Ticker

6/recent/ticker-posts

सूचना अधिकार अधिनियम लोक सेवकों के हाथ का खिलौना

 


रिपोर्ट @संतोष कुमार मिश्रा

जनता के अधिकार की उड रही धज्जियाँ

उमरिया -- सूचना अधिकार अधिनियम लोक सूचना अधिकारियों के हाथ का खिलौना बन कर रह गया है, लोक हित में सूचना अधिकार का विधिवत आवेदन करने के बाद भी उसे सही समय पर सूचना हासिल हो जाये तो इसे लोक सूचना अधिकारी की महती कृपा मानेनी पडती है, नही तो आपका आवेदन कहा रद्दी की टोकरी में समा गया, उसके लिए अपील पर अपील करते थक हार कर घर बैठ जायेगे, कोई अधिकृत जानकारी उपलब्ध नहीं करायी जाती है, कमोवेश सूचना अधिकार अधिनियम की स्थिति पूरे जिले के सभी विभागों की बनी हुई है, परन्तु जिले का पाली विकास खंड में यह मनमानी चरम पर छायी हुई है। विदित होवे की सैकड़ों सूचना अधिकार अधिनियम के  तहत आवेदन पत्र विभिन्न विषयों से संबंधित विभिन्न विभागों में लगाये गये और सूचना न मिलने के कारण वह आज  औचित्य हीन साबित हो रहें हैं, और तो और अपीलीय अधिकारियों ने भी अपीलों के निपटाने में कोई दिलचस्पी नहीं लेते, जिससे आज नागरिकों को मिले  सूचना अधिकार अधिनियम आज बेअसर हीन साबित हो रहें हैं।

सूचना अधिकार अधिनियम जनता को मौलिक अधिकारों के रुप में वर्ष 2005 में मिला था, जिसका मूल उद्देश्य नागरिकों को सहजता से कोई भी जानकारी सुलभ हो सकें और कोई भी लोक सेवक मनमानी पूर्ण कृत्य भष्टाचार करने से डरें, लेकिन अधिकारियों ने सूचना अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ा कर रख दी है और सूचना अधिकार अधिनियम के आवेदनों को ठण्डे बस्ते में डालकर अपने मनमानी का साम्राज्य कायम कर रखा है। कलेक्टर जैसे संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी भी अपील के मामलों में सुनवाई करना उचित नहीं समझते। मामला पाली तहसील के बहु प्रसिद्ध बिरासनी मंदिर में खरीदी गयी सामग्री का है। बिरासनी मंदिर में बहु तादाद में सामग्री क्रय की जाती है और उसमें माता की ज्योति में हेराफेरी की जाती है, जो कि मंदिर प्रबंध समिति जिसके अध्यक्ष उमरिया जिले के पदेन कलेक्टर होते हैं और सामग्री क्रय करने की जिम्मेदारी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पाली की निगरानी में की जाती है। बताया जाता है कि मंदिर प्रबंध समिति के व्दारा क्रय किये गये घी  खरीदी  मामले की जानकारी के लिए सूचना अधिकार अधिनियम के तहत  ओम कुमार गुप्ता के व्दारा विधिवत आवेदन पत्र देकर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पाली के कार्यालय में 16 अक्टूबर 2025 को लगायी गयी थी , जिसपर लोक सूचना अधिकारी के व्दारा आधी - अधूरी जानकारी उपलब्ध करायी गयी थी, जिस पर पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पुनः इसी कार्यालय में 26 दिसम्बर 2025 को विधिवत अपील प्रस्तुत कर जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था, जिस पर कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं लोक सूचना अधिकारी अनुभाग पाली ने अपने पत्र क्र /11/ आर टी आई /2026 दिनांक 02 जनवरी 2026 के माध्यम से ओम कुमार गुप्ता को यह कहते हुए अपील खारिज कर दी गई की आपकी अपील  त्रुटि वश प्रेषित किया गया है, उक्त आवेदन पत्र अपीलीय अधिकारी इस कार्यालय से संबंधित नहीं है। ऐसे मामलो में लोक सूचना अधिकारी को अगली अपीलीय अधिकारी का नाम पता साफ तौर पर बताने का प्रावधान है फिर भी लोक सूचना अधिकारी ने इसका पालन नहीं किया। फिर भी आवेदक ने इस मामले की विधिवत अपील कलेक्टर उमरिया के कार्यालय में प्रथम अपीलीय अधिकारी मानकर अपील अंर्तगत 2005 की धारा  19(1) सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत 26-12-2025 को लगायी गयी है। जिसकी भी समयावधि बीत रही है परन्तु आवेदक को अब तक कोई लाभ नहीं मिला। इस तरह से देखा जाये तो सूचना अधिकार अधिनियम आज आम नगरिकों की पहुंच से दूर होता जा रहा है। कलेक्टर जैसे संवेदनशील अधिकारी जब सूचना अधिकार अधिनियम के आवेदन और अपील पर सुनवायी नहीं करते तो अन्य प्रशासनिक कार्यालयों की मनमानी अव्वल पर होना कठिन नहीं कही जा सकती।

सूचना अधिकार का नहीं बना बोर्ड 

सूचना अधिकार अधिनियम में नागरिकों की सुविधा को दृष्टि गत रखते हुए हर शासकीय कार्यालयों में सूचना अधिकार का बोर्ड होना अनिवार्य है जिसमें लोक सूचना अधिकारी का नाम पद और अपीलीय अधिकारी का नाम  पद पता का सरल, सहज और सुलभ स्थल पर सहज दृष्टि गोजर होनी चाहिए थी,लेकिन  अनुविभागीय अधिकारी अनुभाग कार्यालय पाली में सूचना बोर्ड ही नहीं है, जिससे लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पडता है।



Post a Comment

0 Comments