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पेंशन के लिए एक साल से भटक रहा बैगा दंपती, रोजगार सहायक पर ₹5 हजार मांगने का आरोप

 


रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
धान बेचकर जुटाया किराया, 20 किलोमीटर दूर जनपद पंचायत पहुंचकर बुजुर्ग दंपती ने सुनाई पीड़ा; प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग

अनूपपुर। शासन की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य समाज के गरीब, बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहारा देना है। लेकिन जनपद पंचायत अनूपपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत छिल्पा से सामने आया एक मामला इन योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है। यहां 65 वर्षीय रेज्जु बैगा और 62 वर्षीय ईती बाई बैगा पिछले करीब एक साल से पेंशन के लिए पंचायत से लेकर जनपद कार्यालय तक भटकने का दावा कर रहे हैं।

मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को बुजुर्ग बैगा दंपती अपनी समस्या लेकर करीब 20 किलोमीटर दूर जनपद पंचायत अनूपपुर पहुंचे। आर्थिक रूप से कमजोर दंपती ने मीडिया के सामने अपनी परेशानी बताते हुए ग्राम पंचायत में पदस्थ रोजगार सहायक मोहन साहू पर पेंशन दिलाने के नाम पर ₹5 हजार की राशि मांगने का आरोप लगाया।

धान बेचकर जुटाया आने-जाने का किराया

रेज्जु बैगा और ईती बाई का कहना है कि उनका परिवार बेहद आर्थिक तंगी में जीवन गुजार रहा है। सरकारी राशन के सहारे किसी तरह गुजर-बसर करने वाले इस दंपती के लिए ₹5 हजार की व्यवस्था करना आसान नहीं है। उनका आरोप है कि पेंशन की उम्मीद में वे करीब एक साल से ग्राम पंचायत के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

लगातार पंचायत के चक्कर लगाने के बाद जब कोई रास्ता नहीं निकला तो दंपती ने आने-जाने का किराया जुटाने के लिए धान तक बेच दिया। इसके बाद वे अपनी फरियाद लेकर जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे।

उम्मीद लेकर पहुंचे, लेकिन अधिकारी नहीं मिले

दंपती के मुताबिक, जनपद पंचायत पहुंचने पर उन्हें संबंधित अधिकारियों से तत्काल मुलाकात नहीं हो सकी। बताया गया कि जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनसुनवाई के सिलसिले में अनूपपुर में मौजूद थे, जबकि पेंशन संबंधी कार्य देखने वाला संबंधित कर्मचारी अवकाश पर था।

ऐसे में दूर-दराज से अपनी समस्या लेकर पहुंचे बुजुर्ग दंपती को तत्काल समाधान नहीं मिल सका। उनकी स्थिति को देखते हुए मौजूद मीडिया कर्मियों ने उन्हें समझाइश दी और वापस अपने गांव लौटने को कहा।

सवालों के घेरे में पंचायत स्तर की व्यवस्था

इस मामले ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि दंपती पेंशन के पात्र हैं तो उन्हें इसका लाभ दिलाने में करीब एक वर्ष क्यों लग रहा है? उनकी ओर से पंचायत स्तर पर दिए गए आवेदनों और शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई? क्या उनकी पात्रता और दस्तावेजों की जांच समय पर की गई?

सबसे गंभीर आरोप पेंशन दिलाने के नाम पर ₹5 हजार मांगने का है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह न केवल जरूरतमंद हितग्राही के अधिकारों से जुड़ा मामला होगा, बल्कि पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

अब मांग उठ रही है कि जनपद पंचायत और जिला प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए बुजुर्ग बैगा दंपती की पेंशन पात्रता और आवेदन की स्थिति की जांच कराए। साथ ही रोजगार सहायक पर लगाए गए राशि मांगने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच हो, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय की जा सके।

हालांकि, रोजगार सहायक मोहन साहू पर लगाए गए ₹5 हजार मांगने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। संबंधित रोजगार सहायक का पक्ष और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



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