्यान आकृष्ट कराया जाता रहा है लेकिन निहित स्वार्थ अथवा माफियाओं द्वारा निर्मित आर्थिक राजनीतिक दबावों के चलते वन क्षेत्र की सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता ही महसूस नहीं की गई है।
विभागीय अमला लगा रहे है पतीला
जल जंगल और जमीन की सुरक्षा के साथ ही इनसे जन सामान्य को अधिकाधिक लाभ पहुंचाने की दिशा में केंद्र व राज्य शासन द्वारा नित नई योजनाएं लागू कर करोड़ों रुपए की राशि व्यय की जा रही है लेकिन मैदानी अमले के निकम्मे पन के चलते शासकीय योजनाओं को सरेआम पलीता लग रहा है। हाल के कुछ वर्षों में जिस तेजी के साथ जंगल के पेड़ों की अवैध कटाई हुई है उसने विभागीय मैदानी अमले के साथ ही अधिकारियों की कर्मठता और अधीनस्थ हमले पर नियंत्रण पर सवालिया निशान लगा कर रख दिया है।
जंगल का मिट जाएगा नामो निशान
यदि समय रहते धनपुरी, बम्होरी वीट सहित समूचे कोयलांचल क्षेत्र के जंगली एरिया की सुरक्षा पर वन विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया गया और मैदानी अमले को कर्तव्य परायणता का पाठ नहीं पढ़ाया गया तो निकट भविष्य में सोहागपुर कोयला जल से जंगलों का नामोनिशान मिट कर रह जाएगा। स्थानीय ग्रामीण नागरिक को क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने वन क्षेत्र के लगातार संरक्षरण पर चिंता जताते हुए तत्काल समुचित कार्यवाही किए जाने की मांग की है।

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