रिपोर्ट @संतोष कुमार मिश्रा
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
उमरिया --- उमरिया जिले के संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में कार्यरत श्रमिक आज फिर एक दुर्घटना का शिकार हो कर जीवन और मृत्यु से जुझ रहा है। घटना के संबंध में बताया जाता है कि प्लांट में एक श्रमिक 12 फीट की उचाई पर कार्य करते हुए बिजली के करंट लगने से ऊपर से गिर गया, जहाँ से उसे तत्काल परियोजना स्थित चिकित्सालय लाया गया, जिससे मजदूर की हालात गंभीर होने के कारण शहडोल के लिए रिफर कर दिया गया है।
घायल मजदूर की पहचान ओमप्रकाश सिंह उम्र 27 वर्ष, पिता नत्थू सिंह, निवासी वार्ड क्रमांक 4 नौरोजाबाद के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि श्रमिक शुभम नामक ठेकेदार (पप्पू) झा के अधीन काम कर रहा था।
घटना के संबंध में मिली जानकारी अनुसार सीएचपी (कोल हैंडलिंग प्लांट) साइड की घटना की है, जहां पर प्लेट लगाने का काम चल रहा था। इसी दौरान वेल्डिंग करते समय अचानक करंट का झटका लगने से श्रमिक का संतुलन बिगड गया और वह कार्य स्थल से नीचे गिर गया। गिरने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
इस हादसे के बाद एक बार फिर संजय गाँधी ताप परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े कर दिये है ।सूत्र बताते हैं कि संजय गाँधी ताप परियोजना के नाम पर लंबा खेला कर श्रमिकों की सुरक्षा को दांव पर लगा कर उन्हें मरने और जीने के लिये छोड़ दिया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजी खानापूर्ति की रह गयी है जिसके घातक दुष्परिणाम मजदूरों की अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। यह कोई पहली दुर्घटना नहीं है जिससे परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था को उजागर करके रख दिया है।सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी के पद पर जब से दुबे जी सम्हाले है तब से सुरक्षा व्यवस्था तार तार हो गयी है। वह कदापि सुरक्षा मानकों के प्रति गंभीर नहीं है। बताया जाता है कि मजदूरों को जोखिम भरे काम कराये जाने के लिए भी जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते। यहां तक कि कई मजदूरों को बुनियादी सेफ्टी गियर जैसे सेफ्टी शूज तक पिछले वर्षों से मुहैया नहीं कराये जाते हैं।
थर्मल पावर के आंतरिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह भी चर्चा है कि सेफ्टी व्यवस्था पूरी तरह चरमरायी हुई है और पूरी परियोजना राम भरोसे चल रही है। अनवरत रूप से घटित दुर्घटनाओं के बाबजूद उच्च प्रबंधन के व्दार ऐहतियाती कार्यवाही न किया जाना उच्च प्रबंधन की कार्यवाही पर सग्गा मिती के आरोपों को बल मिल रहा है हैं ।
अब एक बार भी वही पुराना सवाल हर एक के मतिष्क पर छाया हुआ है कि आखिर कार कब तक शक्ति भवन में बैठे एम डी जैसे संवेदनशील पदो पर बैठे अनुभवी अधिकारी और वरिष्ठ प्रबंधन अपने टुकडो के लिए मजदूरों की जान से खिलवाड़ करते रहेंगे ? क्या मजदूरों की अब तक चढी बलि अभी भी कम हैं।संजय गाँधी ताप परियोजना के सुरक्षा व्यवस्था को यदि समय रहते नहीं सुधारे गयें तो आने वाला कल और भयावह होगा।


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