रिपोर्ट @मिर्जा अफसार बेग
क्या विभागीय संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध उत्खनन का नेटवर्क?
अनूपपुर। जिले के मुख्यालय क्षेत्र में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन का मुद्दा अब गंभीर और चिंताजनक रूप ले चुका है। मानपुर की रेत खदान से लेकर आसपास के नदी-नालों तक भारी मशीनों और ओवरलोड वाहनों की लगातार आवाजाही यह साफ संकेत दे रही है कि रेत माफियाओं के हौसले किस कदर बुलंद हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा अवैध कारोबार खनिज विभाग के कार्यालय के आसपास ही संचालित हो रहा है, इसके बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई का न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपरों के माध्यम से ओवरलोड रेत का परिवहन धड़ल्ले से जारी है। कई वाहन निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक रेत लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे न केवल शासन को भारी राजस्व हानि हो रही है, बल्कि सड़कों की स्थिति भी तेजी से खराब होती जा रही है। इसके साथ ही, ऐसे वाहनों से दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बढ़ रही है, जो आमजन की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
जनता में आक्रोश, उठ रहे तीखे सवाल
स्थानीय नागरिकों में इस पूरे मामले को लेकर गहरी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जब अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है, तो खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन तक इसकी जानकारी न होना असंभव है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इस पूरे खेल को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
मिलीभगत की चर्चा ने बढ़ाई शंका
क्षेत्र में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि विभागीय मिलीभगत के बिना इस तरह का संगठित अवैध कारोबार संभव नहीं है। यही कारण है कि रेत माफियाओं के हौसले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं, और प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में आती जा रही है।
रात में तेज होता खेल, उड़नदस्ता ‘गायब’
चंगेरी खदान क्षेत्र में रात होते ही हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। जानकारी के मुताबिक, अंधेरा होते ही ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स की गतिविधियां तेज हो जाती हैं। नियमों को ताक पर रखकर अवैध मार्गों से वाहनों की आवाजाही और रेत की लोडिंग जारी रहती है, लेकिन खनिज विभाग का उड़नदस्ता मौके से नदारद रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानो रात के समय पूरा सिस्टम “ब्लैकआउट मोड” में चला जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आम नागरिक आसानी से इस अवैध गतिविधि को देख सकते हैं, तो करोड़ों का बजट रखने वाला विभाग इस पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं कर पा रहा है?
पर्यावरण पर मंडराता संकट
लगातार हो रहा अवैध उत्खनन पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। इससे नदी-नालों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में जलस्तर तेजी से गिर सकता है, जिससे क्षेत्र में जल संकट गहराने की आशंका है। इसके साथ ही जल स्रोतों पर निर्भर जीव-जंतुओं का जीवन भी प्रभावित होगा।
अब कार्रवाई या फिर सवालों का सिलसिला?
स्थिति इस कदर गंभीर हो चुकी है कि अब प्रशासन के सामने सख्त कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। रेत माफियाओं के बढ़ते हौसले और प्रशासन की निष्क्रियता ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जनता की नजरें अब प्रशासन पर टिकी हैं—यह देखना होगा कि क्या जिम्मेदार विभाग इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाता है या फिर चुप्पी का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।


0 Comments