रिपोर्ट @मंजूर मंसूरी
शहडोल जिले की राजस्व व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने सख्त तेवर अख्तियार कर लिए हैं। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि राजस्व न्यायालयों में जनता के काम लटकाने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। कलेक्टर ने आरसीएमएस में दर्ज नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे के लंबित प्रकरणों को समय-सीमा में निपटाने के दो टूक निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर डॉ. सिंह ने राजस्व सर्किल और तहसील स्तर के अधिकारियों की क्लास लेते हुए कहा कि जो प्रकरण तीन महीने से अधिक समय से लंबित हैं, उन्हें अभियान चलाकर तत्काल निराकृत किया जाए। जनता को तहसील के चक्कर लगवाना अब भारी पड़ सकता है। उन्होंने नक्शा विहीन और जीर्ण-शीर्ण नक्शे वाले ग्रामों की सूची भू-अभिलेख शाखा को भेजने के निर्देश दिए, ताकि नए नक्शों के जरिए त्रुटिहीन रिकॉर्ड तैयार हो सके। बैठक में शासकीय जमीन आवंटन और सरकारी परिसंपत्तियों की सुरक्षा पर भी मंथन हुआ। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि अभियान चलाकर सभी सरकारी परिसंपत्तियों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए, ताकि अतिक्रमण और विवादों की स्थिति न बने। साथ ही, राजस्व वसूली में लक्ष्य से पीछे चल रहे तहसीलदारों को पुरानी वसूली प्राथमिकता पर करने की चेतावनी दी गई है। लचर प्रदर्शन करने वाली तहसीलों को आड़े हाथों लेते हुए कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन की 50 दिन से अधिक लंबित शिकायतों का त्वरित समाधान करने को कहा। उन्होंने दो टूक कहा कि जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ कार्यालयों से प्राप्त पत्रों की अनदेखी कतई बर्दाश्त नहीं होगी। वहीं, फार्मर रजिस्ट्री के कार्य में पिछड़ी तहसीलों को गांव-गांव शिविर लगाकर काम पूरा करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया है। बैठक में अपर कलेक्टर सरोधन सिंह सहित जिले के सभी एसडीएम और तहसीलदार मौजूद रहे, जिन्हें कलेक्टर ने फील्ड पर उतरकर परिणाम देने के निर्देश दिए हैं।


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