मिर्जा अफसार बेग
प्राथमिकी में दर्ज नहीं किए गए थे साथियो के नाम, सत्ता के नशे में भरत से की थी मारपीट
मारपीट के मामले को लेकर बिजुरी नगर पालिका अध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह की मुसीबतें बढ़ती जा रही है। अपनी सत्ता शासन होने के बावजूद भी बिजुरी थाना में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस अधीक्षक को शिकायत पत्र लिखकर नपा अध्यक्ष सहित मारपीट में सम्मिलित होने वाले हमराहियों( साथियों) के ऊपर भी मामला पंजीबद्ध करने की मांग के साथ गिरफ्तारी की भी मांग की है।
अनूपपुर:-विगत सप्ताह बिजुरी नगर पालिका अध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह के ऊपर बिजुरी थाना अंतर्गत मारपीट के मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उसके बाद अब शिकायतकर्ता अपनी शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक अनूपपुर के पास जा पहुंचा जहां शिकायत पत्र में मारपीट के समय उपस्थित नपा अध्यक्ष के साथियो के ऊपर भी प्राथमिकी दर्ज कर कार्यवाही करने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सप्ताह भर पूर्व एफआईआर दर्ज हो गई थी उसके बाद भी अब तक किसी प्रकार की कार्यवाही बिजुरी थाना के द्वारा नहीं की गई है, वही विवेचना के नाम से टालमटोल कर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं पुलिस के द्वारा मामले को लेकर की जा रही कार्यवाही पर भी सवालिया निशान खड़ा हो रहा है। लोगों का कहना है कि सत्ता शासन के बल पर नपा अध्यक्ष मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।
यह था मामला
आवेदक भरत सिंह गोंड ग्राम मैरटोला के चौरा मंदिर में दिनांक 18 मार्च को लगभग 3 बजे दोपहर कई दोस्तों के साथ फगुआ/ होलीगीत दो नगाड़े के साथ गीत गा रहे थे उसी समय राजेश सिंह निवासी भालगुडार वार्ड नंबर 7 जिला अनूपपुर मोटरसाइकिल से आया और नशे की हालत में दोस्तों के पास आकर गाली गलौज करते जान से मारने की धमकी देता हुआ चला गया जिसके बाद पुरुषोत्तम सिंह सहित उनके हमराही राजा सिंह, राजेश सिंह, संजू सिंह संजीव पांडे, शिम्पू पांडे यह सभी लोग चौरा मडिया के पास आ गए और हम आवेदक गढ़ वहां पर भजन गा रहे दीपक बैगा, लाला बैगा, बड़का बैगा व अन्य सभी लोगों के साथ मारपीट किए और वहां से चले गए। जिसके बाद भारत सिंह अपने पिता नंदू सिंह गोड़ के साथ अपने घर आने लगा तब आधे रास्ते में राजा सिंह,राजेश उर्फ़ गोलू और बिजुरी नगर पालिका अध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह अपने 4-5 साथियों के साथ संजीव पांडे,संजू सिंह,विनोद शोधिया, शिम्पू पांडे आदि 7-8 लोगों को लेकर आया और हमारे साथ बुरी बुरी गाली गलौज व हाथापाई जैसे वारदात करने लगे, जिस पर बीच बचाव में गया तब सभी लोग ने मिलकर मेरे साथ भी मारपीट करते हुए जातिगत अपशब्द कहे जिसके बाद जान से मारने की धमकी भी दी जिसके बाद ग्रामीणों ने बीच-बचाव किया था।
थाने में दर्ज हुआ था मामला
मारपीट के कारण सिर में चोट लग जाने के बाद जब शिकायतकर्ता द्वारा थाना बिजुरी में आकर अपनी बीती हुई घटना को पुलिस के समक्ष रख प्राथमिकी दर्ज कराई गई। थाना बिजुरी द्वारा पहले तो शिकायतकर्ता की शिकायत पर रिपोर्ट नहीं लिखी जा रही थी। ग्रामीणों के दबाव में आकर पुलिस ने फिर एफ आई आर दर्ज की। जिसमें से नगर पालिका अध्यक्ष के कुछ साथी के नाम पुलिस द्वारा नहीं लिखी गई इस रिपोर्ट में संजीव पांडे व संजू सिंह,विनोद सोंधिया,शिम्पू पांडे का नाम नहीं लिखा गया था और उनका नाम यह कह कर छोड़ दिया गया था। जिसे पुलिस द्वारा विवेचना के दौरान लिखे जाने की बात कही थी फिर भी 1 सप्ताह बीत जाने के बाद अब तक नाम नहीं लिखे जाने से परेशान होकर शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस अधीक्षक से शिकायत दर्ज करवाने की मांग की गई।
तो क्या सत्ता के दम पर नहीं होगी कार्यवाही?
सप्ताह भर पूर्व प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी पुलिस द्वारा विवेचना मे लेटलतीफी एवं लापरवाही करना के साथ नप अध्यक्ष गिरफ्तारी ना होने से ग्रामीणों में काफी असंतोष सामने आ रहा है लोगों का कहना है कि क्या सत्ता और शासन भाजपा की होने के कारण भाजपा के पदाधिकारी एवं नगर पालिका अध्यक्ष के ऊपर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की जाएगी। वहीं पुलिस के कार्य चिन्हों पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। देखना है कि पुलिस अधीक्षक से शिकायत होने के बाद किस प्रकार की कार्यवाही पुलिस द्वारा की जाती है क्या नप अध्यक्ष के हमराहियों के नाम प्राथमिकी में शामिल होते हैं या फिर सत्ता के दबाव में कार्यवाही नहीं की जाती है।




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