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ऊरा में नल-जल योजना बनी सफेद हाथी, चार माह से बंद पानी की सप्लाई

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
लाखों की लागत से बनी पानी की टंकी बनी शोपीस, जल जीवन मिशन के दावों पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

अनूपपुर। बदरा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत ऊरा में जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई नल-जल योजना अब ग्रामीणों के लिए महज एक सफेद हाथी बनकर रह गई है। गांव में पानी की टंकी खड़ी है, पाइपलाइन बिछी है और नल भी लगाए गए हैं, लेकिन इन तमाम इंतजामों के बावजूद ग्रामीणों के घरों तक नियमित पेयजल नहीं पहुंच रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब चार माह से नल-जल योजना पूरी तरह बंद पड़ी है।

शुरुआत के बाद ही व्यवस्था ने तोड़ा दम

ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन-चार वर्ष पहले पानी की टंकी का निर्माण पूरा होने के बाद नल-जल योजना के माध्यम से जलापूर्ति शुरू की गई थी। शुरुआत में लगभग एक माह तक ग्रामीणों को नलों से पानी मिला, लेकिन इसके बाद व्यवस्था धीरे-धीरे पटरी से उतर गई। पाइपलाइन बिछाए जाने के बावजूद गांव के कई हिस्सों में नियमित पानी नहीं पहुंच सका।

स्थिति यह है कि जिस योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनके घर पर ही शुद्ध और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना था, वही योजना अब जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते सवालों के घेरे में है।

कभी बिजली तो कभी तकनीकी खराबी का बहाना

ग्रामीणों का कहना है कि जलापूर्ति बंद होने के बाद समस्या के समाधान के बजाय अलग-अलग कारण बताए जाते रहे। कभी बिजली की समस्या, तो कभी तकनीकी खराबी का हवाला देकर जिम्मेदारी टाल दी जाती है। पंचायत स्तर पर कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो सका।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि योजना में तकनीकी खराबी है तो उसे दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी किसकी है और यदि बिजली की समस्या है तो उसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा—इन सवालों का जवाब ग्रामीणों को आज तक नहीं मिला है।

टंकी खड़ी, लेकिन नलों में पानी का इंतजार

ग्राम पंचायत सदस्य धनीराम पांच ने बताया कि करीब तीन-चार वर्ष पहले पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था, लेकिन वर्तमान में यह योजना ग्रामीणों के लिए उपयोगी साबित नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब चार माह से जलापूर्ति बंद है।

वहीं ग्रामीण तुलसीदास ने बताया कि बारिश के मौसम में भी गांव में पेयजल संकट बना हुआ है। योजना के तहत टंकी और पाइपलाइन तैयार होने के बावजूद ग्रामीणों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

जल जीवन मिशन के दावों पर सवाल

जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से नियमित पेयजल पहुंचाना है। ऐसे में ऊरा गांव की स्थिति योजना के क्रियान्वयन और उसके रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के बाद योजना को चालू रखना और उसकी नियमित निगरानी करना भी उतना ही जरूरी है, जितना उसका निर्माण कराना।

ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग योजना की तकनीकी और जमीनी स्तर पर जांच कराए तथा यह स्पष्ट करे कि आखिर चार माह से जलापूर्ति बंद रहने की वास्तविक वजह क्या है और इसे दुरुस्त करने में देरी क्यों हो रही है।

जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत से लेकर संबंधित अधिकारियों तक समस्या की जानकारी दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही नल-जल योजना को चालू कर घर-घर पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।

अब सवाल यह है कि वर्षों पहले तैयार की गई नल-जल योजना आखिर कब तक टंकी और पाइपलाइन के रूप में शोपीस बनी रहेगी? ग्रामीणों को सरकारी दावों की नहीं, बल्कि नल खोलने पर पानी की जरूरत है। जिम्मेदार विभाग के सामने चुनौती है कि वह कागजों में संचालित योजना को धरातल पर उतारकर वास्तव में ऊरा के ग्रामीणों के घरों तक पानी पहुंचाए।





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