रिपोर्ट @ शम्भूनाथ सोनी
स्कूल सलैया 01 का मामला
बिरसिंहपुर पाली --- माध्यमिक शिक्षा मंडल के व्दारा परीक्षा परिणामों के आने के बाद विद्यालयों के व्दारा की गयी चालाकी की परतें खुलकर सामने आने लगी है। बताया जाता है कि विद्यालयो के प्राचार्यो के व्दारा परीक्षा परिणामों को बेहतर बनाने के लिए अध्ययन में जोर देने की बजाय उन छात्रों को प्रायवेट बना कर अपने सिर का भार हल्का करते देखे जा रहे हैं, ऐसा ही एक सनसनीखेज खुलासा पाली विकास खंड के सलैया 01 में प्रकाश में आया है, जहाँ पर प्राचार्य ने रेग्युलर छात्रों को प्रायवेट घोषित कर उन आदिवासी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। दर असल जिन छात्रों ने विद्यालय में अध्ययन -अध्यापन के लिए लिए शिकायत दर्ज करायी थी, प्राचार्य महोदय ने चुन चुन कर उन्ही छात्राओं को प्रायवेट बना दिया है। विचारणीय प्रश्न यह है कि जब कक्षा नवमी में ही रेग्युलर छात्रों का नामांकन माध्यमिक शिक्षा मंडल में दर्ज करा दिया जाता है तब बिना टांसफर सर्टिफिकेट ( टी सी ) के उन छात्रों को प्रायवेट कैसे घोषित कर दिया गया है। यह अपने आप में एक गंभीर जांच का बिषय बना हुआ है, लेकिन आखिर कार जांच कौन करेगा, क्योंकि जांच करने वाले तो पहले भी किये और अपनी तासीर ठंडी कर मामलों को ठंडे बस्ते में डाल सदा के लिए दफन कर दिये गये हैं।विदित होवे की जिन छात्रों को प्रायवेट घोषित किया गया है उनमें लक्ष्मी बैगा, अर्चना खैरवार, सपना खैरवार, और गणेश बैगा के नाम सामने आये है। यह सभी विद्यार्थी पाली विकास खंड के सलैया 01 में कक्षा 10 वी में नियमित रूप से अध्ययन करते रहे हैं लेकिन इन्हें प्राचार्य श्री मती मनोरमा सोनी के व्दारा जान बुझकर प्रायवेट बना दिया गया। बताया जाता है कि फरवरी माह में इन छात्रों ने विद्यालय में अग्रेजी बिषय की पढ़ाई को लेकर शिकायत दर्ज करायी थी, जिस पर आयुक्त आदिवासी शहडोल ने खंड शिक्षा अधिकारी सरिता जैन से जांच करायी थी। शिकायत सही होने के बाद भी खंड शिक्षा अधिकारी ने जांच में लीपापोती करते हुए मामले को दफन कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप प्राचार्य के हौसले बुलंद हो गयें और उन्होंने छात्रों को सबक सिखाने के लिए नियमित छात्रों को प्रायवेट का तगमा देकर उनके भविष्य को ही दांव पर लगा दिया।


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