रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद शहडोल के कार्यकर्ताओं द्वारा विश्वविद्यालय में हो रही व्याप्त अनियमिताओं के विरोध में कुलगुरु को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देते हुए जिला संयोजक अमन त्रिपाठी ने बताया कि छात्र हितों में निम्नलिखित मांग कि गई जिसमें
1. यह है कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम के उपरांत रिवैल्युएशन का फॉर्म जो प्रारंभ किया गया विद्यार्थियों ने उसमें आवेदन तो किया परंतु आज दिनांक तक चार माह बीत जाने के उपरांत भी विश्वविद्यालय परीक्षा परिणाम जारी करने में असमर्थ है जिससे विद्यार्थियों को भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है जिसको देखते हुए उचित कार्रवाई की जाए एवं विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम जल्द से जल्द जारी किया जाए।
2. यह है कि PM–USHA (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) के अन्तर्गत छात्रों की सुविधा तथा गुणवत्ता सुधार के लिए यह योजना संचालित हो रही है इस योजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना है, किंतु दुर्भागवश PM–USHA के तहत कराए जा रहे कार्य सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए जैसे – छात्रों को कंप्यूटर ट्रेनिंग एवं कई प्रकार के सेमिनार जो कि विश्वविद्यालय में हो रहे उसमें केवल खुद की वाह वाही लूटने के उद्देश्य से है। इससे विद्यार्थीयो का किसी भी प्रकार से कोई शैक्षणिक विकाश नहीं हो पा रहा है। नहीं इसका फायदा विश्वविद्यालय को हो पा रहा है अभी तक हुए सभी सेमिनार एवं वर्कशॉप की जांच की जाए एवं दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाए।
3. यह है कि विश्वविद्यालय में सन 2019 में आंदोलन के उपरांत बसों का संचालन किया गया जिसमें विद्यार्थयो के फीस में 500 रुपए की बढ़ोत्तरी के साथ बसों का संचालन प्रारंभ किया गया परंतु नवीन कुलपति आते ही 1500 रुपए की बढ़ोत्तरी करते हुए बस की फीस 2000 रुपए विद्यार्थियों के ट्यूशन फीस में जोड़ दिया गया जबकि शंभूनाथ शहडोल स्थित कैंपस के विद्यार्थियों द्वारा बस की सुविधा भी नहीं ली जाती है जिसके बाद भी वो सभी विद्यार्थी साइंस के विद्यार्थियों के फीस के बराबर फीस देते है जिसको ध्यान में रखते हुए बस की फीस कम की जाए एवं शहडोल स्थित कैंपस के विद्यार्थियों से ली जाने वाली बस की फीस बंद की जाए।।
4. यह है कि विश्वविद्यालय द्वारा आश्वासन के बाद भी आज दिनांक तक दोनों केंपसों के मुख्य द्वार पर CCTV कैमरे एवं पूरे शहडोल कैंपस में CCTV कैमरे नहीं लगवाए गए जिसपर तत्काल रूप से लगवाये जाएं।
5. यह है कि विश्वविद्यालय द्वारा आश्वासन के बाद भी आज दिनांक तक पुराने कैंपस में सभी पुराने भवनों का रेनोवेशन नहीं किया गया एवं सभी कक्षाओं को स्मार्ट कक्षाओं में नहीं बदला गया जिसपर तत्काल रूप से कार्यवाही हो।
6. यह है कि विश्वविद्यालय द्वारा आश्वासन के बाद भी दोनों कैंपसों में निःशुल्क Wi-Fi सुविधा प्रारंभ नहीं किया गया जिसमें तत्काल रूप से कार्रवाई की जाए।
7. यह है कि विश्वविद्यालय द्वारा आश्वासन के बाद भी दोनों कैंपसों में छात्रों के लिये मेडिकल सुविधा एवं एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं की गई जिसपर कार्यवाही की जाए।
8. यह है कि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद बैठक में विश्वविद्यालय के शहडोल स्थित कैंपस में खेल मैदान के चारों तरफ बाउंड्री वॉल की ऊंचाई बढ़ाने के लिए ओर पुराने छात्रावास के भवन के जीणोद्धार के लिए राशि का आवंटन होने के बाद भी आज दिनांक तक किसी भी रूप से कार्यवाही नहीं की गई जिसको संज्ञान में लेते हुए तत्काल कार्यवाही की जाए।
9. यह है कि विश्वविद्यालय द्वारा आश्वासन के बाद भी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थीयो को डिजिटल ID कार्ड उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई परंतु आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गई जिससे विश्वविद्यालय में आने वाले असामाजिक तत्वों को रोका नहीं जा सकता और कोई पहचान नहीं हो पाती है।
