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होटल सील होते ही अवैध शराब कारोबारियों की खुली परतें

 


रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी

पाली में एसडीएम की कार्रवाई से आबकारी विभाग और ठेकेदारों पर उठे बड़े सवाल


प्यादो को छोड़ सरगना के ऊपर होनी चाहिए करवाई 


उमरिया जिले के पाली नगर में दो  सौ मी  के दुरी माता  बिरासनी  मंदिर है नगर वासियों का कहना है कि यह ठेका दूर होना चाहिए  ठेकेदार के गुर्गे सुबह होते गांव गांव नगर के कोने-कोने  पहुंचते हैं पान के टपरो व होटल अन्य जगह शराब आसानी से कस्टमर को उपलब्ध हो जाती हैअवैध शराब कारोबार पर आखिरकार प्रशासन का डंडा चल गया। एसडीएम मीनाक्षी बंजारे ने गुरुनानक होटल और वीनस होटल पर छापामार कार्रवाई करते हुए दोनों प्रतिष्ठानों को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान नया बायपास स्थित राधा कुंज होटल के पास आनंद सिंह के घर पर भी दबिश दी गई। इस कार्रवाई के बाद पूरे नगर में हड़कंप मच गया और वर्षों से चल रहे अवैध शराब नेटवर्क की चर्चा फिर तेज हो गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पाली में शराब की पैकारी कोई छिपा हुआ खेल नहीं था। बिना नंबर की गाड़ियों से दिनदहाड़े शराब सप्लाई की जाती थी और नगर से लेकर घुंघुटी तक एनएच-43 किनारे संचालित ढाबों में खुलेआम अवैध शराब बेची जाती थी। सवाल यह है कि जब पूरा शहर इस कारोबार को देख रहा था, तब आबकारी विभाग आखिर किस दुनिया में खोया था 

नगर में चर्चा है कि अवैध शराब का यह धंधा विभागीय संरक्षण और शराब ठेकेदारों की सांठगांठ से फल-फूल रहा था। छोटे ढाबों और होटलों तक शराब पहुंचाने का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती रही। आरोप तो यहां तक लग रहे हैं कि “मैनेजमेंट” के दम पर अवैध कारोबारियों को खुली छूट मिली हुई थी।

लोगों का कहना है कि यदि एसडीएम मीनाक्षी बंजारे खुद मैदान में उतरकर कार्रवाई नहीं करतीं, तो शायद यह खेल यूं ही चलता रहता। प्रशासन की इस कार्रवाई ने आबकारी विभाग की निष्क्रियता को पूरी तरह उजागर कर दिया है। अब लोग पूछ रहे हैं कि जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी अवैध शराब पर रोक लगाने की थी, वे आखिर किसके हित साधने में व्यस्त थे?

क्षेत्र में युवाओं तक आसानी से शराब पहुंचना सामाजिक चिंता का विषय बना हुआ था। हाईवे किनारे ढाबों में देर रात तक शराब बिक्री की शिकायतें आम थीं, लेकिन जिम्मेदार विभाग कभी गंभीर नजर नहीं आया। अब होटल सील होने के बाद अन्य अवैध कारोबारियों में डर का माहौल जरूर बना है, लेकिन जनता यह भी जानना चाहती है कि केवल छोटे ठिकानों पर कार्रवाई होगी या फिर पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसेगा प्रशासन।

पाली में हुई इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि यदि प्रशासन चाहे तो अवैध कारोबार पर रोक लग सकती है। लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और शराब ठेकेदारों पर भी कोई कार्रवाई होगी या मामला केवल होटल सील कर शांत कर दिया जाएगा।

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