Ticker

6/recent/ticker-posts

बंद खदानें बनीं मौत का जाल, अवैध कोयला उत्खनन पर उठे गंभीर सवाल

 



रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
पहले भी जा चुकी हैं कई जानें, फिर भी जारी है अवैध उत्खनन — क्या बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा कॉलरी प्रबंधन?

राजनगर/अनूपपुर। अनूपपुर जिले के कोयलांचल क्षेत्र में बंद पड़ी खदानें एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में हैं। राजनगर क्षेत्र में बंद खदानों और कोल साइडिंग के आसपास कथित तौर पर लंबे समय से अवैध कोयला उत्खनन जारी होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन स्थानों पर पहले भी अवैध उत्खनन के दौरान हादसे हो चुके हैं और लोगों की जान जा चुकी है, उन्हीं इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

राजनगर क्षेत्र के भलमुड़ी, न्यू राजनगर साइडिंग और डोला सहित आसपास के क्षेत्रों में अवैध कोयला उत्खनन के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंद पड़ी खदानों के आसपास जमीन के भीतर गहरी सुरंगें बना दी गई हैं, जिनमें गरीब मजदूर जान जोखिम में डालकर कोयला निकालने के लिए उतरते हैं। आर्थिक मजबूरी में मामूली मजदूरी के लिए काम करने वाले इन मजदूरों के सामने हर समय सुरंग धंसने और गंभीर हादसे का खतरा बना रहता है।

बरसात में बढ़ा खतरा

वर्तमान में बारिश का मौसम होने के कारण इन अवैध सुरंगों में खतरा और बढ़ गया है। लगातार बारिश से जमीन कमजोर होने के कारण सुरंगों के धंसने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में यदि समय रहते इन स्थानों को चिह्नित कर बंद नहीं किया गया तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कुछ कथित बिचौलियों और अवैध उत्खनन से जुड़े लोगों द्वारा गरीब मजदूरों को आगे कर कोयला निकलवाया जा रहा है। मजदूरों की जान जोखिम में डालकर होने वाले इस कथित कारोबार में मुनाफा किसी और का और खतरा मजदूरों का है। किसी दुर्घटना की स्थिति में इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है, जिनकी आजीविका इन मजदूरों की कमाई पर निर्भर है।

पहले हादसे, फिर भी सबक नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब क्षेत्र में पहले भी अवैध कोयला उत्खनन के दौरान मौतें हो चुकी हैं, तो फिर बंद खदानों और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं? क्या खदानों की निगरानी, संवेदनशील स्थानों की घेराबंदी और अवैध सुरंगों को बंद करने की व्यवस्था पर्याप्त है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक निगरानी करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि बंद खदानों और कोल साइडिंग के आसपास नियमित निगरानी की जाए तथा जहां अवैध सुरंगें बनाई गई हैं, उन्हें सुरक्षित तरीके से बंद किया जाए।

प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास

मामले में राजनगर खुली खदान परियोजना के उप क्षेत्रीय प्रबंधक धर्मेंद्र कुमार रघुवंशी से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, पुलिस और एसईसीएल प्रबंधन से मांग की है कि बंद खदानों एवं अवैध उत्खनन वाले क्षेत्रों का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। खतरनाक सुरंगों को सुरक्षित तरीके से बंद कराने के साथ-साथ वहां चेतावनी बोर्ड, घेराबंदी और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए। साथ ही अवैध उत्खनन के पीछे सक्रिय लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

सवाल सिर्फ अवैध कोयला उत्खनन का नहीं, बल्कि उन जिंदगियों का है जो चंद रुपयों की मजबूरी में मौत के मुहाने तक पहुंच रही हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार एजेंसियां किसी अगली दुर्घटना का इंतजार करती हैं या उससे पहले ही इन मौत के मुहानों को बंद करने के लिए ठोस कदम उठाती हैं।


Post a Comment

0 Comments