10. यह है कि विश्वविद्यालय के दोनों केंपसों में स्वच्छ पीने हेतु पानी की व्यवस्था की जाए एंव वॉटर कूलर, क्लास रूम एवं वॉशरूम की सफाई नियमित कराई जाए।
11. यह है कि विश्वविद्यालय के पुराने कैंपस में कैंटीन स्थापित कराई जाए।
12. यह है कि विश्वविद्यालय के दोनों केंपसों में विद्यार्थीयो हेतु कम्प्यूटर लैब एवं प्रैक्टिकल हेतु प्रायोगिक सामग्री एवं रासायनिक सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
13. यह है कि विश्वविद्यालय शहडोल कैंपस में रोड पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है जिस में आश्वासन के बाद भी आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गई जिसपर उचित कार्यवाही की जाए।
14. यह है कि 25 फरवरी 2026 को हुए पंचम दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को दी जाने वाली फूड पैकेट जो की दूषित थी जिसमें से दुगंध आ रही थी आपके संज्ञान में आने के बाद भी आज दिनांक तक किसी प्रकार से कोई कार्रवाई नहीं की गई जिस पर तत्काल रूप से कार्रवाई की जाए।
15. यह है कि विश्वविद्यालय में पीएम उषा के तहत हो रहे नवीन भवनों का निर्माण गुणवत्ता विहीन हो रहा क्योंकि कोई भी नवीन भवन 2 माह में दो मंजिल पूर्ण हो जाता है जबकि छत को मजबूत करने के लिए पानी की आवश्यकता होती है एवं नवीन भावन में किसी प्रकार से पानी नहीं डाला जाता हैं जिस पर उचित कार्रवाई करते हुए उसकी जांच कराई जाए।
16. यह है कि विश्वविद्यालय में पर्याप्त प्राध्यापक होने के बाद भी नियमित कक्षायें संचालित नहीं होती जिसे संज्ञान में लेते हुए नियमित कक्षायें प्रारंभ की जाए एवं विशेषकर एग्रीकल्चर की नियमित कक्षायें व जो परीक्षा एक सेमेस्टर लेट चल रही उसे समय पर कराने का प्रयास किया जाए।
17. यह है कि विश्वविद्यालय द्वारा यूटीडी के विद्यार्थियों से नामांकन फीस 500 एवं सबद्धता के 43 महाविद्यालय से 750 रुपए लिया गया जो की 250 रुपए अधिक है ऐसा किसी विश्वविद्यालय में नहीं होता है जिसे तत्काल रूप से सही करते हुए अधिक ली गई फीस विद्यार्थियों को वापस की जाए।
18. यह है कि विश्वविद्यालय द्वारा प्रत्येक वर्ष शोध प्रवेश परीक्षा (Ph.D.) का आयोजन नियमित रूप से कराया जाए तथा इसके माध्यम से योग्य विद्यार्थियों को पीएचडी में प्रवेश प्रदान किया जाए।
19. यह है कि विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा संपन्न होने के 8 माह पश्चात भी पूर्ण रूप से परीक्षा परिणाम जारी न किया जाना, विश्वविद्यालय के केंद्रीय मूल्यांकन प्रभारी की गंभीर लापरवाही एवं नाकामी को दर्शाता है। अतः इस विषय को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मूल्यांकन प्रभारी डॉ. पूर्णिमा शर्मा को तत्काल प्रभाव से प्रभारी पद से हटाया जाए तथा लंबित पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) के परीक्षा परिणाम शीघ्र जारी किए जाएं।
20. यह है कि विश्वविद्यालय में कई बार देखा गया है कि नियमित प्राध्यापक समय पर विश्वविद्यालय नहीं पहुंचते हैं। इस स्थिति की पुष्टि विश्वविद्यालय में स्थापित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली के माध्यम से की जा सकती है। अतः ऐसे प्राध्यापकों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी प्राध्यापक नियमित रूप से एवं समय पर विश्वविद्यालय में उपस्थित हों, इसके लिए स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं।
इन सभी मांगो को लेकर विद्यार्थी परिषद द्वारा बताया गया की मांगे पूर्ण न होने पर विद्यार्थी परिषद रचनात्मक आंदोलन करेगी जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी क्योंकि विद्यार्थी परिषद छात्र के लिए सदैव तत्पर है विश्वविद्यालय कुलगुरु द्वारा दो दिवस का समय मांगा गया है ज्ञापन देते हुए। मध्य क्षेत्र जनजाति कार्य प्रमुख रामाधार बैंस, प्रांत सहमंत्री शिवेंद्र चतुर्वेदी, विभाग संगठन मंत्री सावन सिंह, विभाग संयोजक अखिलेश सिंह, विभाग छात्रा प्रमुख अंजली पांडेय, विश्वविद्यालय मंत्री आकाश मिश्रा,भूमिका द्विवेदी, ओम सोनी, रोशनी पांडेय, हर्षिता मिश्रा, अनुराग पाठक, गोकुल पटेल, विक्रांत शर्मा, अमन तिवारी, एवं परिषद के अन्य कार्यकर्ता वा विश्वविद्यालय के छात्र उपस्थित रहे।



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