मोहम्मद शकील
अहंकार का त्याग व सदगुणो के सामर्थ्य का सदुपयोग हो, तभी मानव समाज में शांति की स्थापना होती है, मानव अपने मानवीय मूल्यों के साथ अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।
ग्राम केशवाही (जमुनिहा) स्थित श्री आदिशक्ति मरखी देवी धूमावती मंदिर प्रांगण बरहाई खेरवा में नवरात्रि के पावन अवसर पर चल रहे श्रीराम कथा संगीतमय का श्रवण कराते हुए परम पूज्य आचार्य श्री अरविंद कृष्णम जी महाराज ने अध्यात्म प्रेमियों के मध्य कहीं।
संगीतमय कथा का श्रवण कराते हुए परम पूज्य आचार्य श्री अरविंद कृष्णम जी महाराज ने कथा का श्रवण कराते हुए कहाकि- सीता स्वयंवर में, राजाओं के अहंकार के प्रभाव में, राजा जनक द्वारा रखे शर्त पर स्वयं तैयार हो जाते हैं, अपनी उम्र व स्वयंवर कन्या के उम्र के अंतर को अहंकार व भौतिक सामर्थ की आसक्ति के कारण समझ ना सके, और सामर्थ्य की परीक्षा भी हो जाती है साथ ही, अपमानित होना पड़ता है, इसका परिणाम सामने आ जाता है, वही पर, श्रीराम अपनी विनम्रता, शिष्टाचार व गुरु आज्ञा पालन के साथ, अपने सद्गुणों के सामर्थ का सदुपयोग करते हुए, पल भर में शर्त का पालन कर दिया।
परम पूज्य आचार्य श्री अरविंद कृष्णम जी महाराज ने-परशुराम- लक्ष्मण संवाद को विस्तार से आध्यात्मिक विश्लेषण करते हुए कहाकि- मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपनी विनम्रता व शिष्टाचार के साथ, भौतिक संसाधनों के अभाव में भी कैसे सफलता प्राप्त की जा सकती है, एक अद्भुत संस्कार मानव कल्याण पथ में मानव को चलने का आध्यात्मिक संस्कार प्रदान किए, जो आज भी मानव समाज में शांति सद्भाव की स्थापना के संस्कार के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा व शक्ति प्राप्त करने का स्रोत है, श्री राम कथा के संदेशों को, एक आध्यात्मिक संस्कार के रूप में आने वाली पीढ़ी के मनोमस्तिक में स्थानांतरित करने की आवश्यकता है।
इसके पूर्व मानव कल्याण आश्रम गीता धाम कटकोना (बुढ़ार) के वीतराग परीब्राजक परमहंस ब्रह्मलीन स्वामी श्री सच्चिदानंद सरस्वती महाराज जी के प्रिय शिष्य श्रीकांत गीतानुरागी जी ने अपने आशीर्वचन में कहाकि- सत्संग में मानव समाज में रहने वाले, मानव होने का बोध होता है, मानव कर्म का ज्ञान होता है, मानवीय मूल्यों के साथ जीवन शैली का निर्माण होता है, बंधन और मोक्ष के बीच का अंतर समाप्त हो जाता है और सारी दुनिया में भारतीय जीवनशैली उत्कृष्ट इसलिए है कि वो, अध्यात्मिक संस्कारों पर आधारित है।
संगीतमय श्री राम कथा के आयोजन में अध्यक्ष चेतराम शर्मा, अनिरुद्ध सिंह, कमोल सिंह, डॉ. ओ. एन. त्रिपाठी, तीरथ प्रसाद शुक्ला, हरि सिंह, रमेश गुप्ता, कमलेश गुप्ता, सियाशरण यादव, मोहन अग्रवाल, राजाराम चतुर्वेदी, शिव प्रसाद तिवारी, विष्णु सिंह, गणेश शर्मा (बाबू जी) कमोल सिंह (एड.), भुलेश्वर यादव, तथा क्षेत्रीय धर्म प्रेमियों का सक्रिय सहयोग बना हुआ है।



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