रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
*ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अंकित सिंह ने बुलंद की जनता की आवाज, युवाओं को रोजगार देने की भी उठी मांग*
धनपुरी/शहडोल। औद्योगिक विकास की चमक के पीछे छिपती अव्यवस्था, कोल डस्ट के जहरीले गुबार और बदहाल बुनियादी ढांचे के बीच धनपुरी नगर की स्थिति लगातार विकट होती जा रही है। नगरवासियों की पीड़ा अब जनप्रतिनिधियों के माध्यम से खुलकर सामने आ रही है। इसी कड़ी में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, बुढ़ार के अध्यक्ष अंकित सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने South Eastern Coalfields Limited के सोहागपुर क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक बी.के. जेना को एक तीखा, आक्रामक और चेतावनी भरा ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में धनपुरी नगर के भीतर व्याप्त “विनाशकारी हालात” पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए 10 दिनों के भीतर ठोस और प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि यदि समयसीमा के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो उग्र जनआंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मुद्दा रीवा-अमरकंटक मुख्य मार्ग की जर्जर स्थिति को लेकर उठाया गया। सुभाष चौक से अमलाई फाटक तथा बगइहा पुल से अमलाई ओसीएम तक की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। आमजन का आवागमन बेहद कठिन हो गया है, दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है और स्थानीय व्यापार पर भी इसका गंभीर असर पड़ा है। कांग्रेस ने मांग की है कि इस मार्ग का पुनर्निर्माण 10 दिनों के भीतर कराया जाए, अन्यथा जनआक्रोश सड़कों पर दिखाई देगा।
कोयला परिवहन और साइडिंग से उड़ने वाली धूल को लेकर भी ज्ञापन में कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है। कोल डस्ट ने पूरे नगर को अपनी गिरफ्त में ले लिया है, जिससे श्वसन एवं फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर इसका विशेष दुष्प्रभाव देखा जा रहा है। कांग्रेस ने मांग की है कि सड़कों और कोल साइडिंग क्षेत्रों में नियमित पानी का छिड़काव कराया जाए तथा सड़कों की सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि नागरिकों को इस जहरीली धूल से राहत मिल सके।
इसके साथ ही वार्ड क्रमांक 07, छोटी अमलाई में चल रहे अवैध और असुरक्षित निर्माण कार्यों पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई। ज्ञापन में कहा गया कि नियमों की अनदेखी कर बनाए जा रहे ये निर्माण कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। कांग्रेस ने ऐसे निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अंकित सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि “धनपुरी नगर को कोयले की कालिख में झोंककर केवल मुनाफा कमाया जा रहा है, जबकि यहां की जनता को बदहाल सड़कें, प्रदूषण और बीमारियां ही मिल रही हैं। यदि 10 दिनों के भीतर हालात नहीं सुधरे, तो कांग्रेस उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।” उन्होंने यह भी मांग उठाई कि कोल डस्ट से प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय युवाओं को खदानों में रोजगार में प्राथमिकता दी जाए, ताकि वे अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें।
इस दौरान कांग्रेस नेता इबरार खान ने गोफ एरिया में पानी की टंकी निर्माण को लेकर तीखा सवाल उठाते हुए मुख्य महाप्रबंधक बी.के. जेना को घेरा। उन्होंने कहा, “क्या एसईसीएल कोतमा में हुए बड़े हादसे के बाद भी सचेत नहीं हुआ है? क्या प्रबंधन को किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतजार है?” उनका यह बयान पूरे कार्यक्रम में चर्चा का केंद्र बना रहा।
वहीं मध्यप्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश सचिव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जुल्फकार अली ने भी ज्वलंत मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि धनपुरी नगर का व्यापार लगभग चौपट हो चुका है। “यहां की जनता को विकास के नाम पर केवल कोयले की धूल मिली है। लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है, लेकिन एसईसीएल अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा सका है। आखिर कब तक जनता इस अन्याय को सहन करेगी?”
इस अवसर पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने एकजुट होकर नगर की समस्याओं के समाधान की मांग को मजबूती से उठाया। प्रमुख रूप से राम सिंह, संतोष सिंह, इबरार खान, राम सजीवन शर्मा, मोहम्मद आजाद, प्रशांत जैन जुल्फकार अली, नेहा खान, सुजाता बैरागी, आदिवासी नेता विमल सिंह, अदना खान, सुमन वर्मा, जूली बैरागी, आरिफ अफरीदी, इंद्र कुमार मिश्रा, ओंकार सिंह, सूर्या सिंह, विक्की पटेल, निक्की तिवारी, मोहन यादव,आदिल ख़ान भुनेश्वर प्रजापति अनिकेत, कनिका, कृष्णा कुमार प्रजापति, आकाश यादव, अलबाब ख़ान अजय पनिका, छोटू पनिका, राहुल कोल, रवि पनिका, शुभांशु सिंह, गौतम महतो, बंटी महतो एवं मोहन कुमार, मोहशिन खान,सहित सैकड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
समापन में यह स्पष्ट संकेत मिला कि अब धनपुरी की जनता केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होने वाली। यदि समय रहते प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह असंतोष एक बड़े जनआंदोलन में परिवर्तित होकर पूरे क्षेत्र को आंदोलित कर सकता है। आने वाले 10 दिन यह तय करेंगे कि हालात सुधरते हैं या संघर्ष की आग और भड़कती है।




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