रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
नदियों का सीना छलनी, ओवरलोडिंग का खुला खेल NGT के आदेशों को ठेंगे पर रख रहा रेत का सेठ अजीत सिंह मल्होत्रा....
शिकायत के बाद भी नहीं हुई जांच व कार्यवाही....क्या प्रमुख सचिव की मौन सहमति है ढाल?
28 करोड़ का जुर्माना एसोसिएट कॉमर्स की खदानों से रेत लोड कमलेश सिंह की दौड़ते हाईवा - जारी टी.पी दिखा रही प्रशासन की नाकामी
इंट्रो -अनूपपुर में रेत का खेल अब व्यापार नहीं, बल्कि सरकारी खजाने पर डकैती बन चुका है! जिले के विकास के 28 करोड़ को फाइलों के कब्रिस्तान में दफन करने वाले खनिज विभाग के जिम्मेदार क्या अब माफिया के पेरोल पर काम कर रहे हैं? एक तरफ प्रदेश सरकार खाली खजाने का रोना रोकर जनता पर टैक्स का बोझ डाल रही है, तो दूसरी तरफ अनूपपुर में28,31,70,000 की रिकवरी को मैनेजमेंट की चादर ओढ़ाकर दबा दिया गया।यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों के सीने पर पोकलेन चलाकर किया गया सीधा प्रहार है। वहीं दूसरी ओर प्रमुख सचिव से लेकर जिले के छोटे कारिंदों तक रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स के रसूख के आगे सारे नियम और वादे खोखले दिखाई दे रहे हैं। जीवनदायनी केवई मे चंगेरी और मानपुर मे सोन का हैवी पोकलैन उतारकर छलनी होता सीना और सड़कों पर तांडव करते रेत ओवरलोड यमराज चीख-चीख कर पूछ रहे हैं-साहब, आपकी आँखों पर बंधी पट्टी 'गांधी' की चमक से धुंधलाई है या रेत ठेकेदार व रासुकादारों के खौफ से? याद रहे फाइलों में दफन यह 28 करोड़ का हिसाब और जीवन दायनी नदियों मे एसोसिएट कॉमर्स की वैध के आड़ में कई करोड़ के अवैध खनन मे चुप्पी सरकार को अरबो में राजस्व की छती पहुंचाई जा रही है!
अनूपपुर -क्या अनूपपुर का प्रशासन रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स के आगे सरेंडर कर चुका है? पूर्व कलेक्टर चंद्र मोहन ठाकुर का लगभग 28.31 करोड़ की वसूली का आदेश आज वर्तमान अधिकारियों की मेज पर मैनेजमेंट की बलि चढ़ गया है। एक तरफ एसोसिएट कॉमर्स जैसी कंपनियाँ नदियों का सीना छलनी कर रही हैं और डंके के चोट पर अवैध खनन कर रही है मैनेजमेंट के नाम पर प्रशासन सहित वल्लभ भवन में बैठे अधिकारियों की भी बदनामी कर रहे हैं जो पूरे जिले में भी चर्चा का विषय बना हुआ है वोही दूसरी तरफ माइनिंग विभाग और कलेक्टर साहब की रहस्यमयी खामोशी सीधे तौर पर साठगांठ की गवाही दे रही है।साहब.... यह सिर्फ अवैध उत्खनन नहीं बल्कि सरकार के खजाने पर सरेआम डकैती है। राजस्व वसूली न होने से जिले के विकास में भी बाधा आ रहा है!
28 करोड़ की फाइल का कत्ल-माफिया के सामने नतमस्तक प्रशासन
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार चचाई आबाद क्षेत्र में बाबाकुटी शिथिलीकरण टैंक के पास बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन का मामला सामने आया था। खनिज विभाग की जांच में पाया गया कि निर्धारित खदान क्षेत्र से बाहर लगभग 94,390 घन मीटर रेत का अवैध उत्खनन किया गया।
इस गंभीर उल्लंघन पर मध्य प्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 के तहत कार्रवाई करते हुए तत्कालीन जिला कलेक्टर ने आरोपी कमलेश सिंह चंदेल पर रॉयल्टी की 30 गुना राशि, यानी कुल ₹28,31,70,000 (अट्ठाइस करोड़ इकतीस लाख सत्तर हजार रुपये) का अर्थदंड आरोपित किया था। सवाल खड़ा होता है कि जब आदेश में मशीनें तभी छोड़ने की शर्त थी जब जुर्माना जमा हो तो क्या सिस्टम ने बिना वसूली ही लेन-देन कर फाइलें दफन कर दीं? यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने के साथ गद्दारी है।
एसोसिएट कॉमर्स का आतंक चंगेरी व मानपुर की सरजमीं पर नियमों का टीपी सर्कस
चंगेरी और मानपुर खदानों में खनिज नियम और NGT के आदेशों की चिता जलाई जा रही है। एसोसिएट कॉमर्स नाम के ठेकेदार ने मानों जिले को अपनी जागीर समझ लिया है। खदान की सीमा से 5 से 6 एकड़ बाहर तक नदी का सीना छलनी किया जा रहा है। यहाँ कानून का पहरा नहीं बल्कि एसोसिएट कॉमर्स के सेठ की पोकलेन मशीनों का शोर है। जहाँ रेत दिखती है वहीं रेत ठेकेदार का पंजा गड़ जाता है। क्या माइनिंग कॉरपोरेशन ने अवैध' को वैध बनाने का लाइसेंस दे रखा है?
