रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
अनूपपुर। मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन के चावल परिवहन कार्य में बड़े पैमाने पर ओवरलोडिंग और नियमों की अनदेखी का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। जिले के विभिन्न वेयरहाउसों से रेलवे रैक प्वाइंट तक चावल पहुंचाने के लिए संचालित ट्रकों में क्षमता से अधिक माल लादे जाने की शिकायतों के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है। हालांकि 42 ट्रकों में अनियमितता के आरोपों के बीच केवल चार वाहनों पर हुई कार्रवाई ने पूरे मामले को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है।
सूत्रों के अनुसार 17 जून को जिले के चार अलग-अलग वेयरहाउसों से कुल 42 ट्रकों के माध्यम से चावल का परिवहन किया गया था। आरोप है कि अधिकांश वाहनों में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक चावल लादा गया था, जिससे परिवहन नियमों का खुला उल्लंघन हुआ। शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कोतवाली एवं यातायात पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच और चेकिंग अभियान चलाया।
दो ट्रक कोतवाली पुलिस की पकड़ में
कोतवाली थाना प्रभारी के नेतृत्व में की गई कार्रवाई के दौरान ट्रक क्रमांक एमपी-20 एचबी-5660 एवं एचपी-38 जे-4533 को ओवरलोड चावल परिवहन करते हुए पकड़ा गया। दोनों वाहनों को थाना परिसर लाकर तौल और दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें ओवरलोडिंग तथा परमिट शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि हुई।
पुलिस ने दोनों वाहनों के चालकों राजेश यादव निवासी चंदिया एवं दीपेश यादव निवासी ग्राम पोड़ी कला, थाना ब्यौहारी के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम की धारा 113/194(1) एवं 66/192(ए) के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की।
यातायात पुलिस ने भी की कार्रवाई
इसी क्रम में यातायात पुलिस ने अलग अभियान चलाकर दो अन्य ओवरलोड ट्रकों को पकड़ते हुए लगभग 41 हजार रुपये का जुर्माना वसूला। प्रशासन की इस कार्रवाई को प्रारंभिक कदम माना जा रहा है, लेकिन इससे कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े हो गए हैं।
42 में से सिर्फ 4 पर कार्रवाई क्यों?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि 42 ट्रकों में ओवरलोडिंग की शिकायत थी, तो कार्रवाई केवल चार वाहनों तक ही सीमित क्यों रही? क्या शेष वाहनों की जांच नहीं हुई या फिर वे जांच के दायरे से बाहर रह गए? इसको लेकर परिवहन व्यवस्था और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्र बताते हैं कि जांच के दौरान कुछ चालक अपने वाहन छोड़कर मौके से चले गए, जिससे तत्काल कार्रवाई प्रभावित हुई। वहीं यह भी चर्चा है कि शिकायत सामने आने और पुलिस की सख्ती बढ़ने के बाद परिवहनकर्ताओं ने अगले ही दिन अपनी रणनीति बदल ली।
कार्रवाई के बाद बदली लोडिंग व्यवस्था
बताया जा रहा है कि 18 जून को वेयरहाउसों से होने वाली चावल लोडिंग में स्पष्ट बदलाव देखने को मिला। जिन वाहनों में पहले क्षमता से अधिक माल भरा जा रहा था, उनमें कार्रवाई के बाद निर्धारित सीमा से कम माल लादा जाने लगा। इससे यह संकेत मिलता है कि ओवरलोडिंग की शिकायतों और पुलिस कार्रवाई का असर सीधे परिवहन व्यवस्था पर पड़ा है।
सड़क सुरक्षा और राजस्व दोनों पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार ओवरलोड वाहन सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ाने के साथ-साथ सड़कों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा यह परिवहन नियमों, कर व्यवस्था और शासन के राजस्व हितों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। रेलवे रैक प्वाइंट तक प्रतिदिन बड़ी मात्रा में चावल पहुंचाने के लिए दर्जनों ट्रकों का संचालन किया जा रहा है, ऐसे में नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अब व्यापक जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद यह मांग तेज हो गई है कि केवल चालानी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय पूरे परिवहन तंत्र की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाए। यदि वास्तव में बड़ी संख्या में वाहन ओवरलोड पाए गए हैं, तो परिवहनकर्ता, लोडिंग एजेंसियां और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि यह मामला कुछ ट्रकों पर हुई कार्रवाई तक सीमित रहता है या फिर पूरे नेटवर्क की परतें खोलते हुए जिम्मेदार लोगों तक जवाबदेही तय की जाती है।


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