रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
पटाखे जलाते समय हाथ और चेहरे को उनसे सुरक्षित दूरी पर रखें :- डॉ. राजेश मिश्रा
शहडोल :- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा ने जिले के नागरिकों को दीपो का पर्व "दीपावली" की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि है दीपावली खुशियों और रोशनी का त्योहार है। इस पावन पर्व पर अपनी आंखों का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि पटाखे जलाते समय सुरक्षित दूरी बनाए रखें,आंखों में चिंगारी या धुआं जाने से बचाए, आंखों में जलन होने पर तुरंत साफ पानी से धोएं और डॉक्टर से परामर्श लें,सुरक्षित दीपावली मनाएं, अपनी आंखों की रोशनी और खुशियां बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि पटाखे हमेशा खुले एवं सुरक्षित स्थानों पर ही जलाएं। इमारतों, वाहनों, सूखी वनस्पतियों एवं ज्वलनशील पदार्थों से पर्याप्त दूरी रखें। आतिशबाजी के दौरान सूती कपड़े पहनें तथा बंद जूते का उपयोग करें। बच्चों को बिना वयस्क निगरानी के पटाखे न दें और उन्हें पटाखे जेब में नहीं रखने की समझाइश दें। पटाखे जलाते समय पानी या रेत से भरी बाल्टी पास में रखें तथा एक समय में केवल एक ही पटाखा जलाएं।
पटाखे जलाते समय हाथ और चेहरे को उनसे सुरक्षित दूरी पर रखें। अनार, चकरी एवं बम को हाथ में रखकर न जलाएं, बल्कि समतल जमीन पर रखकर ही प्रज्वलित करें। रॉकेट को हाथ से अथवा क्षैतिज दिशा में न छोड़ें। अतिरिक्त आवाज या प्रभाव के लिए पटाखों को टिन के डिब्बे, बर्तन अथवा कांच की बोतल से न ढकें। यदि कोई पटाखा जलने के बाद नहीं फूटता है तो उसके पास न जाएं और कम से कम 20 मिनट प्रतीक्षा करने के बाद उस पर पानी डालकर निष्क्रिय करें। पटाखे किसी व्यक्ति या पशु की ओर न फेंकें।
पटाखों से निकलने वाला धुआं एवं हानिकारक रासायनिक तत्व श्वसन और हृदय संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। इससे अस्थमा एवं ब्रोंकाइटिस के मरीजों को विशेष परेशानी हो सकती है। ऐसे मरीज आतिशबाजी के दौरान घर के भीतर रहें। तेज आवाज वाले पटाखों से बचें, क्योंकि इनसे सुनने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। आतिशबाजी के बाद इस्तेमाल किए गए एवं बिना फटे पटाखों को खुले में न छोड़ें। जले हुए पटाखों का सुरक्षित निपटान करें तथा साबुन और पानी से हाथ अच्छी तरह धोएं।


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