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AIMIM शहडोल ने UCC के विरोध में राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

 




रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
शहडोल । ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) जिला शहडोल इकाई ने प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के विरोध में सोमवार को माननीय राज्यपाल महोदय के नाम कलेक्टर शहडोल को ज्ञापन सौंपकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन AIMIM के सदस्यता अभियान प्रभारी यासीन खान के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों द्वारा सौंपा गया।

ज्ञापन में कहा गया कि भारत की पहचान उसकी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता से है। संविधान देश के सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में यूनिफॉर्म सिविल कोड के नाम पर विभिन्न समुदायों की अलग-अलग परंपराओं और रीति-रिवाजों को एक समान कानूनी ढांचे में बांधने का प्रयास संविधान की मूल भावना और देश की बहुलतावादी संस्कृति के विपरीत प्रतीत होता है।

AIMIM पदाधिकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि वर्तमान समय में देश और प्रदेश बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं की सुरक्षा तथा युवाओं के भविष्य जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है। ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे को आगे बढ़ाना जनता के मूलभूत प्रश्नों से ध्यान भटकाने का प्रयास प्रतीत होता है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि UCC केवल किसी एक समुदाय से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि देश के सभी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक समूहों के अधिकारों और पहचान से संबंधित मुद्दा है। संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 29 एवं 30 नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक संरक्षण का अधिकार प्रदान करते हैं। इसलिए बिना व्यापक जनसंवाद, सर्वसम्मति और सभी हितधारकों से विचार-विमर्श किए किसी भी प्रकार का UCC लागू करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं होगा।

AIMIM शहडोल ने राज्यपाल महोदय से आग्रह किया कि प्रदेश की जनता, विशेषकर अल्पसंख्यकों, आदिवासियों, दलितों एवं अन्य वंचित वर्गों की भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को इस विषय पर पुनर्विचार करने हेतु निर्देशित किया जाए तथा व्यापक सहमति के बिना UCC लागू करने की किसी भी प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए।

इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने संविधान की सर्वोच्चता, धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय एवं देश की गंगा-जमुनी तहजीब की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। AIMIM नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में सभी वर्गों की राय और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।




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