रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
1. मामला क्या है?
शहडोल। जिले में रेत कारोबार से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। घेरोला मोहल्ला निवासी समाजसेवी अशरफ खान ने कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि रेत माफिया सुनियोजित तरीके से आम जनता के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं। इस खुलासे ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2. 200 घनफीट के नाम पर 130 घनफीट
शिकायत के अनुसार, ग्राहकों को 180–200 घनफीट रेत देने का दावा किया जाता है, लेकिन वास्तविकता में मात्र 130 घनफीट रेत ही दी जाती है।
👉 यानी हर गाड़ी में लगभग 30–40% तक की सीधी कटौती।
3. तकनीकी हेराफेरी का खेल
रेत माफिया गाड़ियों में एंगल और लोहे की चादर लगाकर उनकी अंदरूनी क्षमता कम कर देते हैं।
गाड़ी की ऊंचाई 8–10 इंच तक घटा दी जाती है
बाहर से गाड़ी पूरी भरी हुई दिखाई देती है
👉 ग्राहक को धोखे में रखकर पूरा पैसा वसूला जाता है
4. खाली करने पर खुलती है सच्चाई
जब गाड़ी को खाली कराकर माप लिया जाता है, तब असली मात्रा सामने आती है।
लेकिन अधिकांश लोग बिना जांच के भरोसा कर लेते हैं—और यही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है।
5. हाईवा से ट्रॉली तक—मुनाफे का खेल
रेत व्यापारी हाईवा से रेत लाकर एक जगह गिराते हैं, फिर उसी रेत को छोटी ट्रॉलियों में भरकर 5–6 अलग-अलग ट्रिप में बेचते हैं।
👉 एक ही रेत से कई गुना कमाई का नेटवर्क तैयार किया गया है।
6. गरीब और ग्रामीण सबसे ज्यादा प्रभावित
जानकारी के अभाव में ग्रामीण और गरीब वर्ग इस धोखाधड़ी का सबसे बड़ा शिकार बन रहे हैं।
👉 घर बनाने का सपना देखने वाले लोग अपनी जीवनभर की कमाई गंवा रहे हैं।
7. कीमत में भी डबल मार
वास्तविक कीमत: लगभग ₹5000
वसूली जा रही रकम: ₹8000 तक
👉 कम रेत + ज्यादा दाम = दोहरी लूट
8. प्रशासन से क्या मांग की गई?
समाजसेवी अशरफ खान ने मांग की है कि:
सभी रेत गाड़ियों (खासकर 912 मॉडल डंपर) की जांच हो
दोषी व्यापारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए
भविष्य में पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए
9. संबंधित विभागों को भी सूचना
इस पूरे मामले की जानकारी:
जिला खनिज विभाग
नाप-तौल विभाग
को भी दी गई है, ताकि संयुक्त कार्रवाई संभव हो सके।
10. जनता में आक्रोश, कार्रवाई का इंतजार
मामले के उजागर होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है।
अब सबसे बड़ा सवाल—
👉 क्या प्रशासन सख्त कदम उठाएगा या रेत माफियाओं का खेल यूं ही चलता रहेगा?


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