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शहडोल वन विभाग में कथित फर्जीवाड़े से हड़कंप!

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
दो अलग-अलग केसों में एक ही वाहन को लेकर कार्रवाई का आरोप, RTI में दस्तावेज नहीं मिलने से उठे सवाल

पीड़ित बुजेश मिश्रा ने CCF, DFO और कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग की

शहडोल। दक्षिण वन मंडल शहडोल के बुढ़ार वन परिक्षेत्र में विभागीय कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। धनपुरी निवासी बुजेश मिश्रा ने उप वनमंडलाधिकारी (SDO) जैतपुर को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि वन विभाग के अधिकारियों ने दो अलग-अलग प्रकरण तैयार कर एक ही वाहन से जुड़े मामले में कार्रवाई की, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

23 और 24 सितंबर की कार्रवाई बनी सवालों के घेरे में

शिकायत के अनुसार, 23 सितंबर 2024 को बेम्हौरी बीट की गाड़ी क्रमांक 837 से संबंधित जानकारी भेजी गई थी। इसके बाद 24 सितंबर 2024 को बुढ़ार न्यायालय में R.F. 837 के राजसात का प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाने का दावा किया गया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद की कार्रवाई में MP 18-1350 तथा ट्रॉली क्रमांक MP 18-7088 को वाहन क्रमांक 833 से जोड़कर अवैध उत्खनन का मामला बनाया गया और राजसात की कार्रवाई की गई।

RTI में मांगे दस्तावेज, नहीं मिलने का आरोप

मामले में सबसे गंभीर सवाल RTI के तहत मांगे गए दस्तावेजों को लेकर उठाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने प्रकरण से संबंधित वाहन रिकॉर्ड, नजरी नक्शा और जब्ती नामा सहित दस्तावेज मांगे, लेकिन शिकायत के मुताबिक उन्हें अब तक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।

शिकायतकर्ता ने मांगी उच्चस्तरीय जांच

बुजेश मिश्रा ने पूरे मामले की प्रतिलिपि मुख्य वन संरक्षक (CCF) शहडोल, दक्षिण वन मंडल अधिकारी (DFO) शहडोल और कलेक्टर शहडोल को भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि एक ही घटना अथवा वाहन से संबंधित मामलों में अलग-अलग केस बनाए गए हैं, तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए तथा संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

अब जांच से खुलेगा सच

पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी होना बाकी है। इसलिए यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि दोनों प्रकरणों में दर्ज वाहन, जब्ती और राजसात की कार्रवाई का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है और RTI में मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध क्यों नहीं कराए गए।

इन सवालों के जवाब विभागीय जांच और मूल रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।


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