रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
अनूपपुर जीआरपी चौकी में भारी बल की कमी, अपराध नियंत्रण से लेकर यात्रियों की सुरक्षा तक पर बढ़ी चुनौती — स्वीकृत पदों के अनुरूप पुलिस बल बढ़ाने की उठी मांग
अनूपपुर। अनूपपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन स्थित जीआरपी चौकी में स्वीकृत पुलिस बल के मुकाबले बेहद कम कर्मचारियों की पदस्थापना अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। चौकी के लिए जहां कुल 18 पद स्वीकृत हैं, वहीं वर्तमान में महज 4 कर्मचारी ही पदस्थ बताए जा रहे हैं। यानी करीब 78 प्रतिशत पद खाली हैं और इतने बड़े क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था चार कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रही है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चौकी के कार्यक्षेत्र में लगभग 12 रेलवे स्टेशन आते हैं। इन स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा, अपराध की रोकथाम, गश्त, शिकायतों पर कार्रवाई, अपराध पंजीबद्ध करने, विवेचना और कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां इसी सीमित बल पर हैं।
18 पद स्वीकृत, चार ही कर्मचारी पदस्थ
उपलब्ध जानकारी के अनुसार अनूपपुर जीआरपी चौकी में एक चौकी प्रभारी, एक एएसआई, चार प्रधान आरक्षक और 12 आरक्षक सहित कुल 18 पद स्वीकृत हैं।
इनमें वर्तमान में एक चौकी प्रभारी और एक एएसआई पदस्थ हैं, जबकि चार स्वीकृत प्रधान आरक्षक पदों में एक भी प्रधान आरक्षक पदस्थ नहीं है। वहीं 12 स्वीकृत आरक्षक पदों के मुकाबले केवल दो आरक्षक ही कार्यरत बताए जा रहे हैं।
इस प्रकार 18 स्वीकृत पदों के मुकाबले महज चार कर्मचारियों की उपलब्धता चौकी की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
12 रेलवे स्टेशनों का जिम्मा, बल सिर्फ चार
अनूपपुर जीआरपी चौकी का दायरा केवल अनूपपुर रेलवे स्टेशन तक सीमित नहीं है। चौकी के कार्यक्षेत्र में बिजुरी, कोतमा, हरद, मौहरी, वेंकटनगर, छुलहा, जैतहरी, निगौरा, धुरवासिन, बैहाटोला, अनूपपुर तथा अमलाई सहित विस्तृत रेलवे क्षेत्र शामिल बताया जाता है।
एक ओर यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सीमा से जुड़ा है, तो दूसरी ओर शहडोल जिले की सीमा तक फैला हुआ है। ऐसे व्यापक क्षेत्र में अपराध की रोकथाम और यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल की आवश्यकता स्वाभाविक है।
लेकिन मौजूदा स्थिति में महज चार कर्मचारियों को ही इतने बड़े क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
चोरी, मारपीट से लेकर गंभीर अपराधों तक की जिम्मेदारी
रेलवे क्षेत्र में यात्रियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है। चोरी, लूट, मारपीट, महिला एवं यात्री सुरक्षा से जुड़े मामले, दुर्घटनाएं, संदिग्ध गतिविधियां तथा अन्य रेल अपराधों की सूचना मिलने पर जीआरपी को तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करनी होती है।
इसके अलावा अपराध पंजीबद्ध करना, घटनास्थल की जांच, आरोपियों की तलाश, विवेचना और न्यायालयीन प्रक्रिया से जुड़े कार्य भी पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी में आते हैं।
ऐसे में यदि एक ही समय में अलग-अलग स्टेशनों पर कोई गंभीर घटना सामने आती है, तो सीमित बल के कारण तत्काल पुलिस सहायता पहुंचाना बड़ी चुनौती बन सकता है।
क्या चार कर्मचारियों के भरोसे संभव है प्रभावी अपराध नियंत्रण?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 18 स्वीकृत पदों में से केवल चार कर्मचारी उपलब्ध हों, तो इतने विस्तृत रेलवे क्षेत्र में नियमित गश्त, अपराध की रोकथाम, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और घटनास्थल पर समय पर पहुंचना किस हद तक संभव है?
बल की कमी का असर केवल पुलिसकर्मियों के कार्यभार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा संबंध यात्रियों की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण की प्रभावशीलता से भी जुड़ा है।
रेलवे स्टेशन ऐसे स्थान हैं जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर की कमी को सामान्य प्रशासनिक समस्या मानकर नजरअंदाज करना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं होगा।
एसपी जीआरपी जबलपुर से बल बढ़ाने की मांग
अनूपपुर जीआरपी चौकी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर अब एसपी जीआरपी जबलपुर सहित वरिष्ठ रेलवे पुलिस अधिकारियों से तत्काल अतिरिक्त बल उपलब्ध कराने की मांग उठने लगी है।
मांग है कि चौकी में स्वीकृत पदों के अनुरूप पर्याप्त संख्या में प्रधान आरक्षक और आरक्षकों की पदस्थापना की जाए, ताकि लंबे समय से चली आ रही बल की कमी को दूर किया जा सके और रेलवे क्षेत्र में अपराध नियंत्रण एवं यात्रियों की सुरक्षा को प्रभावी बनाया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था को महज औपचारिकता बनने से रोकना जरूरी
18 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल चार कर्मचारियों के भरोसे करीब 12 रेलवे स्टेशनों और विस्तृत रेलवे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था संचालित होना निश्चित रूप से गंभीर विषय है।
यात्रियों की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए पर्याप्त पुलिस बल आवश्यक है। अब निगाहें जीआरपी के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं कि वे अनूपपुर चौकी की इस कमी को कब तक दूर करते हैं और यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।


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