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हाईकोर्ट सख्त: शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने के निर्देश, सड़क निर्माण का रास्ता साफ करने प्रशासन को आदेश

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
जैतहरी/अनूपपुर। जैतहरी नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 7 में शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, मुख्य पीठ जबलपुर ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने प्रशासन को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में नगर परिषद को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने तथा सार्वजनिक सड़क निर्माण समेत अन्य जनहित के विकास कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने के निर्देश दिए हैं।

यह महत्वपूर्ण आदेश WP-34043-2025, कैलाश सिंह मरावी बनाम मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य प्रकरण में पारित किया गया। न्यायालय ने 27 जुलाई 2026 को आदेश जारी किया था, जिसके बाद 12 अगस्त 2026 को खसरा नंबर 676 से संबंधित टाइपिंग त्रुटि में आवश्यक सुधार भी किया गया।

अतिक्रमण के कारण वर्षों से अटका सड़क निर्माण

याचिका में बताया गया था कि जैतहरी नगर के वार्ड क्रमांक 7 में शासकीय भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माण कर अतिक्रमण किया गया है। इसके चलते नगर परिषद द्वारा प्रस्तावित सार्वजनिक सड़क का निर्माण लंबे समय से बाधित है। सड़क निर्माण के लिए नगर परिषद द्वारा दो बार निविदा प्रक्रिया पूरी किए जाने के बावजूद मौके पर मौजूद कथित अतिक्रमण के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष यह भी बताया गया कि नगर परिषद जैतहरी के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा वर्ष 2024 में संबंधित पक्षों को अतिक्रमण हटाने के नोटिस जारी किए गए थे। इसके साथ ही भूमि का सीमांकन कराने के लिए कलेक्टर एवं तहसीलदार से भी आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया था।

सीमांकन और प्रशासनिक सहयोग पर जोर

याचिका में यह भी सामने आया कि संबंधित भूमि के सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई इसलिए आवश्यक है, ताकि क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति एवं अन्य मूलभूत विकास कार्यों को गति दी जा सके।

उच्च न्यायालय ने संबंधित राजस्व एवं प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में नगर परिषद को पूर्ण प्रशासनिक एवं लॉजिस्टिक सहयोग प्रदान किया जाए। न्यायालय ने कानून-व्यवस्था की संभावित स्थिति को भी गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया कि कार्रवाई के दौरान आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए।

अतिक्रमण हटते ही विकास कार्य शुरू करने के निर्देश

न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी होने के बाद नगर परिषद को सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था तथा अन्य जनहित से जुड़े विकास कार्यों को बिना अनावश्यक विलंब के प्राथमिकता के साथ पूरा करना होगा।

लंबे समय से लंबित कार्यों को मिलेगी गति

हाईकोर्ट के इस आदेश को जैतहरी नगर के वार्ड क्रमांक 7 के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कथित अतिक्रमण हटता है, तो लंबे समय से बाधित सड़क निर्माण सहित क्षेत्र की अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। न्यायालय के निर्देशों से अब प्रशासन, राजस्व विभाग, पुलिस और नगर परिषद के बीच समन्वित कार्रवाई का रास्ता भी स्पष्ट हो गया है।

फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्थानीय प्रशासन के समक्ष मुख्य चुनौती न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप समयबद्ध कार्रवाई करते हुए शासकीय भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराना और उसके बाद प्रस्तावित जनहितकारी विकास कार्यों को धरातल पर उतारना है।


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