रिपोर्ट @संतोष कुमार मिश्रा
घटिया सामग्री क्रय कर लगाया उच्च गुणवत्ता का बिल
छह माह में ही चटकता कबाड़ पेवर
*बिरसिंहपुर पाली -* कहते हैं कागज कभी झूठ नहीं बोलते, लेकिन ग्राम पंचायत बकेली में कागजों पर ही झूठ का महल खड़ा कर दिया गया है। शासन ग्राम पंचायतों को आदर्श बनाने के लिए पांचवें राज्य वित्त आयोग से लाखों रुपये दे रही है, लेकिन उमरिया जिले की जनपद पंचायत पाली की ग्राम पंचायत बकेली में भ्रष्टाचार का ही महल तैयार किया जा रहा है। पांचवें राज्य वित्त से प्राप्त राशि से पंचायत भवन के प्रांगण में पेवर्स ब्लॉक लगाने की स्वीकृति 24 जनवरी 2026 को 3 लाख 87 हजार रुपये के नाम पर तय की गई, लेकिन यह पेवर्स ब्लॉक के नाम पर एक सुनियोजित भ्रष्टाचार का खेल रचा गया है, जिसकी गवाही खुद-ब-खुद पंचायत दर्पण पोर्टल दे रहा है।
पंचायत दर्पण 5.8 पोर्टल पर दर्ज विवरण खुद कह रहा है कि पंचायत भवन में पेवर्स ब्लॉक का कार्य 3 लाख 87 हजार रुपये व्यय कर कराया गया है। जानकारों का मानना है कि इस राशि में 900 वर्ग मीटर में बेहतरीन कंपनी का पेवर लग जाता, पूरा परिसर चमक जाता। लेकिन हकीकत इसके उलट है, जो बिलों के नाम पर शासकीय राशि को हजम करने का एक बहाना मात्र रहा है।
मालूम हो कि ग्राम पंचायत में एक ही फर्म माँ बिरासनी ट्रेडर्स, पाली जिला उमरिया के *99,828 रुपये के 3 अलग-अलग बिल* लगाए गए हैं। बिल नंबर 2023-24/197 जैसे नंबरों से 241 वर्ग मीटर पेवर ब्लॉक, रेट 400 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से कुल तीन बिल, प्रति बिल 99,828 रुपये, तीनों बिलों को मिलाकर 2 लाख 99 हजार 484 रुपये का 723 वर्ग मीटर पेवर दिखा दिया गया और कुल व्यय 3.87 लाख बता दिया गया। तीनों बिलों पर सरपंच और सचिव के हस्ताक्षर व मुहर लगी है और भुगतान एक ही खाता नंबर ICIC0001447 में किया गया है।
अब सवाल यह है कि मौके पर कितने मीटर पेवर लगा है, जो जांच का विषय बना हुआ है, जबकि बिल के अनुसार 723 वर्ग मीटर दिखाया गया है? इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि एक ही फर्म से एक ही दिन एक ही रेट पर तीन अलग-अलग बिल बनाने की क्या जरूरत पड़ी? क्या 3.87 लाख की राशि को ठिकाने लगाने के लिए बिलों के टुकड़े किए गए?
पंचायत भवन में पेवर्स ब्लॉक का असली खेल परिसर में ही दिख रहा है। परिसर में लगा पेवर उबड़-खाबड़ धंसा हुआ नजर आ रहा है, लेवल कहीं भी नहीं मिल रही है, तो वहीं लाल रंग के पेवर बदरंग चटके हुए चीख-चीख कर भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रहे हैं। ब्लॉक का सच सामने है, ब्लॉक लगते ही चटक गए हैं, कोने टूट गए हैं, सीमेंट नाम की चीज नहीं है और सिर्फ रेत और गिट्टी बिखर रही है। बाजार में 400 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से तो अल्ट्रा, एचपीएल या 80 एमएम आईएसआई मार्क का पेवर आता है जो ट्रक चढ़ने पर भी नहीं टूटता। बकेली में लगा माल तो 150 रुपये वाले लोकल भट्ठा माल से भी गया-गुजरा है, जो मोटर साइकिल चलने पर ही चूरा बन रहा है। इससे साफ है कि बिल महंगे ब्रांडेड पेवर का और माल सस्ता घटिया लगाया गया है और बीच की राशि का बंदरबांट कर लिया गया है।
यहां तीन स्तरों पर भ्रष्टाचार साफ दिख रहा है। पहला, स्वीकृत राशि 3.87 लाख और मौके पर 40-50 हजार का भी काम नहीं। दूसरा, 400 रुपये का महंगा रेट दिखाकर घटिया माल लगाना और जीएसटी जोड़कर तीन-तीन बिलों में पैसा निकालना। तीसरा, बिना गुणवत्ता जांच के, बिना लेवल चेक किए टूटे-फूटे पेवर पर सरपंच-सचिव के हस्ताक्षर से भुगतान पास होना और जनपद के उपयंत्री द्वारा आंख बंद कर सत्यापन कर देना।
पंचायत भवन जो गांव का गौरव होता है, वही आज बकेली में भ्रष्टाचार का स्मारक बन गया है। पांचवें वित्त आयोग का पैसा गांव के विकास के लिए होता है, यहां उसे तीन बिलों में बांटकर हजम करने की कोशिश हुई है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर उमरिया और जिला पंचायत सीईओ से मांग की है कि अब तो तीनों सबूत मौजूद हैं - पंचायत दर्पण का 3.87 लाख का व्यय, 99,828 के 3 बिल और मौके की टूटती तस्वीरें। इस पूरे मामले का टेप से भौतिक सत्यापन कराया जाए, पेवर के सैंपल जबलपुर लैब भेजे जाएं, बाकी 87 हजार रुपये कहां गए उसका हिसाब लिया जाए और दोषी सरपंच, सचिव, सप्लायर मां बिरासनी ट्रेडर्स और बिना जांच भुगतान करने वाले इंजीनियर पर एफआईआर दर्ज कर पूरी राशि की वसूली के साथ उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए। अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा तो यह तय है कि बकेली का यह घोटाला पूरे जिले की पंचायतों में चल रहे कमीशनखोरी के खेल की कलई खोल देगा।



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