रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
साधु-संतों, नागरिकों और हिंदी प्रेमियों ने जताई नाराजगी, तत्काल सुधार की मांग
अमरकंटक। मां नर्मदा की पावन उद्गम स्थली और देश-विदेश में प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन नगरी अमरकंटक में सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए साइन बोर्डों में हिंदी भाषा की गंभीर अशुद्धियां सामने आने के बाद भाषा की गरिमा और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नगर के विभिन्न स्थानों पर लगे सूचना एवं सांकेतिक बोर्डों पर “प्रशाद” और “विकाश” जैसे गलत शब्द लिखे गए हैं, जबकि इनके शुद्ध रूप “प्रसाद” और “विकास” हैं।
इन त्रुटियों को लेकर स्थानीय नागरिकों, साधु-संतों और हिंदी प्रेमियों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि अमरकंटक जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थल पर लगाए जाने वाले सार्वजनिक सूचना बोर्ड केवल दिशा-निर्देशन का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे नगर की पहचान, संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में उनमें भाषा संबंधी अशुद्धियां होना गंभीर विषय है।
लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच गलत संदेश
अमरकंटक में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और देश-विदेश से आने वाले आगंतुक पहुंचते हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित गलत वर्तनी वाले शब्द नगर की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। नागरिकों का कहना है कि जब धार्मिक एवं पर्यटन नगरी की पहचान ही भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ी हो, तब सार्वजनिक बोर्डों पर शुद्ध और मानक हिंदी का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।
जिम्मेदार एजेंसी की तय हो जवाबदेही
स्थानीय लोगों के अनुसार संबंधित साइन बोर्ड लंबे समय से लगे हुए हैं, लेकिन अब तक इनकी भाषा संबंधी त्रुटियों को दूर करने की दिशा में प्रभावी पहल नजर नहीं आई है। नागरिकों ने मांग की है कि इन बोर्डों का निर्माण, लेखन और स्थापना कराने वाले संबंधित विभाग, एजेंसी अथवा ठेकेदार की जिम्मेदारी तय की जाए और सभी अशुद्धियों को तत्काल सुधारा जाए।
धार्मिक नगरी की गरिमा से जुड़ा विषय
साधु-संतों और प्रबुद्धजनों का कहना है कि अमरकंटक महज एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि मां नर्मदा की उद्गम स्थली होने के कारण करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है। यहां की हर व्यवस्था में स्थानीय संस्कृति, परंपरा और भारतीय भाषाई मूल्यों की झलक दिखाई देनी चाहिए। सार्वजनिक सूचना पट्टों पर शुद्ध हिंदी का प्रयोग इसी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा
नागरिकों ने नगर परिषद एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से आग्रह किया है कि अमरकंटक के सभी सार्वजनिक साइन बोर्डों का निरीक्षण कराया जाए और जहां कहीं भी वर्तनी अथवा भाषा संबंधी त्रुटियां हैं, उन्हें तत्काल दुरुस्त कराया जाए। साथ ही भविष्य में लगाए जाने वाले सभी बोर्डों की सामग्री को प्रदर्शित करने से पहले भाषा विशेषज्ञ अथवा सक्षम अधिकारी से जांच कराने की व्यवस्था की जाए।
लोगों का कहना है कि अमरकंटक की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण उसकी भाषाई गरिमा भी है। इसलिए छोटी दिखने वाली इन गलतियों को नजरअंदाज करने के बजाय प्रशासन को इन्हें गंभीरता से लेते हुए शीघ्र सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।



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