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रेलवे निर्माण घोटाले की खबर पर जांच शुरू,अब जांच दल की निष्पक्षता पर उठे सवाल

 


रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी

 *उमरिया।* दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर मंडल के अंतर्गत कटनी–बिलासपुर मुख्य रेलखंड के


*बंधवावारा–घुनघुटी सेक्शन (किमी 922 से 924) के बीच करोड़ों रुपये* की लागत से कराए जा रहे नाली निर्माण एवं सेस रिपेयर कार्यों में कथित घटिया निर्माण, निम्न गुणवत्ता की सामग्री के उपयोग तथा वित्तीय अनियमितताओं को लेकर समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित खबरों के बाद रेलवे प्रशासन ने विजिलेंस जांच प्रारंभ कर दी है। किंतु  जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर अभी से गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों  से मिली जानकारी के अनुसार  जांच के लिए पहुंचे रेलवे विजिलेंस निरीक्षक ने जांच स्थल की जांच के पहले ही  उन  संबंधित अधिकारियों के संपर्क में रहकर जांच कर रहे हैं,जो इस गुणवत्ता के लिए दोषी माने जा रहे हैं, जिसको लेकर  स्थानीय नागरिकों एवं रेल कर्मचारियों के बीच जांच की पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों में लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच पूर्णतः स्वतंत्र और निष्पक्ष होनी चाहिए।

स्थानीय नागरिकों एवं रेल कर्मचारियों के बीच दबे स्वर में यह चर्चा भी है कि जांच दल प्रारंभ से ही संबंधित अधिकारियों के प्रभाव में कार्य कर रहा है। उनका कहना है कि यदि जांच वास्तव में निष्पक्ष एवं प्रभावी होती, तो मंडल में करोड़ों रुपये की लागत वाले निर्माण कार्यों में इतनी गंभीर वित्तीय अनियमितताएं एवं रेल संरक्षा से जुड़े कथित मामले लगातार सामने नहीं आते। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन चर्चाओं ने जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

जानकारों का कहना है कि *रेलवे विजिलेंस निरीक्षक मूल रूप से रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (SSE) संवर्ग के अधिकारी होते हैं,* जिन्हें सीमित अवधि के लिए विजिलेंस विभाग में प्रतिनियुक्त किया जाता है। निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद वे पुनः मंडल में लौटकर इंजीनियरिंग विभाग में कार्य करते हैं तथा सहायक मंडल अभियंता (ADEN) एवं वरिष्ठ मंडल अभियंता (Sr. DEN) के प्रशासनिक नियंत्रण में अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसी व्यवस्था में, जब जांच उन्हीं अधिकारियों या उसी प्रशासनिक तंत्र से जुड़े मामलों की हो, तो *हितों के टकराव (Conflict of Interest)* की आशंका को लेकर प्रश्न उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।

इसी आधार पर *स्थानीय नागरिकों एवं जागरूक मीडिया ने मांग की है कि इस मामले की जांच बिलासपुर मंडल की स्थानीय विजिलेंस टीम के स्थान पर किसी अन्य जोनल रेलवे की विजिलेंस टीम अथवा रेलवे बोर्ड विजिलेंस* से कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे तथा वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।

लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये के रेलवे निर्माण कार्यों में लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच भी पूर्णतः स्वतंत्र एजेंसी से नहीं कराई गई, तो जनता का विश्वास प्रभावित होगा और रेल संरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न अनुत्तरित रह जाएंगे।

*स्थानीय नागरिकों ने रेलवे बोर्ड एवं रेल मंत्रालय से मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय विजिलेंस एवं तकनीकी समिति से कराई जाए तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, जिससे दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों एवं संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।*


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