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दुबे परिवार में बह रही भागवत की अमृत मयी रसधारा

 


रिपोर्ट @शम्भूनाथ सोनी

भक्तों से बढती है, भगवान की महिमा 

उमरिया --- उमरिया जिले के दूराचंल गाँव नरवार में दुबे परिवार में 14 अप्रैल से श्री मद भागवत कथा की अबिरल अमृत धारा बह रही है। आज भागवत कथा के तीसरे दिवस व्यास देव की आंसदी से श्री मुख से महराज जी ने भक्त शिरोमणि धुर्व जी की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि धुर्व जी ने शैशव काल में ही भगवान की कठिन तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया था।धुर्व चरित्र की कथा श्री मद भागवत पुराण की एक अत्यंत प्रेरणा दायक कथा है जो कि 5 वर्षीय बालक धुर्व की दृढ़ता अटूट भक्ति और भगवान विष्णु की कृपा को दर्शाती है। सौतेली माँ सुरूचि के अपमान   पिता के गोद से उतारने से आहत होकर धुर्व ने अपनी माँ सुनीति के सलाह पर वन में जाकर कठोर तपस्या के लिए चले गए थे, जहाँ पर नारद जी के शिष्यवत उन्होंने तपस्या की थी।धुर्व की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें अटल वरदान देकर आकाश मंडल में धुर्व तारा के रूप में आज भी सुशोभित हो रहा है। इसी तरह बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए भक्त राज प्रहलाद की कथा का वर्णन करते हुए गुरु जी ने बताया कि असुर सम्राट हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रहलाद में प्रभु की भक्ति पर अटूट विश्वास था, उस विश्वास को बरकरार रखने के लिए भगवान को नरसिंहावतार के रूप में आकर हिरण्यकश्यप का उद्धार किया था। भक्त प्रहलाद ने यह साबित कर दिया है कि हर कण में भगवान का वास है जिसको साबित करने के लिए प्रभु को खंभा से प्रगट होना पड़ा। भक्त प्रहलाद की कथा से ही उनकी बुआ होलिका  की कथा जुडी हुई है, जहाँ पर भगवान ने होली जैसे विशाल अग्नि में अपने भक्त की रक्षा की थी। भक्त प्रहलाद को मारने के लिए अनेकों प्रयास किये गए परन्तु नारायण के प्रति उनकी सच्ची निष्ठा ने हरबार उनकी रक्षा की जिससे वह सदाचारी भगवद भक्त बन कर अपना नाम अमर कर गये।

इस तरह दुबे परिवार में इन दिनों श्री मद भागवत कथा की रस मयी कथा का रसपान करने भारी संख्या में श्रोता गण पहुँच कर रसपान का आनंद ले रहे हैं।


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