विकास पर ब्रेक और गांधी की चमक- क्या रसूखदारों ने खरीदा कानून?
जिले के विकास के लिए जो 28 करोड़ शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़कों पर खर्च होने थे उन्हें माफिया के रसूख ने निगल लिया है।चर्चाओं व सूत्रों का कहना है कि विभाग की आँखों पर 'गांधी की चमक' वाली पट्टी बंधी है इसीलिए उसे ओवरलोडिंग के यमराज और नदी में उतरती प्रतिबंधित मशीनें दिखाई नहीं देतीं। यह चुप्पी महज संयोग नहीं बल्कि मंत्रालय से लेकर जिले के छोटे कारिंदों तक फैले एक 'सुनियोजित सिंडिकेट' का हिस्सा है जो पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है इस तरह की चर्चा से वल्लभ भवन में बैठे उच्च अधिकारियों के साथ सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है!
कागजी 'कदमसारा' और जमीनी 'चंगेरी' टीपी का फर्जीवाड़ा और डिजिटल सेंधमारी
अनूपपुर में खनिज विभाग की तकनीक अब रेत ठेकेदार की गुलाम नजर आती है। जिले में डिजिटल डकैती का ऐसा खेल चल रहा है जहाँ ई-टीपी (e-TP) कदमसारा या पाषान खदान की कटती है लेकिन रेत का अवैध उठाव चंगेरी (कोतमा) से किया जा रहा है। वाहन क्रमांक MP65GA1110 जैसे दर्जनों उदाहरण चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं कि जीपीएस और ऑनलाइन मॉनिटरिंग के दावों में कितनी सच्चाई है। जब हाथ से बने गुलाबी चालान पर लोडिंग पॉइंट चंगेरी दर्ज हो और पोर्टल पर पाषान, तो यह तकनीकी चूक नहीं बल्कि सुनियोजित राजस्व चोरी है।
तो क्या मंत्रालय की मौन सहमति...? प्रमुख सचिव के दबाव के चर्चे आम
करोड़ों के राजस्व की हानि और सरेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ने की खबर क्या मंत्रालय तक नहीं है? या फिर प्रमुख सचिव के संरक्षण में ही रेत ठेकेदार 'एसोसिएट कॉमर्स' सीमा के बाहर डाका डाल रहा है? जब डंफर सड़कों को रौंद रहे हैं और जलीय जीव-जंतु मर रहे हैं तब जिम्मेदार विभाग 'कुंभकर्णी नींद' का नाटक कर रहे हैं। क्या माइनिंग कॉरपोरेशन ने अब केवल 'मैनेजमेंट' को ही अपनी मुख्य कार्यनीति बना लिया है? और सरकार को राजस्व का चूना लगाने का कार्य कर रही है!
कागजी शेर बनाम जमीनी माफिया-जनता पूछेगी हिसाब
खनिज विभाग के उड़नदस्ते केवल कागजों पर दौड़ते हैं। जब भी शिकायत होती है, 'जांच का भरोसा' देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। अनूपपुर की जनता पूछ रही है जब्त की गई करोड़ों की पोकलेन मशीनें आज कहाँ हैं? क्या वे बिना जुर्माना भरे ही माफिया के पास वापस पहुँच गईं? अगर शासन ने अपनी वसूली नहीं की और इस 'रेत के खेल' को नहीं रोका, तो यह साफ हो जाएगा कि यहाँ लोकतंत्र नहीं, बल्कि माफियातंत्र का शासन चल रहा है।



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