रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
अनूपपुर | अनूपपुर जिले के कोतमा वन परिक्षेत्र का मलगा बीट, जो कि रामनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। घने जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध यह इलाका अब कथित तौर पर कोयला उत्खनन की गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में है। पनही बूड़ा नदी के किनारे बसे क्षेत्रों को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां से लगातार कोयला निकाले जाने और उसे बाहर ले जाने की गतिविधियां देखी जा रही हैं। ग्रामीणों द्वारा बड़े पैमाने पर संचालन की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, दिन की तुलना में रात के समय जंगल के भीतर गतिविधियां अधिक बढ़ जाती हैं। बताया जाता है कि अंधेरे का फायदा उठाकर कथित रूप से खुदाई की जाती है और कोयला निकाला जाता है। इन स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने की बात भी सामने आई है, जिससे वहां कार्य करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि निकाले गए कोयले को ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों के माध्यम से बाहर ले जाया जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि इस प्रकार की गतिविधियां जारी रहती हैं तो इससे शासन को राजस्व हानि होने की संभावना है। साथ ही अनियंत्रित खुदाई से जंगलों की हरियाली प्रभावित होने और मिट्टी के कटाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। पनही बूड़ा नदी के तटीय क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है, जिससे भविष्य में जल स्रोतों पर प्रभाव पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में बढ़ती मानवीय गतिविधियों और शोर के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर असर पड़ रहा है। इससे उनके विचरण क्षेत्र में बदलाव और मानव-वन्यजीव टकराव की संभावना बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
इतनी व्यापक स्तर पर कथित गतिविधियों की चर्चा के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से अपेक्षित स्तर की कार्रवाई नजर नहीं आने की बात ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है। उनका कहना है कि शिकायतों के बाद भी मामला प्रायः औपचारिक जांच तक ही सीमित रह जाता है, जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष देखा जा रहा है।
डिप्टी रेंजर रामनगर वन परिक्षेत्र कोतमा महिपाल सिंह ने बताया कि बीट क्षेत्र में लगातार गश्त के निर्देश दिए गए हैं और वे स्वयं भी निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई संदिग्ध गतिविधि या वाहन सामने आता है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यदि किसी कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे।
विभागीय अधिकारियों ने भी बताया कि उन्हें इस संबंध में जानकारी प्राप्त हुई है और जल्द ही रेंजर, डिप्टी रेंजर तथा बीटगार्ड के साथ मौके का निरीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में अवैध उत्खनन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मलगा बीट और आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीणों में इस पूरे मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को गंभीर नुकसान हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल, मलगा बीट में सामने आ रही ये जानकारियां जांच का विषय बनी हुई हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासनिक जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और आगे इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि स्थिति स्पष्ट होने के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे, जिससे क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन और संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।


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