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पंचायत भवन निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, अवैध रेत के इस्तेमाल के आरोप

 


रिपोर्ट @पंडित कृष्णा मिश्रा
बरगवां पंचायत में लाखों की लागत से चल रहे निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी, मौके पर जांच और गुणवत्ता परीक्षण की मांग


केशवाही। जनपद पंचायत बुढ़ार अंतर्गत ग्राम पंचायत बरगवां-18 में लाखों रुपये की लागत से निर्माणाधीन पंचायत भवन को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भवन निर्माण में निर्धारित मापदंडों के अनुरूप निर्माण सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है। साथ ही, निर्माण कार्य में कथित रूप से अवैध रूप से लाई गई रेत के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है।


ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत भवन एक महत्वपूर्ण शासकीय भवन है, जिसका उपयोग लंबे समय तक ग्रामीणों और पंचायत के विभिन्न कार्यों के लिए किया जाना है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में भवन की मजबूती और उपयोगिता पर असर डाल सकती है।

जिम्मेदारों की भूमिका पर भी उठे सवाल

निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने संबंधित इंजीनियर अनिल शुक्ला, पंचायत सचिव एवं सरपंच की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की नियमित तकनीकी निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण आवश्यक है। यदि बिना पर्याप्त जांच के निर्माण कार्य का भुगतान किया जाता है, तो शासकीय राशि के दुरुपयोग की आशंका उत्पन्न हो सकती है।

ग्रामीणों ने विशेष रूप से निर्माण में इस्तेमाल की जा रही रेत के स्रोत, गुणवत्ता और वैधता की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण स्थल पर पहुंचकर रेत सहित अन्य निर्माण सामग्री की वास्तविक स्थिति की जांच की जानी चाहिए।

मौके पर भौतिक जांच और सैंपलिंग की मांग

ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से निर्माण स्थल का भौतिक निरीक्षण कराने के साथ-साथ निर्माण सामग्री के नमूने लेकर उनकी तकनीकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही रेत के स्रोत और उसकी वैधता से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच किए जाने की मांग उठाई गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि मामले में केवल कागजी जांच अथवा औपचारिक निरीक्षण पर्याप्त नहीं होगा। निर्माण स्थल पर पहुंचकर तकनीकी अधिकारियों द्वारा मौके की स्थिति का परीक्षण किया जाए, ताकि निर्माण कार्य की वास्तविक गुणवत्ता सामने आ सके।

निष्पक्ष जांच के बाद कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत के अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी अनियमितता, निर्धारित मापदंडों की अनदेखी या रेत के संबंध में कोई अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच तथा संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आना बाकी है। जांच के बाद ही निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति और आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।

















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