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बड़ी तुम्मी के आदिवासी छात्रों के भविष्य में प्राचार्य ने फिर ठोंकी कील

 


रिपोर्ट @संतोष कुमार मिश्रा
आखिरी तारीख निकल गई,नहीं हुये परीक्षा के पंजीयन

अनूपपुर --- सरकार कहती है आदिवासी गरीब बच्चों को पढ़ाएंगे, होनहार बनाएंगे, और बड़ी तुम्मी का प्राचार्य कहता है, मैं नहीं भरूंगा फार्म, जो करना है कर लो, शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ी तुम्मी में प्राचार्य की हठधर्मी ने अपने ही विद्यालय के  कक्षा आठवीं के 12 गरीब आदिवासी बच्चों का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया है, सरकार की बड़ी महत्वाकांक्षी योजना राष्ट्रीय आय-सह-मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा जो आठवीं के बच्चों के लिए होती है और जिसमें चुने गए बच्चों को नौवीं से बारहवीं तक हर साल बारह हजार रुपये मिलते हैं, उसमें बड़ी तुम्मी के 12 छात्रों का पंजीयन प्राचार्य के लांगिग पासवर्ड से किया जाना था, लेकिन पुष्पराजगढ़ विकासखंड के  हर प्रसाद तिवारी ने 22 अगस्त 2026 को जो प्रगति चिट्ठी जारी की है उसने शासन की इस मंशा की पोल खोल दी, पडमनिया संकुल के बिजौरा में 3 में से 3, चिरपानी में 1 में से 1, धुराधर में 8 में से 8, पडमनिया में 16 में से 16, खरशोल में 2 में से 2, गिजरी में 3 में से 3, सरफा में 9 में से 9, कोदार में 5 में से 5, सिलवारी में 2 में से 2, मतलब 10 स्कूलों ने पूरा का पूरा काम कर दिया, एक अकेला बड़ी तुम्मी जहाँ 12 पंजीयन  के बदले जीरो, , और अब आखिरी तारीख निकल गई तो कोई रास्ता नहीं बचा, जबकि बच्चों का नाम लिखने की चाबी प्राचार्य के गुप्त संकेत शब्द के पास थी, गाँव वालों का कहना है यह भूल नहीं बदला है, पिछले साल भी प्राचार्य ने एक भी नाम नहीं लिखा था, शिकायत शहडोल के बड़े साहब आयुक्त तक और मुख्यमंत्री की मदद वाली लकीर तक गई पर शिक्षा महकमे ने आँख मूंद ली, न डांट न फटकार, उसी छूट से प्राचार्य की गर्दन और अकड़ गई और इस साल फिर वही घमंड दिखा दिया, पालक कह रहे हैं पिछले साल कुछ नहीं हुआ इसलिए बच्चों का हौसला टूट गया है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, अब सबकी एक ही मांग है इस घोर लापरवाही पर प्राचार्य को कुर्सी से हटाओ, पर सवाल बड़ा है क्या शिक्षा महकमा इस बार भी कागज दबाएगा, दो साल से एक प्राचार्य पूरे अमले पर भारी पड़ रहा है, सरकार की मंशा पर कुदाल चल रही है और बड़ी तुम्मी में प्राचार्य का राज चल रहा है।























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