रिपोर्ट @मुर्तुजा अंसारी
52 सीटर बसों में 100 से अधिक छात्र होने का दावा, सीट तो दूर पैर रखने तक की जगह नहीं; जरा सी चूक बन सकती है बड़े हादसे की वजह
शहडोल। पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय से सामने आई तस्वीरों ने विश्वविद्यालय की परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल तस्वीरों में बसों में क्षमता से अधिक छात्र-छात्राओं के सवार होने की स्थिति दिखाई दे रही है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि कई विद्यार्थी बस के पायदान और गेट के आसपास लटककर सफर करने को मजबूर हैं। यह स्थिति किसी भी समय गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
10 हजार विद्यार्थियों के लिए सिर्फ 6 बसें
बताया जा रहा है कि
विश्वविद्यालय में दूर-दराज के क्षेत्रों से करीब 10 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ने पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या के मुकाबले विश्वविद्यालय की परिवहन व्यवस्था में महज 6 बसें उपलब्ध हैं। बसों के दिन में दो-दो चक्कर लगाने के बावजूद विद्यार्थियों की संख्या के सामने व्यवस्था नाकाफी साबित होती नजर आ रही है।
52 सीटर बस में 100 से ज्यादा छात्र होने की चर्चा
छात्रों के अनुसार, कई बार एक बस में उसकी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक विद्यार्थी सवार हो जाते हैं। बैठने की जगह नहीं मिलने पर छात्र खड़े होकर और कुछ विद्यार्थी दरवाजे व पायदान के आसपास लटककर यात्रा करते दिखाई देते हैं। तेज रफ्तार, अचानक ब्रेक या सड़क पर किसी अप्रत्याशित स्थिति में संतुलन बिगड़ने से बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
जिम्मेदारों की निगरानी पर उठे सवाल
दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय की बस सेवा महत्वपूर्ण परिवहन साधन है। ऐसे में बसों की संख्या, फेरे बढ़ाने और ओवरलोडिंग रोकने को लेकर ठोस व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है। वायरल तस्वीरों ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आखिर विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
अब सवाल यही है कि क्या किसी हादसे के बाद व्यवस्था सुधरेगी या उससे पहले ही विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाएंगे?


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