रिपोर्ट @संतोष कुमार मिश्रा
बकेली में 3.69 लाख की पुलिया बनी भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला
बिरसिंहपुर पाली--- पंचायतों में पारदर्शिता के लिए पंचायत दर्पण पोर्टल बनाया गया है, ताकि एक-एक बिल जनता देख सके और उसकी निगरानी कर सके, लेकिन उमरिया जिले की ग्राम पंचायतों में शासन की इस मंशा पर पानी फेरने की जुगत भ्रष्टाचार के उस्तादों ने निकाल कर इस पोर्टल की फजीहत कर दी है। ऐसी दर्जनों ग्राम पंचायतों की विधिवत शिकायत कलेक्टर की जनसुनवाई तक में गूंजी, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। इसी जिले के पाली जनपद की भ्रष्टाचार की सिरमौर बनी ग्राम पंचायत बकेली ने इस पोर्टल को ही मजाक बना कर रख दिया है। यहां कई निर्माण कार्यों के बिल ही अपलोड ही नहीं किया गया। ग्राम पंचायत में एक पाइप पुलिया निर्माण जिसकी लागत 3.69 लाख दर्ज है, इस एक छोटी सी पुलिया के नाम पर 5 धुंधले बिल अपलोड कर दिए गए, जिनमें एक ही सीमेंट एक ही समय पर तीन अलग-अलग दरों पर क्रय की गई है, किसी बिल में सीमेंट कंपनी-ग्रेड तक नहीं लिखा, इसी तरह जमीन पर नाले की मिट्टी से पुलिया खड़ी कर दी गई। इससे साफ जाहिर है कि बकेली में नियम-कानून का राज नहीं, राशि खपाने के लिए मनमाफिक दर और मात्रा अंकित कर न सिर्फ अपने मनमर्जी का राज कायम कर रखा है, साथ ही शासकीय धनराशि को हथियाने का काम किया है।
15वें वित्त आयोग से ग्राम पंचायत बकेली में 3.69 लाख रुपये की पुलिया स्वीकृत हुई थी। इस एक पुलिया के लिए पंचायत ने 3 लोकल फर्मों के नाम से 5 बिल बनाकर 2,51,554 रुपये की सामग्री खरीदी दिखाई है, यानी कुल लागत का 68 प्रतिशत पैसा सिर्फ रेत, गिट्टी, सीमेंट के नाम पर आहरित कर लिया गया है, जो कि एक कागजी खेल से ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।
ग्राम पंचायत बकेली ने 09 जनवरी 2026 को बिल नं. 351, फर्म खेरमाता मटेरियल सप्लायर ने 50 बोरी सीमेंट 300 रुपये प्रति बोरी के दर से क्रय का बिल लगाया है, ठीक अगले दिन 10 जनवरी 2026 को बिल नं. 51, फर्म श्याम बाबा ट्रेडर्स ने 80 बोरी सीमेंट 250 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से खरीदी गई है। इन बिलों को देखने से आता है कि एक ही पंचायत, एक ही पुलिया, एक दिन का अंतर और 50 रुपये प्रति बोरी का अंतर। अगर बाजार में सीमेंट 250 की थी तो 300 में क्यों खरीदी? और 300 की थी तो 250 वाला बिल फर्जी कैसे बना? यह कोई छोटी गलती नहीं, सीधी वित्तीय अनियमितता है। इसी तरह 07 मार्च 2026 को बिल नं. 117, महेन्द्र प्रताप सिंह का 29,775 रुपये का बिल बिना सीमेंट के गिट्टी-रेत का है और 09 मार्च 2026 को बिल नं. 118 में 200 बोरी सीमेंट 270 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से 74,260 रुपये का बिल लगा दिया गया। दो दिन में एक ही फर्म की दर और मात्रा दोनों बदल गई।07 अप्रैल 2026 को बिल नं. 121 में फिर 110 बोरी सीमेंट 270 रुपये प्रति बोरी, 58,146 रुपये।
तीन महीने में तीन दरें - 250, 270, 300 रुपये। किसी भी बिल पर सीमेंट की कंपनी ए सी सी,अल्ट्राटेक, ग्रेड ओ पी सी 43/53, पी पी सी और आई एस आई मार्क का कोई जिक्र नहीं, सिर्फ "सीमेंट" लिखा है। जितनी राशि खपानी थी, उतनी मात्रा और उतनी दर लिख दी गई।
ग्रामीणों की तस्वीरों में पुलिया में सोन नदी की रेत की जगह नाले की लाल मिट्टी मिली रेत, साफ गिट्टी की जगह डस्ट भरी गिट्टी, न पॉलिथीन, न वाइब्रेटर।
3.69 लाख की पुलिया में 2.51 लाख की सामग्री कागजों पर लग गई तो मजदूरी, सरिया, सेंटरिंग कहां से आई? सवाल यही है कि क्या सामग्री लगी ही नहीं, सिर्फ राशि खप गई?
ग्रामीणों ने कलेक्टर उमरिया से मांग की है कि तारीखवार दरों के इस अंतर को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानकर बाजार के मूल्य से आंकलित करते हुए तीनों फर्मों के जी एस टी रिटर्न, कंपनी डिस्ट्रीब्यूटर से सत्यापन और मौके पर लैब टेस्ट कराकर दोषी मिलने पर प्राथमिकी दर्ज की जाए।


0 Comments