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नमूना जांच तक सिमटा खाद्य महकमा

 


रिपोर्ट @संतोष कुमार मिश्रा

मौत के सौदागरों से सांठ गांठ की काली परछाई 

उमरिया--- उमरिया जिले में अमानक खाद्य पदार्थों, मिलावटी खाद्य सामग्री,नकली और मिलते -जुलते नाम की खाद्य सामग्री, एक्सपायरी तिथि की सामग्री, का प्रचलन पूरे जिले भर में  जोरों  पर कही भी निरतंर रूप से  जारी है , लेकिन जिले में पदस्थ खाद्य विभाग का महकमा अपनी ताजपोशी का पूरा लाभ उठाते हुए लाखों रूपयों का वारा न्यारा हर माह करती देखी जा रही है और  कार्यवाही के नाम पर सेपलिंग का खेल खेलकर बाजार में मौत के सौदागरों को खुली छुट दे रखी है। जब तब जिला खाद्य अधिकारी व्दारा बाजार में छापामार कार्यवाही तो की जाती है,जिस पर सेपलिंग तक ही इनकी कार्यवाही सिमटी नजर आ रही है। उसके आगे की कार्यवाही उनके डिक्शनरी में नहीं है।तभी तो हर साल या कि अब तक हजारों सैंपलिग ली जा चुकी है,लेकिन उसके आगे कितने मामलों में कार्यवाही हुई वह न के बराबर देखी जा रही है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी की यह सैंपलिग की  कार्यवाही उन व्यवसायियों को खबर दार करने के लिए पर्याप्त होती है ,जो जिला खाद्य अधिकारी की हुकुमत मानने को तैयार नहीं थे।  अब वह भी खाद्य अधिकारी की सामाज्य के आधीनता स्वीकार कर उनके मंशा के अनुरूप हर माह पैरवी करने पहुचने लगते हैं। 

खाद्य विभाग में सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्यवाही का प्रावधान है जिसके तहत नमूना लेना , जांच, कार्यवाही, लाइसेंस निरस्त करना, दंड लगाने के कठोर नियम शामिल हैं परन्तु उमरिया जिले में खाद्य विभाग के व्दारा अधिकतम मामलों में सैंपलिग और जांच में ही मामलो का निराकरण कर लिया जाता है। अधिकाशत‌: मामले इसी स्तर पर सुलझा लिये जाते हैं, चूंकि उमरिया जिले में सभी बाजारों में खाद्य विभाग की गहरी पैठ है और कार्यवाही न हो इसके लिए बकायदा व्यापारियों से इन अधिकारियों का महीने का हक हिसाब बराबर पहुंचता रहता है, जो प्रतिमाह एक एक शहर से लाखों में होता है । अगर कभी इस पर कमी हुई तो   खाद्य अधिकारी के कोप भाजन का शिकार वहा के व्यवसायियो को भुगतना पड़ता है, उन दूकानों में फिर शुरू होती है, छापामार कार्यवाही। जिले भर के व्यापारी प्रतिष्ठानों में खाद्य महकमा के अधिकारियों की  भारतीय आतित्थ परंपरा के अनुरूप उनकी मेहमान नवाज़ी, स्वागत कर बिदाई में थैली भेंट की परंपरा को बखूबी निभाते देखे जाते हैं  । 

उमरिया जिले में कई सनसनी खेज मामले प्रकाश में आये लेकिन उन मामलों में भी छापामार कार्यवाही और  नमूना जांच के बाद किसी पर आज तक वैधानिक कार्यवाही का चाबुक न चलना खाद्य विभाग की ईमानदारी की एक झलक के रूप में देखी जा रही है। 

उमरिया जिले में राष्ट्रीय उद्यान स्थित ताज सफारी और मानसून फांरेस्ट पर 11 दिसंबर 2025 को खाद्य विभाग की छापामार कार्यवाही में ताज सफारी में बिना लाइसेंस के अवैध बार व बेक्ररी  और मानसून फांरेस्ट में सडी सब्जियां, कीट युक्त आटा, गंदगी पाये जाने पर दोनों रिसांर्रटस के खिलाफ नोटिस जारी कर लाइसेंस निलंबन की कार्यवाही की गयी थी, लेकिन दोनों रिसांर्रटस आज तीन माह व्यतीत होने के बाद भी यथावत अपने कारनामों को अंजाम तक पहुचा रहे हैं। इस तरह   खाद्य विभाग व्दारा इस पर तरह के  घिनौना खेल खेला जा रहा है , जिससे सही और ईमानदार व्यापारियों के नाक में दम करके रखा है, जिससे यह प्रतीत होता है कि जब खाद्य विभाग को पैसा भरना ही है तो उसी से हम भी दो पैसा कमाने की जुगत करना चाहिए और यही से शुरू होता अमानक पदार्थों की बिक्री का सिलसिला जिसके नाग फास में पूरा बाजार फंसा नजर आ रहा है। अपेक्षा है वरिष्ठ अधिकारियों से की उमरिया जिले के अब तक की कार्यवाही की एक बार समीक्षा कर भष्ट और बेईमानी की राह पकड चुके खाद्य विभाग के कृत्यों पर रोक लगाने आवश्यक कदम उठायेगे।



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