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ज्वाला धाम ने निपनिया ग्राम पंचायत के गौशाला को लिया कब्जे में

 


रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी

जन सुनवाई में शिकायत के बाद कार्यवाही का इंतजार

उमरिया --- ज्वाला धाम ऊंचेहरा  की हडप नीति का कारनामा ऊंचेहरा ग्राम पंचायत से बढकर निपनिया ग्राम पंचायत को भी अपने गिरफ्त में ले लिया है। विदित होवे की निपनिया ग्राम पंचायत में बनी गौशाला पर अतिक्रमण करते हुए ज्वाला धाम ने अपने कब्जे में ले लिया है। विदित होवे की निपनिया ग्राम पंचायत की   वर्क आई डी 174000 2080/A v/1/ 22012034514047 के लागत 38 लाख 5 हजार से प्रारंभ कराया गया था, जो गौशाला  लगभग बनकर तैयार हो गया है, लेकिन इस गौशाला को ग्राम पंचायत निपनिया के व्दारा शासकीय गौशाला को ज्वाला धाम के हवाले कर दिया गया है। ज्वाला धाम और ग्राम पंचायत के सरपंच की इस मिलीभगत के कारण न सिर्फ शासकीय धन राशि के दुरुपयोग करने का मामला है , साथ ही मध्यप्रदेश शासन की गौशाला के उद्देश्य को भी पलीता लगता दिखाई दे रहा है।

मध्यप्रदेश शासन का  गौशालाओं की व्यवस्था करने के पीछे मुख्य उद्देश्य गायों को कसाई खाना जाने से रोकने के लिए लावारिस, बूढ़ी, अपंग, बीमार, दूध न देने वाली गायों और सडक पर गायों  की मौत रोकने के लिए गौशालाओं की  व्यवस्था  की व्यवस्था की गयी है, लेकिन इसके उलट फेर निपनिया ग्राम पंचायत में बनी गौशाला में ज्वाला धाम गौशाला  की गायों को रखने के लिये उपयोग के लिए कब्जा करके रख लिया गया है, जिससे सिर्फ न शासन की मंशा को धक्का लगा है, साथ ही आवारा गाय आज भी सडकों में दुर्घटनाओं की शिकार हो रही है, और ज्वाला समिति शासकीय गौशाला में कब्जा कर मनमर्जी का राज कायम कर रखी है, जबकि सरकार की मंशा यह थी कि गौशाला में केवल गाय पालने के लिए  आवारा गायों से किसानों की फसल बचाने और जैविक खाद उपलब्ध कराना था। 

इस बात की शिकायत निपनिया ग्राम पंचायत के आंनद कुमार गौतम ने कलेक्टर उमरिया की जन सुनवाई में करते हुए अतिक्रमित गौशाला को मुक्त कराने का आवेदन पत्र दिया गया है। इस बात की शिकायत जन कल्याण शिविर करकेली में भी करते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अम्बिकेश प्रताप से की गयी है, यद्यपि इस मामले में प्रशासन ने  फिलहाल अब तक कोई जांच कार्यवाही  नहीं की  है। 

विदित होवे की उमरिया जिले में जब से नवागत कलेक्टर श्री मती राखी सहाय जी पद भार ग्रहण की है, तब से लोगों को खानापूर्ति से ऊपर उठकर लाभ मिलता आ रहा था, लेकिन इस मामले में जांच अधिकारियों के कारण सही न्याय मिलने  में और कितना वक्त लगेगा कह पाना कठिन है।

शासकीय गौशाला मंदिर को दिया जा  सकता है? 

शासकीय धन राशि व्यय कर निर्मित किसी भी गौशाला को किसी भी मंदिर प्रबंध समिति,किसी टस्ट या  धर्मावलंबियों  को नहीं दिया जा सकता , संविधान का अनुछेद 27 में स्पष्ट प्रावधान है की राज्य शासकीय धन राशि को ऐसे किसी भी धर्म स्थल को शासकीय परिसंपत्तियों को नहीं दे सकती, जिसमें शासकीय धन राशि का उपयोग किया गया है।

ज्वाला धाम का शुरू से कब्जा 

ग्राम पंचायत निपनिया में गौशाला की स्वीकृति होने के बाद भले ही  शासकीय रिकार्ड में निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत निपनिया को बतलाया गया हो, लेकिन इसके पूरे  निर्माण कार्य में ज्वाला धाम के कतिपय कर्ण धारों ने ही चांदी काटी है । निर्माण कार्य से ही ज्वाला धाम ने अतिक्रमण करते हुए आज भी अपने कब्जे में लेकर ज्वाला धाम की गौशाला की गायों को रखने का काम करती आ रही है। इस गौशाला में ग्राम पंचायत निपनिया का अधिपत्य न होकर ज्वाला धाम का ही अधिपत्य बना हुआ है, जो सरासर नियमों का उल्लंघन है, फिर भी इसको देखने, सुनने वाला कोई नहीं है।

इस गौशाला को दिखा कर वसूला चंदा 

विदित होवे की शासकीय गौशाला जो मध्यप्रदेश शासन व्दारा निपनिया में बनाया जा रहा था, चूंकि इसके निर्माण से ही ज्वाला धाम समिति कब्जा कर रखी थी, जिस वजह से इस गौशाला के नाम पर दान दाताओं से भी जमकर वसूली की जाने की बातें बतायी जा रही हैं। बताया जाता है कि गौशाला परिसर ज्वाला धाम से साफ तौर पर दिखाई दे रहा था, जिसको दिखाकर चंदा एकत्रित करने का गोरख धंधा भी खूब चला। हलांकि इसके कोई कागजी प्रमाण नहीं है, फिर भी धुंआ वही उठता है जहाँ आग होती है।

पहले से पंचायत की संपत्ति हडपने के आरोप 

मालुम होवे की ज्वाला धाम की प्रबंध समिति में पहले से ही उंचेहरा ग्राम पंचायत की परिस्थितियों को हडपने और उन्हें व्यवसायिक उपयोग करने के आरोप लगे हैं, जो की वास्तविक और हकीकत में दिखाई दे रहे हैं, फिर भी न जिला प्रशासन और ना ही ग्राम पंचायत कभी भी इस ओर आवश्यक कार्यवाही की है, इसी से बढे मंसूबों ने निपनिया ग्राम पंचायत की गौशाला को भी अपने गिरफ्त में ले रखा है । मामला जिले की कलेक्टर के संज्ञान में है अब इस गंभीर मसले में क्या कदम उठाती है जिस पर सबकी नजरें लगी हुई है।


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